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वाराणसीः गंगा में इफ्तार कराने पर 14 को हिरासत में लिया गया, बचा हुआ खाना नदी में फेंकने का आरोप

वाराणसी के गंगा नदी में इफ्तार कराने को लेकर पुलिस ने 14 लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस ने बचा हुआ खाना नदी में फेंकने का आरोप लगाया है।

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फोटोः आईएएनएस

वाराणसी पुलिस ने मंगलवार (17 मार्च) को कथित तौर पर गंगा नदी में नावों पर इफ्तार कराने को लेकर 14 लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस ने कहा कि इन लोगों पर चिकन बिरयानी खाने और बचा हुआ खाना नदी में फेंकने का आरोप है।

इंडियन एक्सप्रेस ने वाराणसी के सहायक पुलिस आयुक्त विजय प्रताप सिंह के हवाले से लिखा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो के आधार पर पुलिस ने 20 वर्ष की आयु के 14 युवकों की पहचान की और उन्हें हिरासत में लिया। उन्होंने बताया कि वे स्थानीय निवासी हैं और शहर में साड़ी की दुकानों में काम करते हैं।

पुलिस ने क्या बताया?

पुलिस ने कहा कि आरोपियों ने कथित तौर पर रविवार को इफ्तार आयोजित की और सोशल मीडिया पर एक रील बनाने के लिए इसे अपने फोन में रिकॉर्ड किया।

सिंह ने कहा कि ” हम फिलहाल इसके उद्देश की जांच कर रहे हैं और उनसे पूछताछ कर रहे हैं। आरोपियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। “

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पुलिस ने भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष रजत जायसवाल की शिकायत के आधार पर प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 298 ( किसी वर्ग के धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाना या अपवित्र करना ), 299 ( किसी वर्ग के धर्म या धार्मिक मान्यताओं का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य करना ), 196 (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना), 270 (सार्वजनिक उपद्रव) और 223 (जानबूझकर झूठे साक्ष्य का उपयोग करना) के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस ने जल ( प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण ) अधिनियम भी लागू किया है।

शिकायतकर्ता ने क्या कहा?

पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने कहा है कि गंगा सनातन धर्म के अनुयायियों के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखती है और आस्था के एक मुख्य प्रतीक के रूप में पूजनीय है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि प्रतिदिन भारत और विदेश से लाखों श्रद्धालु गहरी श्रद्धा के साथ इसके तट पर आते हैं और इसके पवित्र जल का सेवन करते हैं।

शिकायत में कहा गया है कि लोगों ने चिकन खाया और बचा हुआ खाना नदी में फेंक दिया।

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शिकायतकर्ता ने कहा कि ऐसे कृत्य सनातन धर्म के अनुयायियों के धार्मिक भावनाओं को आहत करते हैं और लोगों के बीच असंतोष होता है। शिकायतकर्ता ने अधिकारियों से नाव चलाने वाले के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया है। इसमें उसके खिलाफ चालान जारी करने और तत्काल प्रभाव से उसका लाइसेंस रद्द करने की भी मांग की गई है।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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