केरल सरकार ने बजट 2026-27 में मलयालम फिल्म उद्योग के लिए 100 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की घोषणा की है। साथ ही सिनेमा को उद्योग का दर्जा देने, कोच्चि में फिल्म सिटी विकसित करने, एंटी-पाइरेसी तंत्र को मजबूत बनाने और वैश्विक निवेश आकर्षित करने जैसी योजनाओं का भी ऐलान किया गया है। मुख्यमंत्री वीडी सतीशन सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है, जब मलयालम सिनेमा रचनात्मकता के मामले में नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है, लेकिन आर्थिक और संरचनात्मक चुनौतियों से भी जूझ रहा है।
पिछले कुछ वर्षों में मलयालम फिल्मों ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। मोहनलाल की ‘दृश्यम’ से लेकर ‘2018’, ‘मंजुम्मेल बॉयज’, ‘आदुजीविथम’, ‘प्रेमलु’, ‘आवेशम’ और ‘भ्रमयुगम’ जैसी फिल्मों ने यह साबित किया कि दमदार कहानी, मजबूत पटकथा और सशक्त अभिनय के दम पर भी बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने इस पहचान को और व्यापक बनाया। उत्तर भारत का वह दर्शक, जो कभी दक्षिण भारतीय सिनेमा को केवल एक्शन और मसाला फिल्मों के नजरिए से देखता था, अब मलयालम फिल्मों का नियमित दर्शक बन चुका है।
मोहनलाल की दृश्यम फ्रैंचाइज से कौन हिंदी दर्शक अनजान होगा। हालिया सस्पेंस-थ्रिलर दृश्यम 3 ने बॉक्स ऑफिस पर 241 करोड़ से अधिक की बंपर कमाई कर चुकी है। इसके साथ ही काझा II ने 234 करोड़ रुपये, आडू 3 ने 120 करोड़ और ममूटी-मोहनलाल स्टारर मेगा फिल्म पैट्रियट ने करीब 80 करोड़ रुपये का शानदार बिजनेस किया।
फिल्मों के प्रदर्शन अच्छे लेकिन इंडस्ट्री की स्थिति…?
यह कंटेंट का ही जोर है कि 2024 में मलयालम फिल्मों ने दुनिया भर में लगभग 1,779 करोड़ रुपये का सकल कारोबार किया। इनमें करीब 891 करोड़ रुपये की कमाई अकेले केरल से हुई, जबकि 273 करोड़ रुपये देश के अन्य हिस्सों और 616 करोड़ रुपये विदेशी बाजारों से आए। तुलना करें तो 2022 और 2023 में पूरी इंडस्ट्री का वैश्विक कारोबार क्रमशः 752 करोड़ और 778 करोड़ रुपये के आसपास था। यानी महज दो वर्षों में 130 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज हुई।
इसके बावजूद मलयालम फिल्म उद्योग की स्थिति उतनी मजबूत नहीं है, जितनी आंकड़े पहली नजर में दिखाते हैं। भारतीय सिनेमा में इसकी पहचान अलग है। यहां सुपरस्टार हैं, लेकिन फिल्में केवल स्टारडम के भरोसे नहीं चलतीं। कहानी और पटकथा को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाता है। यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है, लेकिन आर्थिक दृष्टि से यही मॉडल कई बार चुनौती भी बन जाता है।
जब तेलुगु सिनेमा ‘बाहुबली’, ‘आरआरआर’, ‘पुष्पा’ और ‘कल्कि 2898 एडी’ जैसी विशाल बजट की फिल्मों के जरिए वैश्विक बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा था, तब मलयालम सिनेमा आम लोगों की जिंदगी, रिश्तों और सामाजिक बदलावों की कहानियों पर केंद्रित रहा। इसी वजह से उसे आलोचकों की सराहना तो खूब मिली, लेकिन बाजार का आकार अपेक्षाकृत सीमित रहा।
रिपोर्टों की मानें तो तेलुगु फिल्मों के पास आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का विशाल घरेलू बाजार है। तमिल फिल्मों को तमिलनाडु के अलावा श्रीलंका, मलेशिया, सिंगापुर और खाड़ी देशों में मजबूत दर्शक वर्ग का सहारा मिलता है। इसके मुकाबले मलयालम फिल्मों का पारंपरिक बाजार मुख्य रूप से केरल और खाड़ी देशों तक सीमित रहा है।
उद्योग से जुड़े संगठनों के अनुसार, हर साल करीब 200 मलयालम फिल्में बनती हैं, लेकिन इनमें से केवल 10 से 20 फिल्में ही वास्तविक मुनाफा कमा पाती हैं। अधिकांश फिल्में या तो घाटे में जाती हैं या मुश्किल से अपनी लागत निकाल पाती हैं। यही कारण है कि इंडस्ट्री लंबे समय से सिनेमा को औपचारिक उद्योग का दर्जा देने की मांग कर रही थी।
उद्योग का दर्जा मिलने से क्या बदलेगा?
अभी तक कई निर्माताओं को निजी वित्तीय स्रोतों या ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज लेकर फिल्में बनानी पड़ती थीं। उद्योग का दर्जा मिलने के बाद बैंकों से अपेक्षाकृत आसान और सस्ता ऋण मिल सकेगा। इससे फिल्म निर्माण की लागत कम होगी और निर्माताओं की वित्तीय निर्भरता भी घटेगी।
इसका फायदा केवल निर्माताओं तक सीमित नहीं रहेगा। कई सिनेमाघर अभी भी व्यावसायिक दरों पर बिजली बिल चुकाते हैं। उद्योग का दर्जा मिलने पर बिजली और अन्य परिचालन लागत में राहत मिल सकती है, जिससे खासकर छोटे और सिंगल-स्क्रीन थिएटरों को फायदा होगा।
बजट में घोषित ‘जे.सी. डेनियल इंटरनेशनल फिल्म सिटी’ को भी इसी दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर देखा जा रहा है। आज भी मलयालम फिल्म उद्योग को कई तकनीकी जरूरतों के लिए चेन्नई और हैदराबाद पर निर्भर रहना पड़ता है। पोस्ट-प्रोडक्शन, विजुअल इफेक्ट्स और अत्याधुनिक साउंड डिजाइन जैसी सुविधाओं के लिए अक्सर राज्य के बाहर जाना पड़ता है। यदि कोच्चि में प्रस्तावित फिल्म सिटी आधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित होती है, तो इससे लागत कम होगी और केरल खुद एक बड़े फिल्म निर्माण केंद्र के रूप में उभर सकता है।
सरकार की इन घोषणाओं का मलयालम फिल्म इंडस्ट्री ने स्वागत किया है। सुपरस्टार मोहनलाल ने कहा कि सिनेमा को उद्योग का दर्जा देने के फैसले से पर्दे के पीछे काम करने वाले हजारों फिल्मकर्मियों में नई उम्मीद जगेगी। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं उद्योग को नई ऊर्जा देने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर विकास के अवसर भी पैदा करेंगी।
मेगास्टार ममूटी ने बजटीय घोषणाओं की सराहना करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि मलयालम फिल्म उद्योग के लिए किए गए वादों के लिए नई सरकार का आभार। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी घोषणाएं जल्द से जल्द जमीनी स्तर पर लागू होंगी।
अभिनेता और निर्माता पृथ्वीराज सुकुमारन ने कहा कि कोच्चि में फिल्म सिटी के निर्माण और सिनेमा को उद्योग का दर्जा मिलने की खबर ने उन्हें खुशी, गर्व और आत्मविश्वास से भर दिया है। उन्होंने प्रस्तावित एंटी-पाइरेसी सेल को इंडस्ट्री के लिए एक सुरक्षा कवच बताया। वहीं अभिनेता टोविनो थॉमस ने कहा कि यह मांग वर्षों पुरानी थी और सरकार का फैसला उन हजारों लोगों के योगदान को मान्यता देता है, जो सीधे या परोक्ष रूप से इस क्षेत्र से अपनी आजीविका चलाते हैं।
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