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फोनपे वॉलेट इनएक्टिविटी नोटिफिकेशन, क्या आपके पैसे कट जाएंगे? जानिए पूरा मामला

कुछ यूजर्स ने शिकायत की है कि वे फोनपे का नियमित उपयोग करते हैं, फिर भी उन्हें निष्क्रियता नोटिफिकेशन मिला है।

नई दिल्लीः हाल के दिनों में कई फोनपे यूजर्स को वॉलेट इनएक्टिविटी (निष्क्रियता) से जुड़ा नोटिफिकेशन मिला है। इसके बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या फोनपे अब निष्क्रिय वॉलेट के लिए बैंक खाते से पैसे काटेगा?

दरअसल, इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि बड़ी संख्या में यूजर्स अब भी फोनपे अकाउंट, यूपीआई अकाउंट और फोनपे वॉलेट को एक ही चीज मानते हैं। जबकि ये तीनों अलग-अलग सेवाएं हैं और अलग तरीके से काम करती हैं।

यूपीआई और वॉलेट में क्या अंतर है?

जब आप फोनपे पर यूपीआई के जरिए भुगतान करते हैं, तो पैसा सीधे आपके बैंक खाते से कटता है। वहीं, फोनपे वॉलेट एक प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट (पीपीआई) है, जिसमें पैसा पहले से जमा करके रखा जाता है। यानी यूपीआई और वॉलेट दो अलग-अलग भुगतान माध्यम हैं। यही वजह है कि वॉलेट पर लागू होने वाले नियम यूपीआई या बैंक खाते पर लागू नहीं होते।

इस बीच सबसे ज्यादा भ्रम इस बात को लेकर है कि यदि वॉलेट निष्क्रिय हो जाए तो क्या बैंक खाते से पैसे काटे जा सकते हैं। इसका जवाब है नहीं। यदि किसी यूजर का फोनपे वॉलेट लंबे समय से निष्क्रिय है और उसमें कोई बैलेंस नहीं है, तो कंपनी उसके बैंक खाते या यूपीआई से कोई राशि नहीं काट सकती। बैंक खाते से कोई कटौती नहीं होगी, यूपीआई से कोई पैसा नहीं लिया जाएगा और वॉलेट का बैलेंस भी निगेटिव नहीं होगा।

फोनपे इस्तेमाल करने पर भी नोटिफिकेशन क्यों?

कई यूजर्स का यह भी कहना है कि वे रोज फोनपे का इस्तेमाल करते हैं, फिर भी उन्हें इनएक्टिविटी नोटिफिकेशन मिला। इसकी वजह यह है कि फोनपे ऐप का इस्तेमाल और फोनपे वॉलेट का इस्तेमाल दो अलग बातें हैं।

संभव है कि कोई व्यक्ति रोज यूपीआई से भुगतान करता हो, बिल भरता हो या पैसे ट्रांसफर करता हो, लेकिन उसने महीनों या वर्षों से फोनपे वॉलेट का उपयोग न किया हो। ऐसे मामलों में वॉलेट को निष्क्रिय माना जा सकता है, भले ही ऐप नियमित रूप से इस्तेमाल किया जा रहा हो।

फोनपे के अनुसार, किसी भी संभावित इनएक्टिविटी शुल्क से पहले यूजर्स को 15 दिन का नोटिस दिया जाता है। इस दौरान वे अपने वॉलेट को दोबारा सक्रिय कर सकते हैं, उसमें राशि जोड़ सकते हैं, उपलब्ध बैलेंस निकाल सकते हैं या जरूरत न होने पर उसे बंद करने का फैसला कर सकते हैं।

केवाईसी को लेकर भी कई तरह की गलतफहमियां हैं। कुछ यूजर्स का मानना है कि वॉलेट को दोबारा सक्रिय करने के लिए फुल केवाईसी कराना जरूरी है। हालांकि, कंपनी के मुताबिक न्यूनतम केवाईसी वाले वॉलेट को सक्रिय करने के लिए फुल केवाईसी अनिवार्य नहीं है। यूजर ओटीपी सत्यापन पूरा करके और वॉलेट के जरिए एक ट्रांजेक्शन करके उसे दोबारा सक्रिय कर सकते हैं।

कैशबैक और वॉलेट को लेकर भ्रम

कैशबैक को लेकर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कई लोगों को लगता है कि फोनपे से मिलने वाला कैशबैक सीधे वॉलेट में जमा होता है। जबकि अधिकांश मामलों में कैशबैक एक अलग गिफ्ट कार्ड या रिवॉर्ड बैलेंस में जमा होता है। इसका फोनपे वॉलेट से सीधा संबंध नहीं होता।

इसलिए कैशबैक मिलना इस बात का प्रमाण नहीं है कि आपका वॉलेट सक्रिय है और न ही उस राशि पर वॉलेट इनएक्टिविटी शुल्क लागू होता है।

कुछ यूजर्स ने वॉलेट बंद करने के दौरान त्रुटि संदेश या अतिरिक्त सत्यापन जैसी समस्याओं की शिकायत भी की है। ऐसी स्थिति में फोनपे की ग्राहक सहायता सेवा से संपर्क करना सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है।

आखिर इनएक्टिविटी शुल्क क्यों लगाया जाता है?

डिजिटल वॉलेट एक विनियमित प्रीपेड भुगतान साधन होते हैं। इन्हें संचालित करने के लिए तकनीकी रखरखाव, सुरक्षा और नियामकीय अनुपालन पर लगातार खर्च करना पड़ता है। इसी कारण कई कंपनियां लंबे समय तक इस्तेमाल न होने वाले वॉलेट पर रखरखाव या निष्क्रियता शुल्क लगाती हैं। यह व्यवस्था केवल फोनपे तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल वॉलेट उद्योग में पहले से प्रचलित है।

पूरे मामले में सबसे ध्यान देने वाली बात यह है कि यह शुल्क केवल फोनपे वॉलेट से जुड़ा है। इसका यूपीआई लेनदेन, बैंक खाते या बैंक बैलेंस से कोई संबंध नहीं है। जिन यूजर्स को ऐसा नोटिफिकेशन मिला है, उनके लिए सबसे जरूरी कदम यह है कि वे पहले यह जांच लें कि उनके पास सक्रिय फोनपे वॉलेट है या नहीं। इसके बाद वे तय कर सकते हैं कि उसे जारी रखना है, दोबारा सक्रिय करना है या बंद करना है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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