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बंगाल SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, ट्रिब्यूनल में जिनकी अपील मंजूर…दे सकेंगे वोट

पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने वोटरों को राहत दी है। इससे पहले अदालत ने चुनाव आयोग द्वारा अधिकारियों के ट्रांसफर को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी थी।

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (16 अप्रैल) को बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि जिन व्यक्तियों की अपीलें अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunal) द्वारा स्वीकार कर ली गई हैं, वे आगामी विधानसभा चुनाव में वोट करने के पात्र होंगे।

इस मामले में सुनवाई के तीन दिन बाद अपलोड किए गए एक आदेश में अदालत ने अनुच्छेद-142 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह सुनिश्चित किया कि योग्य मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया से बाहर न रखा जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल SIR पर क्या कहा?

अदालत ने टिप्पणी की कि लागू बहुस्तरीय सुरक्षा उपायों को ध्यान में रखते हुए अपीलीय न्यायाधिकरण द्वारा जारी समावेशन या अपवर्जन के संबंध में किसी भी अंतिम निर्देश को मतदान से पहले लागू किया जाना चाहिए।

इसी हफ्ते की शुरुआत में एक संबंधित घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने उन मतदाताओं को मतदान करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था जिनकी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के विरुद्ध याचिकाएं अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित हैं। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की पीठ ने 13 व्यक्तियों द्वारा दायर याचिका को “अपरिपक्व” बताते हुए खारिज कर दिया और कहा कि ट्रिब्यूनलों को पहले इस मामले पर निर्णय लेना होगा।

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अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने पहले ही ट्रिब्यूनलों से संपर्क किया था इसलिए उनकी आशंकाएं समय से पहले थीं और यह भी कहा कि यदि उनकी अपीलें अंततः स्वीकार कर ली जाती हैं तो “आवश्यक परिणाम भुगतने होंगे”। याचिका में आरोप लगाया गया था कि चुनाव आयोग उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना नामों को हटा रहा है और अपीलों की सुनवाई समय पर नहीं हो रही है।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने 19 ट्रिब्युनल्स का किया था गठन

गौरतलब है कि कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और जजों के नेतृत्व में 19 न्यायाधिकरणों (ट्रिब्युनल्स) का गठन किया था। इनका गठन राज्य में वोटर लिस्ट से नाम काटे जाने के खिलाफ अपीलों पर निर्णय करना था।

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि एक अपील की अनुमति दी जाती है और और शामिल करने का अंतिम निर्देश जारी किया जाता है तो ऐसे मतदाताओं को 23 अप्रैल या 29 अप्रैल को होने वाले चुनावों में भाग लेने की अनुमति दी जानी चाहिए।

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इस फैसले का प्रभावी अर्थ यह है कि जिन व्यक्तियों की अपीलें न्यायाधिकरणों द्वारा स्वीकार की जाती हैं वे विधानसभा चुनावों में अपना वोट डाल सकेंगे।

चुनाव आयोग द्वारा अधिकारियों के तबादले से संबंधित याचिका खारिज

इससे पहले दिन में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) द्वारा राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को हटाने क आदेश को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी। सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने कहा कि ऐसी कार्रवाई नियमित है और कोई अभूतपूर्व नहीं है।

अदालत ने हालांकि यह माना कि चुनाव आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल सरकार से परामर्श न करने को लेकर याचिकाकर्ता की चिंता जायज थी।

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अमरेन्द्र यादव
अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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