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भारत में घट गई प्रजनन दर, जनसंख्या वृद्धि पर लगेगी रोक?, सरकारी रिपोर्ट में क्या पता चला?

टीएफआर एक महिला के जीवनकाल में होने वाले संभावित औसत बच्चों की संख्या को दर्शाता है। जनसंख्या को स्थिर बनाए रखने के लिए भारत का टीएफआर आवश्यक दर से निचले स्तर पर आ गया है।

TFR DECLINE IN INDIA WHAT IT IMPACT ON POPULATION GROWTH, प्रजनन दर
फोटोः समाचार एजेंसी आईएएनएस

नई दिल्ली: भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) पहली बार प्रतिस्थापन सीमा से नीचे आ गई है। सरकारी रिपोर्ट में इसका पता चला है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना आयुक्त के कार्यालय द्वारा प्रकाशित नमूना पंजीकरण प्रणाली सांख्यिकी रिपोर्ट 2024 के जरिए यह जानकारी सामने आई। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में टीएफआर 1.9 है जो मौजूदा 2.1 दर से कम है।

टीएफआर एक महिला के जीवनकाल में होने वाले संभावित औसत बच्चों की संख्या को मापता है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, यह जनसंख्या को स्थिर बनाए रखने के लिए टीएफआर आवश्यक दर से निचले स्तर पर आ गया है।

भारत में जनसंख्या वृद्धि पर क्या लगेगी रोक?

भारत की जनसंख्या 1950 में करीब 360 मिलियन (36 करोड़) थी इस दौरान एक महिला के जीवनकाल में औसत छह बच्चे होते थे। मौजूदा समय में भारत की जनसंख्या 145 करोड़ है। गौरतलब है कि भारत की जनसंख्या दुनिया में सर्वाधिक है। 2023 में भारत ने चीन को जनसंख्या के मामले में पीछे छोड़ दिया था।

भारत की कुल प्रजनन दर में हालांकि गिरावट हुई है। ज्ञात हो कि भारत में जनसंख्या को स्थिर बनाए रखने के लिए प्रतिस्थापन मानक 2.1 है। यह दर अब इससे कम हो गई है। प्रतिस्थापन स्तर उस औसत संख्या को दर्शाता है जितने बच्चे एक महिला द्वारा जीवनकाल में जन्म देने चाहिए जिससे जनसंख्या स्थिर बनी रहे।

प्रजनन दर जब इस मानक से कम होती है तो जनसंख्या वृद्धि में गिरावट आती है।

जनसंख्या में आने वाले कुछ वर्षों तक वृद्धि जारी रहने की संभावना है। हालांकि जब तक प्रजनन दर फिर से 2.15 से ऊपर नहीं पहुंचती, भविष्य में जनसंख्या में गिरावट से इंकार नहीं किया जा सकता है। द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रजनन दर में गिरावट जारी रहने की अधिक संभावना है जिससे यह गिरावट और भी तेज हो सकती है।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि वाशिंगटन विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (IHME) के शोधकर्ताओं का अनुमान है कि भारत की जनसंख्या 21 वर्षों में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद तेजी से घटने लगेगी। इस सदी के अंत तक देश की जनसंख्या एक अरब से थोड़ी अधिक रहने का अनुमान है। यह लगभग आधा अरब लोगों की गिरावट को दर्शाता है।

बिहार की प्रजनन दर अधिक जबकि दिल्ली की काफी कम

राष्ट्रीय स्तर पर भले ही जनसंख्या वृद्धि में कमी को दर्शाती है लेकिन देशभर के विभिन्न क्षेत्रों में इसको लेकर बड़ा अंतर है।

बिहार की प्रजनन दर पूरे देश में सर्वाधिक 2.9 है। वहीं उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है। जनसंख्या के लिहाज से सबसे बड़े प्रदेश की प्रजनन दर 2.6 है। इसी तरह मध्य प्रदेश में यह दर 2.4 और राजस्थान में 2.3 है। ये कुछ ऐसे राज्य हैं जहां प्रजनन दर प्रतिस्थापन दर से अधिक है।

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दूसरी ओर दिल्ली में देश की सबसे कम प्रजनन दर 1.2 दर्ज की गई। यह फिनलैंड की प्रजनन दर 1.3 से भी कम है। फिनलैंड की प्रसारण कंपनी Yle ने सांख्यिकी फिनलैंड के हवाले से एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, कई दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों में प्रजनन दर काफी कम रही। तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल में प्रजनन दर 1.3 दर्ज की गई। आंध्र प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, महाराष्ट्र और पंजाब में यह दर 1.4 रही जबकि हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में यह 1.5 रही।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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