लखनऊ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को उत्तर प्रदेश में गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हिस्से मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है। इस हाई-स्पीड कॉरिडोर से पूरे उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी में सुधार सहित बेहतर औद्योगिक निवेश, लॉजिस्टिक्स और कृषि विपणन को आकर्षित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
गंगा एक्सप्रेसवे से 27 क्षेत्रों में औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब विकसित करने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 1 लाख से अधिक किसानों से 18,000 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे लगभग 7,000 एकड़ भूमि पर औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक्स हब विकसित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने आगे कहा, ‘2017 से पहले उत्तर प्रदेश वंशवादी राजनीति और जातिवाद में जकड़ा हुआ था, जहां दंगे, अराजकता, कर्फ्यू और माफिया का दबदबा कायम था। ऐसे में विकास, रोजगार या निवेश की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। आज मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि पिछले 9 वर्षों में, दो इंजन वाली सरकार का परिणाम उत्तर प्रदेश में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जहां एक्सप्रेसवे, राजमार्ग, जिला सड़कों और लगभग चार लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का एक मजबूत नेटवर्क मौजूद है।’
वहीं, पीएम मोदी ने इसे उत्तर प्रदेश के विकास की नई ‘जीवनरेखा’ बताया और कहा कि यह परियोजना राज्य की तरक्की को नई गति देगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने इस एक्सप्रेसवे का नाम मां गंगा के नाम पर रखा है। उन्होंने कहा, ‘जैसे मां गंगा हजारों वर्षों से यूपी और पूरे देश की जीवनरेखा रही हैं, वैसे ही आधुनिक विकास के इस दौर में उनके किनारे से गुजरता यह एक्सप्रेसवे यूपी के विकास की नई लाइफलाइन बनेगा। इसमें हमारे विकास के विजन के साथ-साथ हमारी समृद्ध विरासत की झलक भी मिलती है।’
गंगा एक्सप्रेसवे क्यों है अहम?
करीब 36,230 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित छह लेन के इस एक्सप्रेसवे को भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित करने की योजना है। एक्सप्रेसवे यूपी के 12 प्रमुख जिलों – मेरठ, हापुड, बुलन्दशहर, अमरोहा, संभल, बदायूँ, शाहजहाँपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज से होकर गुजरता है। अधिकारियों ने कहा कि इससे यात्रा के समय में भारी कटौती होगी और परिवहन तेज, सुरक्षित और अधिक सुविधाजनक हो जाएगा।
गंगा एक्सप्रेसवे के कुल चार खंडों में से तीन का निर्माण अदानी समूह द्वारा किया गया है। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत निर्मित, इस एक्सप्रेसवे को छह लेन के गलियारे के रूप में विकसित किया गया है, जिसमें आठ लेन तक विस्तार की गुंजाइश है और इसकी डिजाइन गति 120 किमी प्रति घंटा है।
इस परियोजना की एक प्रमुख विशेषता शाहजहाँपुर के पास बनी 3.2 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी है, जो वायु सेना के विमानों के लिए आपातकालीन लैंडिंग की सुविधा प्रदान कर सकती है। मार्ग पर सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर के तहत इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस), सीसीटीवी निगरानी, आपातकालीन कॉल बॉक्स, एम्बुलेंस और गश्ती दल की भी व्यवस्था होगी।
यात्रा में कम समय, एक्सप्रेसवे नेटवर्क होगा तैयार
गंगा एक्सप्रेसवे से मेरठ-प्रयागराज की यात्रा का समय 10-12 घंटे से घटकर 6-8 घंटे हो जाएगा। रास्ते के किनारे एकीकृत विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें गोदाम, कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां शामिल होंगी, जिनका उद्देश्य निवेश आकर्षित करना और रोजगार सृजित करना है।
गंगा एक्सप्रेसवे पूर्वांचल, आगरा-लखनऊ, बुंदेलखंड और गोरखपुर लिंक जैसे प्रमुख कॉरिडोर से भी जुड़ेगा, जिससे राज्य भर में एक व्यापक एक्सप्रेसवे नेटवर्क बनेगा। अधिकारियों ने कहा कि इस परियोजना से रोजगार के पर्याप्त अवसर पैदा होने की उम्मीद है और इससे उत्तर प्रदेश के एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को बल मिलेगा।
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