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सऊदी अरबः कफाला लेबर सिस्टम खत्म, एक करोड़ से अधिक विदेशी कामगारों को मिलेगा लाभ

सऊदी अरब ने कफाला लेबर सिस्टम खत्म कर दिया है। इससे दुनियाभर के एक करोड़ से अधिक विदेशी कामगारों को लाभ मिलने की संभावना है।

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सऊदी अरब ने कफाला लेबर प्रणाली खत्म की, फोटोः आईएएनएस

रियादः सऊदी अरब ने कफाला लेबर सिस्टम को खत्म करने की घोषणा की है। यह विवादास्पद प्रणाली 50 साल पुरानी है। इसे आधुनिक दासता के रूप में बदनाम किया जाता था। इस नियम के तहत कफील को कर्मचारियों पर अमानवीय नियंत्रण की अनुमति मिल गई थी। इससे यात्रा दस्तावेजों को जब्त करते थे। इसके साथ ही कफीलों के पास यह भी तय करना था कि वे कब नौकरी बदल सकते हैं या फिर देश छोड़ सकते हैं। इस प्रणाली के खत्म करने से दुनियाभर के करीब 1 करोड़ से अधिक कामगारों को लाभ मिलेगा।

सऊदी अरब में कफील उन्हें कहा जाता है जो कामगारों को नौकरी देते हैं। सऊदी अरब में इस नियम के तहत मानव तस्करी का मामला भी सामने आया था। इसके अलावा फिरौती के लिए बंधक भी बनाया जाता था। ऐसा ही एक मामला कर्नाटक की 46 वर्षीय जैसिंथा मेंडोका का है। उन्हें कतर में अच्छी नौकरी का झांसा देकर सऊदी अरब ले जाया गया था। यह मामला साल 2016 का है।

कूटनीतिक स्तर तक गई थी बात

एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, उनके कफील ने 4.3 लाख रुपये की मांग की गई थी। उनकी रिहाई के लिए कूटनीतिक और कानूनी स्तर तक बातचीत की गई थी।

भारतीय युवा इस दौर में खाड़ी देशों की ओर आकर्षित हुआ। भारतीय युवा दीनार या रियाल में कमाई करने के उद्देश्य से आकर्षित हुए। उन्हें जल्दी अमीर बनने का एक अवसर दिखाई दिया।

इस नियम के हटने के बाद हालांकि अब ऐसी घटनाओं की संभावना कम होगी। सऊदी अरब में ऐसी घटनाओं को गैर कानूनी घोषित किया गया है। इजराइल और बहरीन में भी ऐसा ही किया गया है।

मौजूदा समय में यह कुवैत, लेबनान, कतर, उमर जैसे खाड़ी देशों में विभिन्न रूप से मौजूद हैं। एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, इन देशों में लगभग 2.5 करोड़ मजदूर (विदेशी नागरिक) कफील के अधीन रहकर काम कर रहे हैं। इसमें भारतीयों नागरिकों की संख्या लगभग 75 लाख है।

इसी साल जून में सऊदी अरब ने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के विजन 2030 सुधारों के हिस्से के रूप में इस प्रणाली को खत्म करने की घोषणा की थी। सऊदी अरब की यह एक बहु ट्रिलियन डॉलर की योजना है। इसका उद्देश्य देश की छवि को बेहतर करना है। इससे विदेशी निवेश आकर्षित किया जा सके।

सऊदी अरब के इस कदम को 2029 एशियाई खेलों से पहले एक सुधार के रूप में देखा जा रहा है जिससे देश में निवेश बढ़ सके। ऐसे में इस योजना के लागू होने के बाद करीब 25 लाख भारतीयों को लाभ मिलने की संभावना है।

क्या है कफाला प्रणाली?

कफाला प्रणाली 1950 के दशक में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य भारत सहित अन्य दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों से कुशल और अकुशल विदेशी श्रमिकों के प्रवाह को नियंत्रित करना था। सऊदी अरब के लिए यह व्यवस्था काफी महत्वपूर्ण थी। इन मजदूरों से कई को निर्माण या फिर विनिर्माण क्षेत्रों में काम पर लगाया गया था।

इस व्यवस्था से कहीं अर्थव्यवस्था को झटका न लगे, इसके लिए मजदूरों को कफील से बांध दिया जाता था। एक व्यक्ति या कंपनी जो उस मजदूर के प्रायोजक के रूप में काम करती थी। वह उन्हें बांध देती थी। इस नियम के तहत इन प्रायोजकों को विदेशी नागरिकों पर अपवित्र शक्ति दी जाती थी। इसके जरिए वे मजदूरों के जीवन को नियंत्रित करते थे। इससे नियोक्ताओं को यह भी छूट मिल जाती थी कि वे मजदूर कहां काम करेंगे और मजदूरी और यह भी तय करते थे कि वे कहां रहेंगे।

इससे बदतर यह भी बात थी कि श्रमिक व्यवहार करने वाले की अनुमति के बिना दुर्व्यवहार का आरोप नहीं दायर कर सकता था। वहीं, कुशल या सफेदपोश श्रमिकों के लिए यह प्रणाली उतनी बुरी नहीं थी।

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन और अन्य वैश्विक एजेंसियों ने कफाला प्रणाली का पालन करने वाले खाड़ी देशों पर प्रयोजन की आड़ में मानव तस्करी की अनुमति देने का आरोप लगाया।

इसमें महिलाएं विशेष रूप से ज्यादा प्रभावित हुईं। कई अधिकार समूहों ने कफील द्वारा यौन शोषण के मामलों का दस्तावेजीकरण किया है। एमनेस्टी इंटरनेशनल एजेंसियों सहित कई अधिकार समूहों का कहना है कि ऐसे हजारों मामले हैं जिनमें भारत, नेपाल, पाकिस्तान, इथियोपिया, बांग्लादेश, फिलीपींस के नागरिक शामिल हैं।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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