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अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते पर बनी सहमति, खुलेगा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज

अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते पर सहमति बनी है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने की मंजूरी दे दी है।

अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते पर सहमति बनी है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने की मंजूरी दे दी है।

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फोटोः आईएएनएस

तेहरानः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार देर रात (7 अप्रैल) को ईरान पर हमला करने की धमकियों से पीछे हटे। ईरान और अमेरिका के बीच दो हफ्तों के लिए युद्धविराम पर सहमति बनी। समझौते के तहत ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (होर्मुज जलडमरूमध्य) को खोलने पर भी मंजूरी दी है।

ट्रंप ने इस समझौते के बाद कहा कि उन्होंने ईरानी पुलों, बिजली संयंत्रों और अन्य नागरिक ठिकानों पर अपने संभावित हमलों को फिलहाल रोक दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान ने एक “व्यवहार्य” 10 सूत्री शांति योजना प्रस्तावित की है जो फरवरी में अमेरिका और इजराइल द्वारा शुरू किए गए युद्ध को समाप्त करने में सहायक हो सकती है।

डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?

डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान में कहा कि यह फैसला “पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ बातचीत के आधार पर” लिया गया है, जिन्होंने तनाव बढ़ने पर संयम बरतने का आग्रह किया था।

उन्होंने कहा, “इस शर्त पर कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह तुरंत और सुरक्षित रूप से खोलने पर सहमत हो जाए, मैं दो हफ्ते की अवधि के लिए ईरान पर बमबारी और हमले रोकने पर सहमत हूं।” उन्होंने इस कदम को “दो-तरफा संघर्ष-विराम” का हिस्सा बताया।

यह घोषणा खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच एक अहम विराम का संकेत है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका अपने सैन्य उद्देश्यों को पहले ही हासिल कर चुका है। उन्होंने कहा, “हम अपने सभी सैन्य लक्ष्यों को पूरा कर चुके हैं और ईरान के साथ दीर्घकालिक शांति समझौते की दिशा में काफी आगे बढ़ चुके हैं। इससे मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी।”

ईरान ने क्या प्रतिक्रिया दी?

ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय परिषद ने कहा कि उसने युद्धविराम स्वीकार कर लिया है और वह शुक्रवार से इस्लामाबाद में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ वार्ता करेगी। हालांकि ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका दोनों ने ही यह नहीं बताया कि युद्धविराम कब शुरू होगा।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि जलडमरूमध्य से आवागमन ईरानी सैन्य प्रबंधन के तहत ही होगा। हालांकि, यह तुरंत स्पष्ट नहीं हुआ कि इसका मतलब यह है कि ईरान जलमार्ग पर अपनी पकड़ ढीली करेगा या नहीं।

इस दौरान कूटनीतिक प्रयासों में तेजी के बावजूद जमीनी स्तर पर अनिश्चितता बनी रही। ईरान ने युद्धविराम समझौते को स्वीकार कर लिया लेकिन खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल हमलों की खबरें आती रहीं। इजराइल ने भी दो सप्ताह तक युद्धविराम का समर्थन किया लेकिन स्पष्ट किया कि यह लेबनान पर लागू नहीं होता। यहां वह लगातार बमबारी कर रहा है।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने क्षेत्रीय अधिकारी के हवाले से लिखा कि इस योजना में ईरान और ओमान दोनों को फारस की खाड़ी के संकरे मुहाने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की अनुमति देना शामिल है। अधिकारी ने कहा कि ईरान इस राशि का उपयोग पुनर्निर्माण के लिए करेगा।

जलडमरूमध्य पर नियंत्रण के अलावा युद्ध समाप्त करने के लिए ईरान की मांगों में क्षेत्र से अमेरिकी लड़ाकू बलों की वापसी, प्रतिबंधों को हटाना और उसकी जब्त की गई संपत्तियों को जारी करना शामिल है।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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