लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस के राहुल गांधी ने जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक को पुलिस द्वारा जबरन हटाने और अस्पताल पहुंचाने की आलोचना की है। राहुल गांधी ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे वांगचुक को बलपूर्वक हटाना गलत है और इससे छात्रों से जुड़े गंभीर मुद्दों को दबाया नहीं जा सकता।
दिल्ली पुलिस ने शनिवार सुबह अचानक वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। वांगचुक नीट परीक्षा पेपल लीक मामले को लेकर 21 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर थे।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि मोदी सरकार का मूल सिद्धांत ‘असत्य और हिंसा’ है। राहुल गांधी ने कहा, ‘सोनम वांगचुक जी को जंतर-मंतर से उस समय हटाना, जब वे अहिंसक भूख हड़ताल पर बैठे थे, पूरी तरह गलत है। पेपर लीक, शिक्षा की बढ़ती लागत और छात्रों की आत्महत्या जैसे मुद्दे भारत के भविष्य से जुड़े हैं। इन सवालों को किसी भी तरह की ताकत के जरिए दबाया नहीं जा सकता।’
बता दें कि सोनम वांगचुक को उस समय जंतर-मंतर से हटाया गया, जब दो दिन बाद यानी मानसून सत्र के पहले दिन संसद तक मार्च निकालने की तैयारी थी। सादे कपड़ों में शनिवार सुबह पहुंचे पुलिसकर्मी मंच पर चढ़े और वांगचुक को सफेद चादर से ढका। इसके कुछ ही मिनटों में वे उन्हें वहां से ले गए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने विरोध भी किया, जिससे कुछ देर के लिए प्रदर्शन स्थल पर भी हंगामा हुआ।
दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?
दिल्ली पुलिस का कहना है कि सोनम वांगचुक की लगातार बिगड़ती सेहत को देखते हुए मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करने हुए उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
नई दिल्ली के डीसीपी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वांगचुक को जरूरी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल भेजा गया है। साथ ही प्रदर्शनकारियों से जंतर-मंतर शांतिपूर्वक खाली करने की अपील की गई।
पुलिस ने यह भी दावा किया कि कार्रवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों ने बाधा डालने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने ‘अधिकतम संयम’ बरता।
अस्पताल ने वांगचुक के स्वास्थ्य पर क्या बताया?
सफदरजंग अस्पताल ने बयान जारी कर कहा है कि सोनम वांगचुक लंबे समय से भूखे रहने और डिहाइड्रेशन के कारण कमजोर हो गए हैं। हालांकि उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन उन्हें लगातार निगरानी और इलाज की जरूरत है ताकि शरीर के आवश्यक मानकों को सामान्य किया जा सके।
दूसरी ओर वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनकी सहमति के बिना कोई इलाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में कहीं भी वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराने का निर्देश नहीं दिया गया था।
विपक्षी दलों ने भी साधा निशाना
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की कई विपक्षी नेताओं ने आलोचना की है। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह, तृणमूल कांग्रेस की नेता सागरिका घोष और एनसीपी (शरद पवार) प्रमुख शरद पवार ने केंद्र सरकार पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को दबाने का आरोप लगाया।
बताते चलें कि कांग्रेस पार्टी की ओर से गुरुवार को पार्टी के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने वांगचुक से उनकी बिगड़ती सेहत को देखते हुए अनशन समाप्त करने की अपील की थी। पवन खेड़ा ने भी शुक्रवार को जंतर-मंतर जाकर उनसे मुलाकात की थी। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया था कि पार्टी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग जारी रखेगी।
सोनम वांगचुक 28 जून को कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से जुड़े थे और तभी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे थे।



