नई दिल्लीः कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक्स पर एक वीडियो जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों से माफी मांगने को कहा है। साथ ही उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की भी मांग की।
प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देने को लेकर हिरासत में लिए जाने के दौरान रिकॉर्ड किए गए एक वीडियो में राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर संसद में 20 जुलाई को छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर चर्चा की मांग की थी।
राहुल गांधी के अनुसार, उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से कहा कि छात्रों के साथ जो कुछ हुआ, उस पर सदन में चर्चा जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि अध्यक्ष ने कहा कि उन्हें सरकार से अनुमति लेनी होगी, लेकिन विपक्ष को लगा कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा के नहीं करना चाहती।
राहुल गांधी ने कहा कि इसी वजह से विपक्ष ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने का फैसला किया, ताकि छात्रों के मुद्दे और उनके खिलाफ हुई कथित कार्रवाई को देश के सामने लाया जा सके।
उन्होंने परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और छात्रों पर कार्रवाई के लिए गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने छात्रों के साथ कथित तौर पर मारपीट और दुर्व्यवहार किया, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मामले वापस लिए जाने चाहिए।
राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में बार-बार पेपर लीक क्यों हो रहे हैं, शिक्षा इतनी महंगी क्यों हो गई है और परिवारों को बच्चों की पढ़ाई के लिए आर्थिक रूप से बर्बाद क्यों होना पड़ रहा है। उन्होंने इन सवालों को जायज बताते हुए संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर चर्चा की मांग दोहराई।
प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि 20 जुलाई को जो हुआ और सरकार तथा गृह मंत्री की ओर से जो कार्रवाई की गई, उसके लिए प्रधानमंत्री को देश के छात्रों से माफी मांगनी चाहिए और जल्द से जल्द परीक्षा तथा शिक्षा व्यवस्था में सुधार शुरू करना चाहिए। रिहाई के बाद सामने आए वीडियो में राहुल गांधी एक जूते में नजर आए, जबकि उनका दूसरा पैर नंगे था। इसे पुलिस हिरासत के दौरान हुई कार्रवाई से जोड़कर देखा गया।
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धमेंद्र प्रधान ने कांग्रेस पर लगाया छात्रों के राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप
इस बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राहुल गांधी समेत विपक्ष के नेताओं द्वारा पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन को लेकर नाराजगी जाहिर की। एक्स पर लिखे एक पोस्ट में उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी पर छात्रों को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
धर्मेंद्र प्रधान ने पोस्ट में कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस संसद के मानसून सत्र के दौरान छात्रों के मुद्दों का समाधान तलाशने के बजाय व्यवधान पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने संसद में नीट से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा के लिए अपनी सहमति जताई थी, लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर प्रदर्शन किया।
प्रधान ने कहा, “लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस लगातार छात्रों का बेशर्मी से राजनीतिक इस्तेमाल कर रहे हैं और संसद के मानसून सत्र के दौरान राजनीतिक सुर्खियां बटोरने के लिए व्यवधान पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।”
‘बहस के बजाय राजनीतिक तमाशे को चुना’
केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से नीट और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की तैयारी जताए जाने के बावजूद कांग्रेस ने “लोकतांत्रिक बहस के बजाय राजनीतिक तमाशे” को चुना। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य छात्रों की समस्याओं का समाधान करना नहीं, बल्कि राजनीतिक सुर्खियां हासिल करने के लिए टकराव पैदा करना था।
प्रधान ने कहा कि केंद्र सरकार संसद में नीट से जुड़े मुद्दों पर चर्चा और छात्रों की वास्तविक चिंताओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि देश के छात्रों को राजनीतिक अभियान में “मोहरा” बनाए जाने के बजाय निश्चितता, समाधान और जवाबदेही की जरूरत है। सरकार छात्रों के प्रति जवाबदेह है और परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
उधर हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी सूत्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक आवास के बाहर कांग्रेस के प्रदर्शन की कड़ी आलोचना की। सूत्रों ने इसे सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता बताते हुए कहा कि राजनीतिक नेताओं के आवास के बाहर इस तरह का प्रदर्शन एक “गलत और खतरनाक परंपरा” को जन्म दे सकता है।
सरकारी सूत्रों ने कहा कि राजनीतिक नेताओं के आवास को निशाना बनाकर प्रदर्शन करना “परिपक्व लोकतंत्रों” की परंपरा नहीं है और इससे सुरक्षा व्यवस्था के लिए जोखिम पैदा हो सकता है। उन्होंने पड़ोसी देशों में राजनीतिक अस्थिरता के दौरान नेताओं के आधिकारिक आवासों के बाहर हुए प्रदर्शनों का भी हवाला देते हुए ऐसे प्रदर्शनों को लेकर चिंता जताई।
सरकार की यह प्रतिक्रिया उस घटना के कुछ घंटे बाद आई, जब राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और कई अन्य विपक्षी नेता 20 जुलाई के सीजेपी प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के विरोध में लोक कल्याण मार्ग की ओर मार्च करने पहुंचे थे।
विपक्ष की सरकार को घेरने की कोशिश
प्रदर्शन में कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन भी प्रदर्शन में पहुंचे।
प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ने की कोशिश के बाद दिल्ली पुलिस ने कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। सामने आए वीडियो में सुरक्षाकर्मियों को राहुल गांधी को वहां से ले जाते हुए देखा गया। राहुल गांधी ने हिरासत का विरोध करते हुए धरना जारी रखने की कोशिश की। वहीं, प्रियंका गांधी को पुलिस बस में ले जाते समय उसका दरवाजा पकड़े हुए देखा गया।
कुछ घंटे बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव समेत अन्य नेताओं को रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद प्रियंका गांधी ने कहा कि अगर विपक्ष के नेता संसद में अपनी बात नहीं रख सकते और प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी जाती, तो विपक्ष को उन जगहों पर जाकर अपनी आवाज उठानी पड़ेगी, जहां सरकार को इसकी उम्मीद नहीं होती।
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20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च से शुरू हुआ विवाद
गौरतलब है कि मंगलवार के राजनीतिक टकराव की शुरुआत एक दिन पहले 20 जुलाई को सीजेपी के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई हिंसक झड़प से हुई थी। करीब दो महीने पहले गठित सीजेपी ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन नीट समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर यह मार्च आयोजित किया था।
जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे हजारों प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने मध्य दिल्ली में कई स्तरों पर बैरिकेड लगाकर रोकने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों के बैरिकेड पार करने की कोशिश के दौरान पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में कुछ प्रदर्शनकारियों के सिर से खून बहता हुआ दिखाई दिया।
पुलिस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों की ओर से पथराव किया गया। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर बल प्रयोग का आरोप लगाया। इस दौरान कई पुलिस बसों के शीशे टूट गए और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
अधिकारियों के अनुसार, हिंसा के दौरान 100 से अधिक दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान घायल हुए, जिनमें पांच से अधिक आईपीएस अधिकारी भी शामिल हैं। पुलिस ने 70 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया।
वहीं, एक सरकारी अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, कम से कम 100 प्रदर्शनकारियों का चोटों के लिए इलाज किया गया, जबकि पुलिस ने करीब 60 लोगों के घायल होने की बात कही। पुलिस कार्रवाई में घायल 22 वर्षीय एक युवती की हालत गंभीर बताई गई और वह राम मनोहर लोहिया अस्पताल के आईसीयू में भर्ती रही।
सीजेपी के इस मार्च के बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव ने संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया। मंगलवार को राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के प्रदर्शन तथा सरकार की ओर से आए तीखे बयानों के बाद यह विवाद और गहरा गया है।



