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सीजफायर के बीच ट्रंप का सख्त रुख- यूरेनियम संवर्धन पर पूरी रोक, टैरिफ-प्रतिबंधों में राहत पर होगी बातचीत

अमेरिका-ईरान के बीच आखिरी वक्त पर हुआ यह सीजफायर फिलहाल बड़े सैन्य टकराव को टालने में भले ही कामयाब रहा है, लेकिन इसकी शर्तें अभी पूरी तरह साफ नहीं हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसे नाजुक युद्धविराम ही बताया है।

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फोटोः आईएएनएस

वॉशिंगटन/तेहरानः अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक तरफ परमाणु कार्यक्रम पर कड़ा रुख दिखाया है, तो दूसरी तरफ आर्थिक मोर्चे पर बातचीत के संकेत भी दिए हैं। ट्रंप ने कहा कि वॉशिंगटन ईरान में यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) पूरी तरह बंद करवाने की दिशा में काम करेगा और साथ ही टैरिफ व प्रतिबंधों में राहत पर बातचीत शुरू की जाएगी।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कहा कि अमेरिका, ईरान के साथ मिलकर उन परमाणु अवशेषों को भी बाहर निकालेगा, जो पिछले साल जून में अमेरिका-इजराइल हमलों के बाद जमीन के भीतर दबे हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि इन साइट्स पर सैटेलाइट से कड़ी निगरानी रखी जा रही है और हमलों के बाद से वहां कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है।

राष्ट्रपति ने दोहराया कि यूरेनियम का कोई संवर्धन नहीं होगा और यह भी कहा कि प्रस्तावित समझौते के 15 बिंदुओं में से कई पर पहले ही सहमति बन चुकी है, हालांकि उन्होंने इन बिंदुओं का खुलासा नहीं किया है।

ईरान की मदद करने वाले देशों पर ट्रंप का 50% जुर्माने का हंटर

एक तरफ ट्रंप ने जहां अगले चरण की बातचीत में टैरिफ और प्रतिबंधों में ढील को अहम मुद्दा बताया तो दूसरी तरफ उन्होंने यह चेतावनी देकर सबकी चिंताएं बढ़ा दी कि जो भी देश ईरान को सैन्य हथियार सप्लाई करेगा, अमेरिका को बेचे जाने वाले उसके सभी सामानों पर तत्काल प्रभाव से 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया जाएगा। इसमें कोई छूट या रियायत नहीं मिलेगी।

अमेरिका-ईरान के बीच आखिरी वक्त पर हुआ यह सीजफायर फिलहाल बड़े सैन्य टकराव को टालने में भले ही कामयाब रहा है, लेकिन इसकी शर्तें अभी पूरी तरह साफ नहीं हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसे नाजुक युद्धविराम ही बताया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता फिलहाल केवल शुरुआती चरण में है और इसकी स्थिरता अनिश्चित बनी हुई है।बकौल वेंस यह संघर्ष विराम सिर्फ 8 से 12 घंटे पुराना है, इसलिए इसे नाजुक ही कहा जाएगा।

सीजफायर के ऐलान के कुछ घंटों के भीतर ही खाड़ी देशों- यूएई और कुवैत में मिसाइल अलर्ट की खबरें सामने आईं, जबकि ईरान ने एक तेल रिफाइनरी पर हमले का दावा किया। इससे समझौते के असर और स्थिरता को लेकर सवाल बने हुए हैं।

होर्मुज स्ट्रेट अहम मुद्दा

युद्धविराम की सबसे महत्वपूर्ण शर्तों में से एक ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को पूरी तरह और सुरक्षित रूप से खोलना है। यहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का कारोबार गुजरता है। ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से ओमान के साथ मिलकर शुल्क वसूलने की व्यवस्था लागू कर सकता है।

ट्रंप ने कहा है कि इस समुद्री मार्ग से होने वाले व्यापार और ट्रांजिट से बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अब इस मार्ग का प्रबंधन ईरानी सैन्य की निगरानी में होगा। हालांकि, यह प्रस्ताव खाड़ी देशों के बीच विवाद का विषय बन सकता है जो इस मार्ग पर अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्र आवाजाही के पक्षधर हैं।

हालांकि ट्रंप ‘नो एनरिचमेंट’ की बात कर रहे हैं, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम का भविष्य अभी भी स्पष्ट नहीं है। तेहरान पहले 60 प्रतिशत तक यूरेनियम संवर्धन कर चुका है, जो हथियार-स्तर के करीब माना जाता है। सीजफायर प्रस्ताव के अलग-अलग संस्करण सामने आने से भी भ्रम की स्थिति बनी है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि ईरान सीमित संवर्धन जारी रख सकता है, जिसे ट्रंप ने खारिज करते हुए “फर्जी” बताया।

ईरान की ओर से अमेरिकी सैनिकों की वापसी, प्रतिबंधों में राहत और जमे हुए फंड तक पहुंच जैसी मांगें सामने आई हैं, जिन्हें वॉशिंगटन के लिए स्वीकार करना आसान नहीं माना जा रहा। दूसरी ओर, तेहरान में सीजफायर के बाद भी सरकार समर्थक प्रदर्शनों में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ नारे लगे, जो घरेलू स्तर पर समझौते के विरोध को दिखाते हैं।

पाकिस्तान ने दावा किया है कि उसने इस समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभाई है और स्थायी समाधान के लिए बातचीत जल्द शुरू हो सकती है, जिसकी मेजबानी इस्लामाबाद कर सकता है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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