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पाकिस्तानः ऑपरेशन सिंदूर में मिली हार के बाद सरकार ने संविधान में संशोधन किया, असीम मुनीर को दी अहम भूमिका

पाकिस्तान सरकार ने संविधान में संशोधन पेश किया है। इसके जरिए फील्ड मार्शल असीम मुनीर की ताकत और बढ़ सकती है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान यह कदम उठा रही है।

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फोटो- आईएएनएस

इस्लामाबादः पाकिस्तान ने शनिवार, 8 नवंबर को तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय और एकीकृत कमान सुनिश्चित करने के लिए रक्षा बलों के प्रमुख का नया पद सृजित करने के लिए एक संवैधानिक संशोधन पेश किया। संशोधन के तहत नई भूमिका असीम मुनीर को सौंपे जाने को लेकर है।

संसद में प्रस्तुत 27वें संविधान संशोधन विधेयक में संविधान के अनुच्छेद 243 में परिवर्तन का प्रस्ताव है जो अन्य मुद्दों के अलावा सशस्त्र बलों से संबंधित है।

पाकिस्तान के संविधान संशोधन में क्या कहा गया है?

इस संशोधन विधेयक के तहत राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री की सलाह पर सेना प्रमुख और रक्षा बल प्रमुख की नियुक्ति करेंगे।

थल सेनाध्यक्ष, जो रक्षा बलों के प्रमुख भी होंगे, प्रधानमंत्री के परामर्श से राष्ट्रीय सामरिक कमान के प्रमुख की नियुक्ति करेंगे। इसमें आगे कहा गया है कि राष्ट्रीय सामरिक कमान का प्रमुख पाकिस्तानी सेना से होगा।

सरकार सशस्त्र बलों के व्यक्तियों को फील्ड मार्शल, वायु सेना मार्शल और फ्लीट एडमिरल के पदों पर पदोन्नत कर सकेगी। फील्ड मार्शल का पद और विशेषाधिकार आजीवन होंगे अर्थात फील्ड मार्शल आजीवन फील्ड मार्शल बने रहेंगे।

विधेयक में यह भी कहा गया है कि ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष का पद 27 नवंबर, 2025 को समाप्त हो जाएगा। हिंदुस्तान दैनिक की खबर के मुताबिक, इस पद के स्थान पर चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस (सीडीएफ) बनाने का प्रस्ताव है जिसके जरिए सेना प्रमुख सभी सेनाओं का सर्वोच्च कमांडर बना दिया जाएगा और उनकी शक्ति और बढ़ जाएगी।

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इससे पहले शुक्रवार (7 नवंबर) को स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम मई में पाकिस्तान और भारत के बीच हुए चार दिवसीय संघर्ष से सीख लेकर तथा आधुनिक युद्ध की विकसित होती प्रकृति से प्रेरित होकर उठाया गया है, जिसके लिए एकीकृत परिचालन प्रतिक्रिया की आवश्यकता होती है।

22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया जिसमें पाकिस्तान के नियंत्रण वाले इलाकों में आतंकी ढांचों को निशाना बनाया गया। इन हमलों के बाद चार दिनों तक भीषण झड़पें हुईं, जो 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति के साथ समाप्त हुईं।

असीम मुनीर को बनाया गया था फील्ड मार्शल

भारतीय वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने पिछले महीने कहा था कि भारतीय हमलों में अमेरिकी एफ-16 जेट सहित कम से कम एक दर्जन पाकिस्तानी सैन्य विमान नष्ट हो गए या क्षतिग्रस्त हो गए।

भारत का कहना है कि मई में भारतीय सेना द्वारा विभिन्न पाकिस्तानी सैन्य ढांचों पर बमबारी के बाद पाकिस्तान ने शत्रुता समाप्त करने का अनुरोध किया था।

इस संघर्ष के तुरंत बाद पाकिस्तान सरकार ने सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर को फील्ड मार्शल के पद पर पदोन्नत कर दिया जिससे वे देश के इतिहास में इस पद पर पदोन्नत होने वाले दूसरे शीर्ष सैन्य अधिकारी बन गये।

पाकिस्तान के 27वें संविधान संशोधन विधेयक में संघीय संवैधानिक न्यायालय की स्थापना, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया में परिवर्तन तथा प्रांतीय मंत्रिमंडलों की सीमा में परिवर्तन का भी प्रस्ताव है।

कैबिनेट द्वारा इसे मंजूरी दिए जाने के कुछ ही घंटों बाद कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने इसे ऊपरी सदन सीनेट में पेश किया।

तरार ने कहा कि विधेयक में 49 खंड हैं। उन्होंने कहा, “मैं स्पष्ट कर दूँ कि इसमें तीन मुख्य क्षेत्र और दो सहायक क्षेत्र हैं। यह पाँच विषय क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगा।”

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सीनेट अध्यक्ष यूसुफ रजा गिलानी ने प्रस्तुत विधेयक को समीक्षा और विचार के लिए विधि एवं न्याय संबंधी स्थायी समिति के पास भेज दिया।

उन्होंने कहा कि विस्तृत समीक्षा और विचार के लिए दोनों समितियां संयुक्त बैठकें कर सकती हैं और रिपोर्ट सदन के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।

संविधान संशोधन पर विपक्ष ने क्या कहा?

विपक्षी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेता अली जफर ने कहा कि जब विपक्ष के नेता का पद रिक्त है तो संविधान संशोधन पर बहस करना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि सरकार और उसके सहयोगी दल विधेयक पारित कराने की जल्दबाजी में दिख रहे हैं। उन्होंने कहा, “मैं सुझाव दूंगा कि इसे समिति को भेजने के बजाय इस सीनेट को एक समिति के रूप में ही माना जाए।” उन्होंने सुझाव दिया कि विधेयक पर सभी व्यक्तियों द्वारा बहस की जानी चाहिए।

पीटीआई नेता ने आगे कहा कि विपक्ष को यह मसौदा शनिवार को ही मिला है और उन्होंने अभी तक इसका एक शब्द भी नहीं पढ़ा है। उन्होंने कहा, “हम उस चीज़ पर बहस नहीं कर सकते जिसे हमने पढ़ा ही नहीं है।”

सरकारी पीटीवी न्यूज के अनुसार, इससे पहले, सीनेट सत्र से कुछ समय पहले प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अजरबैजान से वीडियो लिंक के माध्यम से कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता की थी।

इसमें कहा गया है, “संघीय कैबिनेट ने 27वें संविधान संशोधन के मसौदे को मंजूरी दे दी है और इसका पूर्ण स्वागत किया है।”

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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