नई दिल्ली: राज्य सभा के चुनाव (Rajya Sabha Election) के ऐलान के बाद से इसके लिए सियासी गणित बैठाए जाने लगे हैं। चुनाव आयोग ने पिछले हफ्ते चुनाव के तारीखों की घोषणा की थी। इसके तहत 12 राज्यों में राज्यसभा की 26 सीटों पर 18 जून को चुनाव होंगे। कई बड़े चेहरों का राज्यसभा का कार्यकाल खत्म होने जा रहा है।
इनमें कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, दिग्विजय सिंह और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू जैसे नाम शामिल हैं। ये भी देखना दिलचस्प होगा कि इनमें से किस की वापसी होती है।
राज्यवार सीटों की संख्या देखें तो सबसे अधिक आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक में 4-4 राज्य सभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं। इसके अलावा राजस्थान, मध्य प्रदेश की तीन-तीन सीटों, झारखंड की दो सीटों के लिए भी चुनाव होना है। साथ ही एक-एक सीट पूर्वोत्तर के राज्यों अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय और मिजोरम से हैं। तमिलनाडु और महाराष्ट्र में भी एक-एक सीट के लिए चुनाव हैं।
इन चुनाव को लिए नोटिफिकेशन 1 जून को जारी होगा और नामांकन की आखिरी तारीख 8 जून है। अब हर राज्य की मौजूदा सियासी स्थिति के हिसाब से समझने की कोशिश करते हैं कि किसे कहां लाभ हो सकता है और किसे नुकसान?
कर्नाटक, गुजरात और आंध्र प्रदेश का हाल
कर्नाटक में बीजेपी को झटका मिलने की संभावना है। कांग्रेस को स्पष्ट रूप से फायदा होगा। अभी की जो स्थिति है, उसमें भाजपा के दो, जेडीएस और कांग्रेस के पास एक-एक राज्यसभा सीटें यहां से है। हालांकि, विधान सभा में नंबर गेम बदलने के बाद समीकरण बदले हैं। कर्नाटक से राज्यसभा में अभी जिनका कार्यकाल खत्म होने जा रहा है, उसमें भाजपा से नारायण कोरगप्पा और इरन्ना कडाडी, जबकि जेडीएस से एचडी देवेगौड़ा हैं। कांग्रेस से मल्लिकार्जुन खड़गे हैं।
मौजूदा हालात को देखा जाए तो कांग्रेस दो से अधिकतम तीन सीटें जीत सकती है जबकि भाजपा के खाते में एक या फिर दो सीटें भी जा सकती हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि खड़गे वापसी करेंगे। हालांकि, जेडीएस से देवगौड़ा पर संशय है। अगर भाजपा का साथ मिलता है तो उनकी राह आसान हो सकती है।
ऐसे ही आंध्र प्रदेश की बात करें तो अभी चार सीटों में से तीन सीट वाईएसआर कांग्रेस के पास है। एक सीट पर टीडीपी के पास है। इस बार कहानी बदलेगी। 2024 के विधानसभा चुनाव ने वाईएसआर को बुरी हार के साथ राज्य की सत्ता से बाहर कर दिया था। ऐसे में इस बार दो सीटें टीडीपी के खाते में जा सकती हैं। एक सीट जनसेना और एक सीट भाजपा के खाते में जाने की संभावना है।
बात गुजरात की करें तो यहां भी चार राज्यसभा सीट पर चुनाव हैं। अभी इनमें से तीन सीटें सत्तारूढ़ भाजपा और एक कांग्रेस के पास है। इनमें अभी भाजपा से अमीन नरहरी, रामभाई हरजीभाई मोकारिया और रमिला बेचारभाई हैं। कांग्रेस से शक्ति सिंह गोहिल राज्यसभा सदस्य हैं। इस बार संभावना है कि गुजरात में कांग्रेस का खाता नहीं खुलेगा और भाजपा सभी चारों सीटें झटक सकती है।
राजस्थान, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र का हाल
राजस्थान और मध्य प्रदेश में तीन-तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव है। पार्टी समीकरण के लिहाज से यहां बहुत बदलाव की संभावना नहीं है। मध्य प्रदेश में जिन तीन सीटों के लिए चुनाव है, उसमें दो भाजपा (जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी) के पास है तो एक सीट कांग्रेस (दिग्विजय सिंह) के पास है। ऐसे ही राजस्थान में कांग्रेस से नीरज डांगी राज्यसभा सांसद हैं जिनका कार्यकाल खत्म हो रहा है। जबकि दो भाजपा (राजेंद्र गहलोत और रवनीत सिंह बिट्टू) से हैं। ऐसे में इन दोनों राज्यों में देखने वाली बात ये होगी कि पार्टियां मैदान में फिर से पुराने चेहरे को ही मैदान में उतारती हैं या बदलाव होगा।
दूसरी ओर तमिलनाडु और महाराष्ट्र की बात करें तो कुछ बदलाव नजर आ सकता है। दोनों राज्यों में एक-एक राज्यसभा सीट के लिए चुनाव है। तमिलनाडु में नई पार्टी टीवीके सत्ता में आई है। जाहिर है यहां से टीवीके का कोई सदस्य पहली बार राज्यसभा पहुंच सकता है। वहीं, महाराष्ट्र में एक सीट जो खाली हो रही है, वो अभी एनसीपी के नाम है। माना जा रहा है कि उसकी सीट बच जाएगी। हालांकि, ये भी देखना होगा कि क्या एनडीए के तहत उम्मीदवार बदला जाता है या नहीं।
झारखंड में तेज हो गई है हलचल
झारखंड में दो सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव हैं। 81 सदस्यीय विधानसभा में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) सहित कांग्रेस, सीपीआई (एमएल) गठबंधन का दावा है कि उनके पास कुल बहुमत 56 का है। ऐसे में दोनों सीटें उनके खाते में आनी चाहिए। हालांकि भाजपा ने यहां भी उम्मीदवार उतारने का ऐलान कर दिया है। इसके बाद मुकाबला रोचक होता नजर आ रहा है। भाजपा के उम्मीदवार उतारने के ऐलान के बाद झामुमो ने खरीद-फरोख्त की आशंका जताते हुए चुनाव आयोग को पत्र लिखकर इस बारे में आगाह किया है। वहीं, भाजपा का कहना है कि चुनाव लड़ना सभी का अधिकार है।
पूर्वोत्तर राज्यों में क्या होगा?
पूर्वोत्तर के चार राज्यों की राज्यसभा सीटों पर भी चुनाव हैं। अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर और मेघालय में एक-एक राज्यसभा सीट के लिए ये चुनाव है। माना जा रहा है कि विधायकों की संख्या के आधार पर इन राज्यों में सियासी स्थिति पहले की तरह ही बरकरार रहेगी। मिजोरम (मिजो नेशनल फ्रंट) और मेघालय (नेशनल पीपुल्स पार्टी) में क्षेत्रीय पार्टियों का दबदबा कायम रहने की उम्मीद है। अरुणाचल और मणिपुर में भी भाजपा सीट बचा लेगी।
राज्यसभा में किसे नुकसान, किसे होगा फायदा
कुल मिलाकर देखें तो इस चुनाव में आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका लगेगा। मौजूदा समय में भाजपा के पास 11 सीटें है तो कांग्रेस के पास चार सीटें हैं। गठबंधन के लिहाज से अभी एनडीए के पास 15 और विपक्षी इंडिया ब्लॉक पास पांच सीटें हैं। तीन सीटें जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के पास हैं। चुनाव के बाद 26 सीटों में से एनडीए को 17-18 सीटें मिल सकती हैं। विपक्ष के खाते में 7 से 8 सीटें जाने की संभावना है।
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