लखनऊः उत्तर प्रदेश समेत दक्षिण भारत के कई हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई है। इसके चलते उत्तर प्रदेश में अगले दो दिन गर्मी और उमस बनी रहेगी, जबकि दक्षिण भारत के कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की जा रही है। हालांकि, भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) का अनुमान है कि 17-18 जुलाई के बाद मानसून दोबारा सक्रिय होगा और कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां तेज हो जाएंगी।
राजधानी लखनऊ में बुधवार सुबह से आंशिक बादल छाए रहे, लेकिन बारिश की संभावना कम है। दिनभर धूप और बादलों की आवाजाही बनी रहेगी, जिससे उमस बनी रहेगी। अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। वहीं, नोएडा और गाजियाबाद में भी बादलों की आवाजाही रहेगी, लेकिन व्यापक बारिश की संभावना नहीं है।
मौसम विभाग के अनुसार आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, फर्रुखाबाद, एटा, कासगंज, बदायूं, संभल, अमरोहा, बिजनौर, सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर और लखीमपुर खीरी में एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की बारिश या बौछारें पड़ सकती हैं।
इसके अलावा औरैया, कन्नौज, हरदोई, सीतापुर, बहराइच, श्रावस्ती, प्रयागराज, संत रविदास नगर (भदोही), मिर्जापुर, वाराणसी, सोनभद्र, चंदौली, गाजीपुर और बलिया में कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी की संभावना है।
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कई जिलों के लिए गर्मी और उमस का येलो अलर्ट, 18 जुलाई से बदलेगा मौसम
लखनऊ, बाराबंकी, अयोध्या, रायबरेली, अमेठी, कानपुर, जालौन, झांसी, ललितपुर, महोबा, हमीरपुर, बांदा, फतेहपुर, कौशांबी, चित्रकूट, प्रयागराज, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, अंबेडकर नगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, जौनपुर, आजमगढ़, मऊ, देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, महाराजगंज, संत कबीर नगर और गोंडा समेत कई जिलों में मौसम गर्म और उमस भरा रहने की चेतावनी जारी की गई है।
आईएमडी के अनुसार प्रदेश में अगले दो दिनों तक तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। हालांकि 18 जुलाई से मानसून दोबारा सक्रिय होने लगेगा। पूर्वांचल के अधिकांश जिलों में झमाझम बारिश की शुरुआत होने की संभावना है, जबकि 20 जुलाई से प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। इसके बाद तापमान में 6 से 8 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने का अनुमान है, जिससे लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिलेगी।
दक्षिण भारत में क्यों कमजोर पड़ा मानसून?
क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (आरएमसी), चेन्नई के अनुसार केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी दक्षिण-पश्चिम मानसून फिलहाल कमजोर बना हुआ है। इसकी मुख्य वजह भूमध्य रेखा को पार करने वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाओं का कमजोर होना है, जिससे अरब सागर के ऊपर बनने वाला ‘लो-लेवल जेट’ (सोमाली जेट) भी सामान्य से कमजोर बना हुआ है।
इसके अलावा प्रशांत महासागर में विकसित हो रही अल नीनो जैसी परिस्थितियां भी मानसून को प्रभावित कर रही हैं। नतीजतन अरब सागर से नमी का प्रवाह कम हुआ है, बादलों का निर्माण घटा है और कई इलाकों में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है।
दक्षिण भारत में भी 17 जुलाई के बाद राहत
मौसम विभाग के जीएफएस (12 किमी) मॉडल के अनुसार 17 जुलाई के आसपास लो-लेवल जेट के फिर से मजबूत होने की संभावना है। इसके बाद अरब सागर से नमी का प्रवाह बढ़ेगा और दक्षिण-पश्चिम मानसून दोबारा सक्रिय होने लगेगा।
इसके चलते केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आसपास के राज्यों में बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी। बादल छाने और वर्षा होने से तापमान में गिरावट आएगी तथा लू जैसी परिस्थितियों से भी राहत मिलने की संभावना है।
समाचार एजेंसी आईएएनएस इनपुट के साथ



