नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट से आसाराम को बड़ा झटका लगा है। अदालत ने गुरुवार (6 अगस्त) को आसाराम को फिलहाल अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया। गौरतलब है कि आसाराम 2013 में नाबालिग के साथ रेप के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। अदालत ने हालांकि उन्हें चौबीसों घंटे मेडिकल मदद के लिए अपनी पसंद का एक ट्रेंड केयरटेकर नियुक्त करने की इजाजत दे दी।
जस्टिस एम एम सुंदरेश और पी बी वराले की बेंच ने मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत की आसाराम की अर्जी को अभी पेंडिंग रखा है। अदालत ने उन्हें यह छूट दी है कि अगर उनकी सेहत बिगड़ती है तो वे तत्काल सुनवाई की मांग कर सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को नहीं दी अंतरिम जमानत
राजस्थान सरकार की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि आसाराम ने हाईकोर्ट से 20 दिन की पैरोल मांगी है लेकिन सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम जमानत की बात छिपाई। फिलहाल आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से 20 दिन की पैरोल मिली हुई है।
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम की जमानत याचिका पर फैसला लेने से पहले एम्स से विस्तृत मेडिकल रिपोर्ट मांगी थी। एम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आसाराम को अभी अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत नहीं है लेकिन उनकी सेहत पर 24 घंटे नजर रखी जानी चाहिए।
21 जुलाई को हुई सुनवाई में कोर्ट ने राजस्थान सरकार से आसाराम की ताजा मेडिकल रिपोर्ट मांगी थी। कोर्ट ने कहा था कि अगर रिपोर्ट में हालत गंभीर साबित होती है तो सिर्फ इलाज के लिए सीमित समय की अंतरिम जमानत पर विचार किया जा सकता है।
17 जुलाई की सुनवाई में आसाराम की तरफ से खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर कुछ समय के लिए अंतरिम जमानत मांगी गई थी। तब कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह मेडिकल रिपोर्ट की जांच कर बताए कि हालत वाकई गंभीर है या नहीं।
उस समय तुषार मेहता ने कहा था कि आसाराम की सेहत अभी ठीक है। उन्होंने दलील दी कि करीब तीन महीने पहले आसाराम अयोध्या और काशी विश्वनाथ गए थे और वहां पैदल चलकर दर्शन भी किए थे। सरकार ने भरोसा दिया था कि संबंधित अधिकारियों से ताजा रिपोर्ट लेकर कोर्ट में पेश की जाएगी। कोर्ट ने राजस्थान सरकार को 21 जुलाई तक जवाब दाखिल करने को कहा था।
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क्या है पूरा मामला?
इस मामले में आरोप है कि अगस्त 2013 में आसाराम बापू के एक नाबालिग भक्त को जोधपुर के मनाई स्थित उनके आश्रम में बनी ‘कुटिया’ (फूस का घर) में गलत तरीके से बंधक बनाकर रखा गया था और उसके साथ यौन उत्पीड़न व आपराधिक धमकी की घटना को अंजाम दिया गया था।
ट्रायल कोर्ट ने आसाराम बापू और दो सह-आरोपियों हॉस्टल वार्डन संचिता शिल्पी और स्कूल डायरेक्टर शरद चंद्र को दोषी ठहराया। इसके बाद आासाराम ने राजस्थान हाई कोर्ट में अपील दायर की।

बताते चलें कि इसी साल मई में हाई कोर्ट ने आसाराम बापू को रेप और उससे जुड़े अपराधों के लिए दोषी ठहराए जाने के फैसले को बरकरार रखा। ये अपराध भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 370(4), 342, 509, 506, 354A और 376(2)(f); जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और सुरक्षा) एक्ट, 2000 की धारा 23; और बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO एक्ट) की धाराओं 3, 4, 7 और 8 के तहत आते हैं।
इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अपनी अपील लंबित रहने के दौरान आसाराम ने मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत की मांग की। उनकी याचिका में कहा गया कि उन्हें “गंभीर आंतरिक रक्तस्राव” (acute internal bleeding) की समस्या हो गई है। अदालत ने फिलहाल उन्हें अंतरिम जमानत देने से इंकार कर दिया है।
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