दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना भारत में शुरू हो चुकी है और इस बार यह जनगणना पूरी तरह से डिजिटल हो रही है। खास बात यह है कि सरकार ने इस बार यह सुविधा दे रखी है कि आप स्व-गणना कर सकते हैं। इस प्रक्रिया के जरिए आप अपने और परिवार की जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं।
कई राज्यों में स्वगणना शुरू हो चुकी है। उत्तर प्रदेश में यह 7 में से शुरू होने जा रही है। 7 मई से 21 मई तक नागरिक स्व-गणना कर सकेंगे, वहीं 22 मई से 20 जून तक जनगणनाकर्मी घर-घर जाकर मकानों की गणना करेंगे।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक देशभर में 26 लाख से अधिक परिवारों ने स्व-गणना विकल्प का उपयोग किया है। यानी लोग डिजिटल माध्यम से जनगणना प्रक्रिया में भागीदारी दिखा रहे हैं।
यह सुविधा 16 भाषाओं में उपलब्ध कराई जा रही है, जिनमें हिंदी, अंग्रेजी, बंगाली, असमिया, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, तमिल, तेलुगु, उर्दू समेत अन्य भाषाएं शामिल हैं।
स्व-गणना क्या है, ऑनलाइन कैसे करें, जानें प्रक्रिया ?
स्व-गणना वह प्रक्रिया है, जिसमें परिवार का कोई जिम्मेदार सदस्य ऑनलाइन पोर्टल पर जाकर अपने घर की जानकारी स्वयं दर्ज करेगा। इसमें मकान, परिवार, सदस्यों और आवास से जुड़ी जरूरी जानकारियां मांगी जाएंगी।
यह सुविधा जनगणना 2027 के पहले चरण यानी हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन से पहले सीमित अवधि के लिए उपलब्ध रहेगी। पोर्टल निर्धारित तारीख से 15 दिन पहले खोला जाएगा।
नागरिकों को आधिकारिक पोर्टल se.census.gov.in पर जाना होगा। वहां राज्य के रूप में उत्तर प्रदेश चुनना होगा और कैप्चा भरकर आगे बढ़ना होगा। इसके बाद परिवार के मुखिया का नाम, मोबाइल नंबर और जरूरत हो तो ईमेल आईडी दर्ज करनी होगी।
परिवार के लिए केवल एक मोबाइल नंबर का उपयोग किया जा सकेगा और वही नंबर आगे पहचान के लिए मान्य रहेगा।
मोबाइल नंबर दर्ज करने के बाद ओटीपी आएगा। ओटीपी भरने के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके साथ भाषा का चयन भी करना होगा। एक बार भाषा चुनने के बाद उसे बदला नहीं जा सकेगा।
नागरिकों को अपने जिले का नाम चुनना होगा। इसके बाद गांव, कस्बा, शहर, मोहल्ला या नजदीकी लैंडमार्क की जानकारी देनी होगी।
इसके बाद डिजिटल मैप खुलेगा, जिसमें लाल निशान (रेड मार्कर) को खींचकर अपने घर की सही लोकेशन पर रखना होगा। इससे गणनाकर्मी को सही घर तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
कौन-कौन सी जानकारी भरनी होगी?
ऑनलाइन फॉर्म में मकान और परिवार से जुड़ी सामान्य जानकारी भरनी होगी। यह वही प्रश्नावली होगी, जो गणनाकर्मी घर-घर जाकर पूछते हैं। इस बार 33 सवालों की प्रश्नावली में सबसे पेंचीदा और अहम सवाल परिवार की गणना से जुड़ा माना जा रहा है। किसी भी घर में दंपति की गिनती किस परिवार में होगी, यह जानकारी पत्नी के आधार पर तय की जाएगी। यानी महिला बताएगी कि वह किस घर की सदस्य है और उसी परिवार की सूची में उसका नाम जोड़ा जाएगा।
अगर किसी परिवार में एक से ज्यादा विवाहित जोड़े हैं, तो हर महिला से अलग-अलग यही जानकारी ली जाएगी। इससे परिवारों की वास्तविक संख्या तय करने में मदद मिलेगी।
कुछ जानकारियां जैसे भवन संख्या, जनगणना मकान संख्या और घर का आधिकारिक नंबर बाद में गणनाकर्मी अपने दौरे के दौरान दर्ज करेंगे।
मकान की बनावट: फर्श, दीवार और छत में प्रयुक्त सामग्री (जैसे मिट्टी, लकड़ी, ईंट, पत्थर, कंक्रीट आदि)।
बुनियादी सुविधाएं: पेयजल का स्रोत (नल, हैंडपंप, कुआं आदि), बिजली का स्रोत, शौचालय का प्रकार और गंदे पानी की निकासी की व्यवस्था।
परिवार का विवरण: मुखिया का नाम, लिंग, परिवार में सदस्यों की कुल संख्या और क्या वे अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) से हैं।
रसोई और ईंधन: रसोई घर की उपलब्धता और खाना पकाने के लिए प्रयुक्त ईंधन (जैसे LPG/PNG, लकड़ी, उपला आदि)।
परिसंपत्तियां (Assets): रेडियो, टेलीविजन, इंटरनेट की सुविधा, लैपटॉप/कंप्यूटर, मोबाइल/स्मार्टफोन, साइकिल, स्कूटर, कार और अनाज का मुख्य प्रकार।

ड्राफ्ट सेव करने की सुविधा
अगर कोई व्यक्ति एक बार में पूरी जानकारी नहीं भर पाता है, तो वह उसे ड्राफ्ट के रूप में सेव कर सकता है। बाद में दोबारा लॉगिन कर फॉर्म पूरा किया जा सकता है। अंतिम जमा करने से पहले पूरी जानकारी का प्रीव्यू भी देखा जा सकेगा।
जब सारी जानकारी सही लगने लगे, तब फाइनल सब्मिट Final Submit करना होगा। इसके बाद जानकारी में बदलाव नहीं किया जा सकेगा, सिवाय गणनाकर्मी के सत्यापन के दौरान।
सफल सबमिशन के बाद एक 11 अंकों की Self Enumeration ID जारी होगी, जो “H” अक्षर से शुरू होगी। यह ID SMS और ईमेल पर भी भेजी जाएगी।
गणनाकर्मी घर आए तो क्या करें?
जब जनगणना कर्मचारी घर पहुंचे, तब उसे यह SE ID दिखानी होगी। अगर आईडी सिस्टम में मिल जाती है, तो आपकी ऑनलाइन जानकारी स्वीकार कर ली जाएगी। अगर आईडी मेल नहीं खाती, तो गणनाकर्मी दोबारा पूरी जानकारी भर सकता है।
गौरतलब है कि भारत की जनगणना दुनिया के सबसे बड़े प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभियानों में गिनी जाती है। देश में पहली समकालिक जनगणना 1881 में हुई थी। आजादी के बाद यह आठवीं जनगणना होगी, जबकि कुल मिलाकर यह 16वीं जनगणना मानी जा रही है। 2021 में प्रस्तावित जनगणना कोविड महामारी के कारण नहीं हो सकी थी। अब 2027 में इसे पूरा किए जाने की तैयारी है।

