सीबीआई को बैंकिंग धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में अहम सफलता मिली है। एजेंसी ने भगोड़े आरोपी कमलेश पारेख को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से भारत वापस लाकर गिरफ्तार कर लिया है। 1 मई को उसे भारत लाया गया और दिल्ली पहुंचते ही सीबीआई ने हिरासत में ले लिया। इस पूरी कार्रवाई को विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के साथ समन्वय में अंजाम दिया गया।
कमलेश पारेख के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी था, जिसके आधार पर उसे यूएई में चिन्हित कर पकड़ा गया। भारत के अनुरोध पर वहां की एजेंसियों ने उसे हिरासत में लिया और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया।
कमलेश पारेख पर बैंकिंग और वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप
सीबीआई की जांच के मुताबिक, पारेख पर बड़े पैमाने पर बैंकिंग और वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप है। इस मामले में देश के कई बैंकों के एक कंसोर्टियम को सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जिसकी अगुवाई स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) कर रहा था। आरोप है कि पारेख ने अन्य प्रमोटरों और निदेशकों के साथ मिलकर बैंक फंड को विदेशों में फैली कंपनियों के जरिए डायवर्ट किया।
जांच में यह भी सामने आया कि उसने यूएई समेत कई देशों में अपनी कारोबारी गतिविधियों और निर्यात से जुड़े लेन-देन के जरिए फर्जी तरीके अपनाए। इसमें वित्तीय लेन-देन में हेरफेर और बैंकिंग चैनलों का दुरुपयोग शामिल था।
सीबीआई, जो इंटरपोल के लिए भारत में नेशनल सेंट्रल ब्यूरो के रूप में काम करती है, ‘भारतपोल’ प्लेटफॉर्म के जरिए विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ तालमेल बनाती है। इसी सहयोग के चलते पिछले कुछ वर्षों में इंटरपोल चैनलों के माध्यम से 150 से अधिक वांछित अपराधियों को भारत लाया जा चुका है।
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