Home विचार-विमर्श राज की बात: जब डीजीपी का फोन आता, डिप्टी आईजी भी टोपी...

राज की बात: जब डीजीपी का फोन आता, डिप्टी आईजी भी टोपी पहन कर सलामी ठोकते थे

एमएम सिंह की पत्नी अहमदाबाद में एक कॉलेज में लेक्चरर थी। उन्होंने पत्नी को कभी भी सरकारी गाड़ी का उपयोग नहीं करने दिया और वे अहमदाबाद म्युनिसिपल ट्रांसपोर्ट सर्विस की बस पर ही चलती रही।

Police Representative Image
प्रतीकात्मक तस्वीर

आज से करीब चालीस साल पहले गुजरात पुलिस के मुखिया (डीजीपी) एमएम सिंह होते थे, उनके ‘आतंक या सम्मान’ का यह आलम था कि यदि वे गांधीनगर या अहमदाबाद से किसी रेंज के उप महानिरीक्षक को भी फोन करते, अधिकारी पहले टोपी सर पर पहनते, फिर फोन पर ही सैल्यूट मारते। इसके बाद अपनी बात करते। यह कहानी मुझे सौराष्ट्र-कच्छ के तत्कालीन डीआईजी रवींद्र नारायण भट्टाचार्य ने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर बताई थी।

सिंह बहुत ही ईमानदार और कड़क छवि वाले पुलिस प्रमुख थे। उनके ही कार्यकाल में राजकोट और जूनागढ़ में कई अप्रिय घटनाएं भी हुई थी। छोटी अवधि में वांकानेर में विस्फोट में कांग्रेस के उपमंत्री मोहम्मद हुसैन बलोच मारे गए, तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री वल्लभभाई पटेल को उन्हीं के क्षेत्र – पढ़धरी में चाकुओं से गोंद डाला गया। जेतपुर में झंडोतोलन के दौरान विधायक पोपट भाई सोरठिया को गोली मारी गई थी।

राज्य के पुलिस महानिदेशक होकर भी वे तत्काल घटनास्थल पर पहुंच कर जांच का नेतृत्व करते थे। एक बार वांकानेर भी आए, पीछे से पत्रकार भी आए। सिंह ने पूछा ‘आपलोग क्यों आए।’ पत्रकारों ने शायद उन्हें खुश करने के लिए कहा, ‘हमलोग तो आपके पीछे है।’ सिंह ने जवाब दिया, ‘I am going to the Hell’ (मै जहन्नूम में जा रहा हूं)।

एक बार वे बिना किसी अधिकारी को खबर किये जूनागढ़ सर्किट हाउस पहुंच गए। वहां भी विस्फोट की घटना हुई थी। वहां विजिटर बुक में अपनी एंट्री कर वे एक स्थानीय गुजराती अखबार देख रहे थे। तभी जूनागढ़ के युवा पुलिस अधीक्षक पधारे।। उनसे नमस्कार के बाद डीजीपी ने एसपी को कहा, ‘बिलकुल दिलीप कुमार लग रहे हो, सायरा बानो का भी फोटो रख लेते।’ उन्होंने युवा अधिकारी को कहा, ‘कुछ काम भी कर लिया करो, सिर्फ अखबार में फोटो नहीं।’

मोरबी में एक अतिथिशाला में वांकानेर विस्फोट की गहन जांच के लिए उन्होंने तीन डिप्टी IG, चार एसपी को रखा था। कई दिनों के बाद एक रात अपने-अपने घर निकल गए। केवल एक ग्रामीण पुलिस अधीक्षक वहां रुके। तभी एमएम सिंह बिना किसी को खबर किये अहमदाबाद से मोरबी पहुंच गए और जब देखा कि सभी उच्च अधिकारी बिना सूचना के निकल गए हैं तो झल्ला कर उन्होंने ग्रामिण एसपी को भी घर जाने को कहा।

एक बार उन्होंने सौराष्ट्र के मुख्यालय राजकोट में रेंज के सभी पुलिस अधीक्षक की बैठक बुलाई। उसमें एक युवा अधिकारी पर नजर गई। उसके पेट पर हाथ रख उन्होंने कमेंट किया, ‘कुछ कम खाया करो।’

एमएम सिंह की पत्नी अहमदाबाद में एक कॉलेज में लेक्चरर थी। उन्होंने पत्नी को कभी भी सरकारी गाड़ी का उपयोग नहीं करने दिया और वे अहमदाबाद म्युनिसिपल ट्रांसपोर्ट सर्विस की बस पर ही चलती रही।

एक बार वे एक थाने के निरीक्षण में पहुंचे। वहां के इंस्पेक्टर ने चाय मंगवाई। जब वे निरीक्षण कर गाड़ी पर सवार होने लगे, इंस्पेक्टर को चार आने दिए, चाय का दाम। इंस्पेक्टर का इगो हर्ट हुआ। उसने कहा, ‘सर हमारे पास भी चार आने है, इतना भी नीचा नहीं दिखाया जाए।’ उनकी अखबार वालों से भी नहीं बनी। एक बार पुलिस के बारे में कोई आलोचनात्मक खबर छपी तब उन्होंने संपादक को शिकायत की। उन्होंने संपादक से कहा, ‘if there is no God,it has to be invented and this is what your reporter has done’ (‘अगर भगवान नहीं भी है, तो उसे गढ़ना पड़ता है, और आपके रिपोर्टर ने यही काम किया है।’

यह भी पढ़ें- राज की बातः फेक एनकाउंटर- जब सेना की प्रेस रिलीज ही उनके अफसरों के खिलाफ सबूत बन गई

author avatar
लव कुमार मिश्र
लव कुमार मिश्र, 1973 से पत्रकारिता कर रहे हैं,टाइम्स ऑफ इंडिया के विशेष संवाददाता के रूप में देश के दस राज्यों में पदस्थापित रह। ,कारगिल युद्ध के दौरान डेढ़ महीने कारगिल और द्रास में रहे। आतंकवाद के कठिन काल में कश्मीर में काम किए।

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version