Home विचार-विमर्श खेती बाड़ी-कलम स्याही: क्या पंजाब में ‘उड़ता पंजाब’ ही होगा चुनावी मुद्दा

खेती बाड़ी-कलम स्याही: क्या पंजाब में ‘उड़ता पंजाब’ ही होगा चुनावी मुद्दा

नशे का मुद्दा केवल पंजाब का ही नहीं है, अन्य राज्य भी इसकी चपेट में हैं। हालांकि, 2017 और 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में नशा प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना था।

Punjab Drugs Issue
प्रतीकात्मक तस्वीर- AI

पंजाब पिछले कई दशकों से नशे की समस्या से ग्रस्त है। जैसा कि हम सब जानते हैं कि साल 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में नशा प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना था। पंजाब में ड्रग्स को लेकर बहस इसलिए ज्यादा होती है क्योंकि वहां लंबे समय से ड्रग्स एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा रहा है। सीमा पार से तस्करी, ड्रोन के जरिए हेरोइन सप्लाई और युवाओं में नशे की लत जैसी घटनाओं ने राज्य को लगातार सुर्खियों में रखा। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में देशभर में जब्त हुई हेरोइन का बड़ा हिस्सा पंजाब से बरामद किया गया था। सीमा से लगे इलाकों में ड्रोन के जरिए ड्रग्स गिराने की घटनाओं में भी तेजी आई है।

पंजाब में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होंगे। विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में एक बार फिर ड्रग्स का मुद्दा उठ गया है। जहां एक तरफ पंजाब सरकार ने नशे के खिलाफ अभियान चलाया है। वहीं, विपक्षी पार्टियां सरकार पर नशे के खिलाफ काम ना करने का आरोप लगा रही हैं। विधानसभा चुनाव में यह मुद्दा एक बड़े मुद्दे के रूप में उभरने लगा है।

पंजाब के अलावा दूसरे राज्यों में भी नशे की समस्या

नशे का मुद्दा केवल पंजाब का ही नहीं है, अन्य राज्य भी इसकी चपेट में हैं। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक साल 2022 में देशभर में एनडीपीएस एक्ट के तहत करीब 1.15 लाख मामले दर्ज किए गए थे। इनमें सबसे ज्यादा केस केरल में सामने आए। महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर रहा जबकि पंजाब तीसरे नंबर पर पहुंचा। इसके बाद उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों का नाम भी सूची में शामिल रहा।

आंकड़ों के अनुसार, कुल मामलों में केरल की हिस्सेदारी करीब 23 प्रतिशत, महाराष्ट्र की 12 प्रतिशत और पंजाब की लगभग 11 प्रतिशत रही। यानी सिर्फ इन तीन राज्यों में ही देश के बड़ी संख्या में ड्रग केस दर्ज हुए हैं। आंकड़ों में भले ही पंजाब में नशे की समस्या अन्य राज्यों से कम दिखाई देती हो लेकिन पंजाब में आज के समय में यह एक बड़ा मुद्दा है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ दर्ज मामलों के आधार पर किसी राज्य को पूरी तरह नशे का केंद्र मान लेना सही नहीं होगा। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो खुद अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट करता है कि उसके आंकड़े पुलिस में दर्ज मामलों पर आधारित होते हैं। इसका मतलब यह है कि जहां पुलिस ज्यादा सक्रिय है, वहां केसों की संख्या भी ज्यादा दिखाई दे सकती है। कई राज्यों में बड़े स्तर पर एंटी ड्रग अभियान चलाए जाते हैं, जिसके चलते एफआईआर और गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ जाती है।

पंजाब में चुनाव है!

दरअसल पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं तो राजनीतिक दल अब नशे के मुद्दे पर सबसे अधिक मुखर दिखेगी। जहां एक ओर राज्य में सत्तारुढ़ आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को सक्रियता से उठा रही है वहीं अब भारतीय जनता पार्टी भी इस मुद्दे को केंद्र पर रखकर पॉलिटिकल कैंपेंन शुरु कर सकती है।

पश्चिम बंगाल और असम में मिली राजनीतिक सफलता के बाद अब भाजपा की नजरें पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव पर हैं। माना जा रहा है कि इस राज्य को फतह करने के लिए भाजपा बंगाल की रणनीति अपनाएगी। नशा और राज्य की सुरक्षा को पार्टी आगामी चुनाव का प्रमुख मुद्दा बनाएगी। माना जा रहा है कि भाजपा आगामी जून महीने में ही विधानसभा प्रभारियों की नियुक्ति कर देगी ताकि पंजाब में चुनावी अभियान ग्राउंड स्तर पर दिखने लगे।

पार्टी सूत्रों के अनुसार पश्चिम बंगाल में कमल खिलाने की योजना साकार होने से उत्साहित भाजपा अब पंजाब को भगवामय करने के लिए पूरी ताकत झोंकेगी। इसके लिए पार्टी पश्चिम बंगाल की तर्ज पर ही जून महीने में ही सभी विधानसभा सीटों और तीन क्षेत्रों माझा, दोआबा और मालवा के लिए प्रभारियों की नियुक्ति करेगी। बंगाल की तरह ही गृह मंत्री अमित शाह राज्य की सियासत की नब्ज टटोलकर संगठन को सक्रिय करने की मुहिम में जुट जाएंगे।

गौरतलब है कि बंगाल की तरह ही पंजाब भी सीमावर्ती राज्य है। पार्टी सूत्रों का कहना है बंगाल में बांग्लादेश से घुसपैठ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा था, जबकि पंजाब में पाकिस्तान से हो रही ड्रग्स की आपूर्ति बड़ा खतरा बनती जा रही है।

बंगाल में इस खतरे को मुद्दा बनाने के लिए पार्टी ने परिवर्तन यात्राओं का सहारा लिया था। चूंकि ड्रग्स रैकेट को खत्म करने के वादे के साथ सत्ता में आई आम आदमी पार्टी इस मोर्चे पर बुरी तरह विफल रही है, ऐसे में पार्टी पंजाब को नशामुक्त करने का अभियान छेड़ते हुए पूरे राज्य में नशे के खिलाफ यात्रा निकालेगी।

‘आप’ ने भी शुरू किया ‘चुनावी मंथन’

वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल बुधवार को सीएम भगवत मान के साथ लुधियाना पहुंचे थे। वे शुक्रवार तक पंजाब में रहकर पार्टी की शीर्ष लीडरशिप के साथ विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर मंथन करेंगे। हलवारा हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि पंजाब में आम आदमी पार्टी के पक्ष में माहौल पहले से अधिक मजबूत हुआ है।

केजरीवाल ने दावा किया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी पिछला रिकॉर्ड भी तोड़ेगी। सामान्य तौर पर किसी भी सरकार के चार वर्ष पूरे होने के बाद लोगों में नाराजगी दिखाई देती है, लेकिन पंजाब में स्थिति इसके विपरीत है। उन्होंने कहा कि राज्य में आम आदमी पार्टी सरकार के प्रति लोगों में सकारात्मक माहौल है और जनता सरकार के कामों को लेकर चर्चा कर रही है.

सूत्रों के अनुसार आने वाले कुछ दिनों में पार्टी संगठन, चुनावी रणनीति, उम्मीदवार चयन और सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने को लेकर कई अहम बैठकें हो सकती हैं। पार्टी नेतृत्व आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से सक्रिय दिखाई दे रहा है।

पंजाब की राजनीति में आम आदमी पार्टी की आगामी रणनीति को लेकर यह दौरा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी चुनाव से पहले संगठन को और मजबूत करने तथा सरकार की योजनाओं को चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में जुटी हुई है।

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गिरीन्द्र नाथ झा
गिरीन्द्र नाथ झा ने पत्रकारिता की पढ़ाई वाईएमसीए, दिल्ली से की. उसके पहले वे दिल्ली यूनिवर्सिटी से स्नातक कर चुके थे. आप CSDS के फेलोशिप प्रोग्राम के हिस्सा रह चुके हैं. पत्रकारिता के बाद करीब एक दशक तक विभिन्न टेलीविजन चैनलों और अखबारों में काम किया. पूर्णकालिक लेखन और जड़ों की ओर लौटने की जिद उनको वापस उनके गांव चनका ले आयी. वहां रह कर खेतीबाड़ी के साथ लेखन भी करते हैं. राजकमल प्रकाशन से उनकी लघु प्रेम कथाओं की किताब भी आ चुकी है.

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