मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और केंद्र सरकार की PIB फैक्ट चेक इकाई ने उन दावों को खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि केंद्रीय बैंक ने लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेच दिया है। यह विवाद दरअसल ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स (Bloomberg Economics) की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ था, जिसमें भारत के विदेशी मुद्रा भंडार के आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर ऐसी संभावना जताई गई थी।
इसमें कहा गया था कि विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए भारत के गोल्ड रिजर्व में कमी की गई होगी। यह आकलन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पूंजी के बाहर जाने को लेकर चिंताओं के बीच भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे असर पर आधारित था।
आरबीआई ने कहा- स्वर्ण भंडार में कोई कमी नहीं
RBI ने बुधवार को जारी स्पष्टीकरण में कहा कि भारत के स्वर्ण भंडार में किसी प्रकार की कमी नहीं आई है और उसकी कुल फिजिकल सोने की होल्डिंग 880.52 टन पर बरकरार है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि उसके सोने के भंडार में कटौती की खबरें तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।
दरअसल, हाल में ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के अर्थशास्त्री अभिषेक गुप्ता ने अनुमान लगाया था कि 22 मई तक के दो सप्ताह के दौरान RBI ने लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेचा होगा और साथ ही करीब 7.5 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा संपत्तियां खरीदी होंगी।
हालांकि RBI और PIB फैक्ट चेक दोनों ने इस निष्कर्ष को सिरे से खारिज कर दिया है। PIB फैक्ट चेक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में किया गया दावा पूरी तरह ‘फर्जी’ है।
‘घट नहीं..बढ़ रही है सोने की हिस्सेदारी’
पीआईबी ने RBI के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी घटने के बजाय लगातार बढ़ी है। PIB के अनुसार, सितंबर 2025 के अंत में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी 13.92 प्रतिशत थी। यह बढ़कर 31 मार्च 2026 तक 16.70 प्रतिशत हो गई और 22 मई 2026 तक 16.85 प्रतिशत पर पहुंच गई।
पीआईबी ने रिजर्व बैंक के मासिक बुलेटिन का भी हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट रूप से दिखाया गया है कि केंद्रीय बैंक के पास मौजूद सोने की मात्रा लगभग स्थिर बनी हुई है। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2026 में उसके पास 880.34 टन सोना था, जो अप्रैल में मामूली बढ़कर 880.52 टन हो गया। इसके बाद भी यह मात्रा बनी हुई है। आरबीआई ने लोगों से साथ ही अपील की है कि वे केवल केंद्रीय बैंक द्वारा जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी मुद्रा भंडार में दर्ज सोने के मूल्य में बदलाव का मतलब यह नहीं होता कि सोना खरीदा या बेचा गया है। केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार का मूल्यांकन अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों और विनिमय दरों के आधार पर करते हैं। ऐसे में सोने की कीमत बढ़ने या घटने से उसके कुल मूल्य में बड़ा परिवर्तन दिखाई दे सकता है, जबकि वास्तविक मात्रा में कोई बदलाव नहीं होता।
रिजर्व बैंक के आंकड़े भी यही संकेत देते हैं। हाल के महीनों में उसके स्वर्ण भंडार की मात्रा लगभग स्थिर रही, लेकिन वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण उसके मूल्य में बदलाव दर्ज किया गया है। मार्च में आरबीआई के स्वर्ण भंडार का मूल्य लगभग 117 अरब डॉलर था, जो बाद में सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी के कारण बढ़कर 122 अरब डॉलर से अधिक हो गया।
वैसे बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में आरबीआई ने अपने विदेशी मुद्रा भंडार में लगातार सोने की खरीद बढ़ाई है। यही कारण है कि आज सोना भारत के लगभग 700 अरब डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार का एक महत्वपूर्ण और तेजी से बढ़ता हुआ हिस्सा बन चुका है।



