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ईरान-अमेरिका टकराव तेज, तेहरान का दबाव में न झुकने का एलान, ट्रंप बोले- डील नहीं तो ‘बम फटेंगे’

ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता से पहले माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण होता नजर आ रहा है। पाकिस्तान में मंगलवार को होने वाली संभावित बातचीत से ठीक पहले तेहरान ने संकेत दिया है कि वह अपनी रणनीति बदल सकता है और जरूरत पड़ने पर “मैदान में नए पत्ते खोलने” के लिए तैयार है।

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एआई इमेज।

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनातनी अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। दो हफ्तों से जो दोनों देशों के बीच लड़ाई रुकी हुई थी, वह अब फिर से शुरू हो सकती है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ तौर पर कह दिया है कि अगर बुधवार शाम तक ईरान उनकी शर्तों को नहीं मानता, तो वे समझौते को आगे नहीं बढ़ाएंगे। उन्होंने सीधे शब्दों में धमकी दी है कि अगर बात नहीं बनी, तो अमेरिका फिर से बमबारी शुरू कर देगा।

सोमवार को दिए एक साक्षात्कार में बेहद सख्त लहजे का इस्तेमाल करते हुए कहा कि 7 अप्रैल को घोषित युद्धविराम बुधवार शाम को समाप्त हो जाएगा। ट्रंप ने कहा कि वे किसी भी तरह के ‘खराब सौदे’ के लिए जल्दबाजी में नहीं हैं और उनके पास पर्याप्त समय है।

उन्होंने सीधे शब्दों में चेतावनी दी कि अगर बुधवार तक उनकी डील पूरी नहीं हुई, तो बहुत सारे बम फटने लगेंगे। अमेरिकी सेना ने अब तक ईरान की ओर जाने वाले 27 जहाजों को रोककर वापस भेज दिया है। ट्रंप का साफ कहना है कि जब तक कोई ठोस शांति समझौता नहीं हो जाता, तब तक होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी और ईरानी जहाजों के लिए यह समुद्री मार्ग पूरी तरह बंद रहेगा।

‘ईरान अमेरिका के दबाव में झुकने वाला नहीं’

दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि ईरानी जनता दबाव या जोर-जबरदस्ती के आगे झुकने वाली नहीं है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि किसी भी सार्थक बातचीत की बुनियाद भरोसे और वादों के पालन पर टिकी होती है। अमेरिकी रवैये को लेकर उन्होंने ऐतिहासिक अविश्वास का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि वॉशिंगटन की ओर से लगातार विरोधाभासी और गैर-रचनात्मक संकेत मिल रहे हैं, जो यह दिखाते हैं कि अमेरिका ईरान का समर्पण चाहता है।

ईरान की सरकारी एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक मौजूदा हालात में बातचीत से सकारात्मक नतीजे की उम्मीद कम है। इसी वजह से ईरान ने शांति वार्ता के दूसरे दौर में शामिल होने से इनकार कर दिया। एजेंसी ने इसके पीछे अमेरिका की बेतुकी मांगें, अव्यवहारिक अपेक्षाएं, बार-बार रुख बदलना और समुद्री नाकाबंदी को प्रमुख कारण बताया है। ईरान का मानना है कि यह नाकाबंदी युद्धविराम की भावना के खिलाफ है।

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी संकेत दिया कि अगले दौर की वार्ता को लेकर अब तक कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि अमेरिका एक तरफ कूटनीति की बात करता है, लेकिन उसके कदम उससे मेल नहीं खाते। बघाई ने आरोप लगाया कि युद्धविराम लागू होने के बाद से ही अमेरिका की ओर से खराब नीयत और लगातार शिकायतों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि समझौते के बावजूद होर्मुज में समुद्री गतिविधियों में बाधाएं आईं और एक ईरानी व्यापारिक जहाज पर कथित अमेरिकी हमले को उन्होंने आक्रामक कदम बताया।

उधर, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बगेर गालिबाफ ने भी ट्रंप पर तीखा हमला बोला है। ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप कूटनीति को कमजोर कर रहे हैं और बातचीत को “समर्पण की मेज” में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। ग़ालिबाफ़ ने कहा कि अमेरिका द्वारा कथित नाकाबंदी और युद्धविराम के उल्लंघन ने हालात को और बिगाड़ा है। उन्होंने कहा कि हम धमकियों की छाया में बातचीत स्वीकार नहीं करते। साथ ही यह भी बताया कि ईरान पिछले दो हफ्तों से कुछ ऐसे कदमों की तैयारी कर रहा है, जिनका अभी खुलासा नहीं किया गया है।

दूसरे दौर की बातचीत पर भ्रम की स्थिति

ईरान और अमेरिका के बीच संघर्षविराम 22 अप्रैल को खत्म हो रहा है। मीडिया रिपोर्टों की मानें तो पाकिस्तान में दूसरे दौर की शांति वार्ता प्रस्तावित है। लेकिन ईरान इस बातचीत में शामिल होने से इनकार कर रहा है। ऐसे में वार्ता को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस अभी तक पाकिस्तान के लिए रवाना नहीं हुए हैं, जबकि पहले यह कहा गया था कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए निकल चुका है।

वहीं, ईरान भी अब तक अंतिम फैसला नहीं ले पाया है और वह शांति वार्ता में शामिल होने पर विचार कर रहा है। ईरान का कहना है कि एक तरफ तो अमेरिका बातचीत की बात करता है और दूसरी तरफ समुद्र में हमारे व्यापारिक जहाजों पर हमले कर रहा है। ईरान के अधिकारियों का कहना है कि जब तक अमेरिका का यह दोहरा रवैया बंद नहीं होता, तब तक ऐसी किसी भी बैठक का कोई मतलब नहीं है।

इस बीच पाकिस्तान ने भरोसा जताया है कि वह ईरान को बातचीत की मेज तक लाने में सफल हो सकता है। एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी के मुताबिक ईरान से सकारात्मक संकेत मिले हैं और कोशिश की जा रही है कि वह वार्ता शुरू होते ही या उसके तुरंत बाद इसमें शामिल हो जाए।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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