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बंगाल चुनाव से पहले एक ही दिन में 250 से अधिक अधिकारियों के तबादले को लेकर TMC ने हाई कोर्ट का किया रुख

बंगाल चुनाव से पहले एक ही दिन में 250 से अधिक अधिकारियों के तबादले के विरुद्ध टीएमसी ने हाई कोर्ट का रुख किया है।

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फोटोः आईएएनएस

कोलकाताः तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने सोमवार (30 मार्च) को कलकत्ता हाई कोर्ट में भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के खिलाफ याचिका दायर की। क्योंकि आयोग ने राज्य में विधानसभा चुनावों से पहले 170 पुलिस स्टेशनों के प्रभारी अधिकारियों (ओसी) को हटा दिया था। इसमें भबानीपुर भी शामिल है जहां पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उम्मीदवार हैं। इसके साथ ही 83 ब्लॉकों के ब्लॉक विकास अधिकारियों (बीडीओ) और सहायक रिटर्निंग अधिकारियों (एआरओ) को भी हटा दिया था।

यह याचिका मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की अदालत में दायर की गई है और मंगलवार (31 मार्च) को इसकी सुनवाई होने की संभावना है।

TMC प्रमुख ममता बनर्जी ने क्या आरोप लगाया?

ममता बनर्जी का आरोप है कि आयोग द्वारा अधिकारियों के नियमित तबादलों के माध्यम से उनके हाथों से प्रशासनिक शक्ति “छीन ली गई” है जो उनके अनुसार भाजपा के इशारे पर किए गए थे।

चुनाव आयोग ने रविवार (29 मार्च) को आगामी विधानसभा चुनावों से 23 दिन पहले शहर और राज्य भर के जिलों में 174 पुलिस अधिकारियों और 83 बीडीओ सह एआरओ के तबादलों की कार्रवाई की। राज्य की 294 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव 23 और 29 अप्रैल को होंगे।

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खास बात यह है कि कोलकाता के 31 पुलिस थानों के प्रभारी अधिकारियों (ओसी) के तबादलों को रद्द किया गया है। सबसे अधिक 14 बीडीओ और एआरओ का तबादला पूर्वी मिदनापुर जिले में हुआ है जबकि दक्षिण 24 परगना में यह संख्या 11 है।

इससे पहले आयोग ने मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती और गृह सचिव जेपी मीना सहित कई वरिष्ठ नौकरशाहों और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पीयूष पांडे, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एएसजी), कोलकाता के पुलिस आयुक्त और अन्य जैसे आईपीएस अधिकारियों का तबादला किया था।

73 क्षेत्रों में नियुक्त किए गए थे रिटर्निंग ऑफिसर

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने राज्य के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के हवाले से लिखा कि ” चुनाव प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल नौकरशाहों, आईपीएस अधिकारियों और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले कोई नई बात नहीं है और ये पहल हर चुनाव से पहले की जाती हैं ताकि लोग बिना किसी भय या पक्षपात के माहौल में स्वतंत्र रूप से अपने मतदान का अधिकार प्राप्त कर सकें। “

उन्होंने आगे बताया, ” इस बार आयोग ने फैसला किया है कि यदि कोई अधिकारी चुनाव में अपने कर्तव्य का निर्वहन करते समय पक्षपातपूर्ण भूमिका निभाता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़े कदम उठाए जाएंगे। “

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इस सप्ताह की शुरुआत में राष्ट्रीय चुनाव आयोग ने भबानीपुर सहित 73 विधानसभा क्षेत्रों में आरओ (रिटर्निंग ऑफिसर) नियुक्त किए थे। भबानीपुर में आरओ को हटाए जाने पर ममता बनर्जी ने आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे।

आयोग ने नंदीग्राम के बीडीओ सुरजीत रॉय को भबानीपुर में आरओ नियुक्त किया। टीएमसी ने आरोप लगाया कि रॉय के सुवेंदु से संबंध हैं और उसने चुनाव आयोग में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि गुरुवार देर रात किए गए एक अन्य फेरबदल में राज्य के नौ जिलों में 14 अधिकारियों को हटा दिया गया।

इन अधिकारियों की नियुक्ति पिछले सोमवार को ही हुई थी। इसलिए पांच दिनों के भीतर उन्हें हटाना एक महत्वपूर्ण और असामान्य प्रशासनिक कदम है।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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