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ट्रंप ने कहा- ईरान 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते के लिए सहमत हो जाएगा; स्विट्जरलैंड वार्ता टली

इस बीच, स्विट्जरलैंड में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता अचानक स्थगित कर दी गई। किसी भी पक्ष ने आधिकारिक तौर पर इसका कारण नहीं बताया है, लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि लेबनान में इजराइल के हालिया सैन्य अभियानों और क्षेत्रीय तनाव के कारण ईरान ने फिलहाल बातचीत से दूरी बना ली है।

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Donald Trump
फोटोः समाचार एजेंसी आईएएनएस

वॉशिंगटन/तेहरानः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उम्मीद है जताई है कि ईरान हाल ही में हुए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) के आधार पर 60 दिनों के भीतर एक अंतिम और व्यापक समझौते के लिए तैयार हो जाएगा। ट्रंप ने इसके साथ ही चेतावनी भी दी कि अगर निर्धारित समय-सीमा के भीतर कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ऐसे कदम उठा सकता है जो ईरान के लिए स्वीकार्य नहीं होंगे। हालांकि उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि स्थिति वहां तक नहीं पहुंचेगी।

मैरीलैंड स्थित जॉइंट बेस एंड्रयूज में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि एमओयू के तहत दोनों पक्ष अधिकतम 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर बातचीत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हालांकि आवश्यकता पड़ने पर आपसी सहमति से इस समय-सीमा को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

स्विट्जरलैंड में टली अमेरिका-ईरान वार्ता

इस बीच, स्विट्जरलैंड में होने वाली अमेरिका-ईरान वार्ता अचानक स्थगित कर दी गई। किसी भी पक्ष ने आधिकारिक तौर पर इसका कारण नहीं बताया है, लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि लेबनान में इजराइल के हालिया सैन्य अभियानों और क्षेत्रीय तनाव के कारण ईरान ने फिलहाल बातचीत से दूरी बना ली है।

व्हाइट हाउस ने भी पुष्टि की है कि ईरान के साथ होने वाली तकनीकी वार्ता के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की प्रस्तावित यात्रा टाल दी गई है। प्रशासन का कहना है कि बातचीत की तैयारियां जारी हैं और दोनों पक्ष हाल में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन को लागू करने के अगले चरण पर काम कर रहे हैं।

हालांकि वार्ता टल गई है, लेकिन कूटनीतिक प्रयास पूरी तरह रुके नहीं हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ स्विट्जरलैंड रवाना हो रहे हैं, जहां ईरान के साथ संभावित परमाणु समझौते पर बातचीत का पहला दौर शुरू करने की कोशिश की जाएगी। ट्रंप के दामाद और पूर्व वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर पहले से ही स्विट्जरलैंड में मौजूद बताए जा रहे हैं।

ईरान ने क्या कहा?

ईरान ने भी बातचीत जारी रखने के संकेत दिए हैं। ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खातिबजादेह ने कहा कि तेहरान अमेरिका के साथ वार्ता जारी रखना चाहता है, लेकिन इसके लिए वाशिंगटन को समझौते की शर्तों का सम्मान करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि इजराइल भी उन शर्तों का पालन करे। वहीं ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख ने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन एमओयू की पहली ही शर्त के पालन में विफल रहा है।

ट्रंप ने शुक्रवार को एनबीसी न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में दावा किया कि उन्होंने इजराइली नेतृत्व से बातचीत की है और उन्हें हिज़्बुल्लाह के साथ युद्धविराम पर सहमत होने के लिए प्रेरित किया है। ट्रंप ने यहां तक कहा कि इजरायल उनकी सलाह और निर्देशों को महत्व देता है क्योंकि दोनों पक्षों के बीच गहरा पारस्परिक सम्मान है।

अमेरिकी विदेश विभाग ने भी घोषणा की है कि अगले सप्ताह वॉशिंगटन डीसी में इजराइल और लेबनान के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता का नया दौर आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य सीमा पर बढ़ते तनाव को कम करना और संघर्षविराम की संभावनाओं को मजबूत करना है।

उधर, स्विट्जरलैंड के संघीय विदेश विभाग ने पुष्टि की है कि अमेरिका, ईरान, कतर और पाकिस्तान के बीच प्रस्तावित बहुपक्षीय वार्ता फिलहाल स्थगित कर दी गई है। विभाग ने कहा कि बर्गेनस्टॉक में तैयारियां जारी हैं और स्विट्जरलैंड भविष्य में होने वाली किसी भी वार्ता में सहयोग के लिए तैयार है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली ये बातचीत केवल राजनीतिक रूपरेखा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य परमाणु समझौते के कार्यान्वयन, सत्यापन और नियमों के पालन से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत सहमति बनाना भी है। यही कारण है कि वार्ता को पश्चिम एशिया की स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

लेबनान में बढ़ती हिंसा और इजराइल-हिजबुल्लाह संघर्ष के कारण इन वार्ताओं के भविष्य पर फिलहाल सवाल खड़े हो गए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि अगर क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है तो न केवल अमेरिका-ईरान समझौता प्रभावित हो सकता है, बल्कि वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए अहम होर्मुज को फिर से पूरी तरह खोलने की कोशिशों को भी झटका लग सकता है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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