राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार नीति को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी फेडरल ट्रेड कोर्ट ने गुरुवार को उनके द्वारा लगाए गए 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ की घोषणा को रद्द कर दिया। कोर्ट ने इस कदम को ‘गैरकानूनी’ और ‘अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन’ करार दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि राष्ट्रपति ने कांग्रेस द्वारा दिए गए सीमित अधिकारों से आगे बढ़कर फैसला लिया और यह टैरिफ संघीय कानून के तहत अधिकृत नहीं थे।
न्यूयॉर्क स्थित अदालत की तीन जजों की बेंच ने 2-1 के बहुमत से दिए अपने फैसले में कहा कि ट्रंप प्रशासन ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 का गलत इस्तेमाल किया। अदालत ने कहा कि यह प्रावधान केवल विशेष ‘भुगतान-संतुलन संकट’ जैसी असाधारण परिस्थितियों के लिए बनाया गया था, न कि सामान्य व्यापार घाटे या चालू खाते के घाटे के आधार पर व्यापक वैश्विक टैरिफ लगाने के लिए।
ट्रंप के टैरिफ पर अदालत ने और क्या कहा?
जज मार्क ए. बार्नेट और क्लेयर आर. केली ने अपने फैसले में कहा कि ट्रंप प्रशासन यह साबित करने में विफल रहा कि टैरिफ लगाने के लिए कानून की आवश्यक शर्तें पूरी हुई थीं। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि इस कानून का उद्देश्य 1970 के दशक के विशेष ‘भुगतान-संतुलन’ संकटों से निपटना था, न कि इसे आधुनिक समय के व्यापार और चालू खाते के घाटे को आधार बनाकर व्यापक टैरिफ लगाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
जजों ने चेतावनी दी कि अगर राष्ट्रपति को इस तरह असीमित अधिकार दिए गए तो यह संवैधानिक संतुलन के खिलाफ होगा, क्योंकि टैरिफ लगाने की मूल शक्ति संसद (कांग्रेस) के पास है। हालांकि पीठ के तीसरे सदस्य जज टिमोथी स्टैंसियू ने असहमति जताते हुए कहा कि आर्थिक नीतियों के मामलों में अदालत को राष्ट्रपति के निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट पहले भी दे चुका है झटका
गौरतलब है कि इसी साल फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन की पिछली व्यापक टैरिफ व्यवस्था (हर देश से आयात पर शुल्क) को भी रद्द कर दिया था। उस समय ट्रंप प्रशासन ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का हवाला देते हुए लगभग सभी देशों से आयात पर टैरिफ लगाए थे। सुप्रीम कोर्ट ने तब कहा था कि यह कानून राष्ट्रपति को इतने व्यापक स्तर पर टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता।
इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत नया 10 प्रतिशत अस्थायी वैश्विक टैरिफ लगाया था, जो 150 दिनों तक 15 प्रतिशत तक का आयात अधिभार लगाने की अनुमति देता है। यही टैरिफ अब फेडरल ट्रेड कोर्ट ने खारिज कर दिया है।
भारत भी हुआ था प्रभावित
ट्रंप की पिछली टैरिफ नीति का असर भारत पर भी पड़ा था। अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया था, साथ ही रूस से कच्चा तेल आयात जारी रखने को लेकर अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ भी लगाया गया था। हालांकि बाद में अंतरिम भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत प्रभावी शुल्क दर घटाकर 18 प्रतिशत कर दी गई थी।
अब इस ताजा कानूनी झटके के बाद ट्रंप प्रशासन द्वारा फेडरल सर्किट अपीलीय कोर्ट में अपील करने की संभावना है, जिससे यह कानूनी लड़ाई एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुंच सकती है।

