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नोएडा श्रमिक आंदोलन के बाद योगी सरकार ने बढ़ाई कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी, 21% तक का इजाफा, देखें लिस्ट

नोएडा में श्रमिकों के हिंसक आंदोलन के बाद यूपी सरकार द्वारा गठित उच्च अधिकार प्राप्त समिति की सिफारिशों पर नई दरें तय की गई हैं। इसके तहत सबसे अधिक लाभ नोएडा और गाजियाबाद के श्रमिकों को मिलेगा, जबकि अन्य नगर निगम क्षेत्रों और बाकी जिलों के लिए अलग-अलग दरें लागू की गई हैं।

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नोएडा-गाजियाबाद के श्रमिकों की बढ़ी न्यूनतम मजदूरी।

नोएडा-गाजियाबाद से लेकर फरीदाबाद-पलवल तक सोमवार को हुए श्रमिक आंदोलन और हिंसा के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। देर रात जारी आदेश में अकुशल, अर्धकुशल और कुशल श्रमिकों के वेतन में करीब 20-21 प्रतिशत तक इजाफा किया गया है। यह फैसला गौतमबुद्ध नगर समेत औद्योगिक इलाकों में बढ़ते असंतोष और हालिया घटनाओं के बाद लिया गया है।

सरकार द्वारा गठित उच्च अधिकार प्राप्त समिति की सिफारिशों पर नई दरें तय की गई हैं। इसके तहत सबसे अधिक लाभ नोएडा और गाजियाबाद के श्रमिकों को मिलेगा, जबकि अन्य नगर निगम क्षेत्रों और बाकी जिलों के लिए अलग-अलग दरें लागू की गई हैं।

नोएडा-गाजियाबाद में कितनी बढ़ी मजदूरी

अब नोएडा और गाजियाबाद में अकुशल मजदूरों का न्यूनतम वेतन 11,313 रुपये से बढ़ाकर 13,690 रुपये कर दिया गया है। अर्धकुशल श्रमिकों का वेतन 12,445 रुपये से बढ़कर 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों का 13,940 रुपये से बढ़कर 16,868 रुपये हो गया है।

अन्य नगर निगम वाले जिलों में अकुशल श्रमिकों को 13,006 रुपये, अर्धकुशल को 14,306 रुपये और कुशल को 16,025 रुपये मिलेंगे। वहीं बाकी जिलों में अकुशल मजदूरी 12,356 रुपये, अर्धकुशल 13,591 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 15,224 रुपये तय किए गए हैं।

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नोएडा में सोमवार हिंसक क्यों हो गया आंदोलन?

दरअसल, यह आंदोलन हरियाणा सरकार द्वारा न्यूनतम मजदूरी में करीब 35 प्रतिशत बढ़ोतरी के फैसले के बाद तेज हुआ। गुरुग्राम और मानेसर के श्रमिकों को इसका सीधा फायदा मिला, जिसके बाद नोएडा के मजदूरों ने भी समान वेतन की मांग उठाई।

मजदूरों का कहना था कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनका वेतन 9 से 13 हजार रुपये के बीच ही अटका हुआ है। 10-12 घंटे काम करने के बावजूद ओवरटाइम का सही भुगतान नहीं मिलता, साप्ताहिक छुट्टी नहीं मिलती और बोनस भी समय पर नहीं दिया जाता।

शुक्रवार से शुरू हुआ प्रदर्शन नोएडा के फेज-2, होजरी कॉम्प्लेक्स, सेक्टर-60, 62 और 84 में धीरे-धीरे फैलता गया। शुरुआत में यह शांतिपूर्ण रहा, लेकिन सोमवार को कई जगहों पर हालात बिगड़ गए। सड़कों पर जाम लगाया गया, कुछ स्थानों पर वाहनों में आग लगाई गई, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आईं।

गौतम बुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के अनुसार, करीब 83 जगहों पर लगभग 42 हजार मजदूर इकट्ठा हुए। अधिकारियों ने बताया कि 78 जगहों पर स्थिति को बातचीत और समझाने-बुझाने के जरिए संभाला गया, जिसके बाद मजदूर बातचीत करके वहां से चले गए।

पुलिस का आरोप है कि दूसरे जिलों से आए कुछ लोगों ने हिंसा भड़काने और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में बाधा डालने की कोशिश की। अधिकारियों के मुताबिक यह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा लगता है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों की पहचान हो गई है, उनके खिलाफ केस दर्ज किए जा रहे हैं।

‘20,000 रुपये वेतन की झूठी खबर फैलाई गई’

आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर न्यूनतम वेतन 20,000 रुपये तय होने की खबर तेजी से फैली थी, जिसे नोएडा जिलाधिकारी ने पूरी तरह मनगढ़ंत और झूठा करार दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार फिलहाल ‘नेशनल फ्लोर वेज’ निर्धारित करने की प्रक्रिया पर काम कर रही है और अभी ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है।

इसके साथ ही, जिलाधिकारी मेधा रूपम और उच्च स्तरीय समिति ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि केवल वेतन बढ़ाना ही काफी नहीं होगा। प्रशासन ने नियोक्ता संगठनों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे श्रमिकों को ओवरटाइम का दोगुना भुगतान करें, हर हफ्ते अनिवार्य छुट्टी दें और हर महीने की 10 तारीख तक वेतन व समय पर बोनस का भुगतान सुनिश्चित करें।

पाकिस्तानी कनेक्शन की भी हो रही जांच

उत्तर प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल राजभर ने मेरठ और नोएडा में हाल ही में हुई कुछ गिरफ्तारियों का हवाला देते हुए इस आंदोलन के पीछे पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स का हाथ होने की संभावना व्यक्त की है। उनका मानना है कि राष्ट्रविरोधी तत्व श्रमिक असंतोष का फायदा उठाकर अशांति पैदा करना चाहते हैं।

बता दें कि मामले में 300 लोगों को हिरासत में लिया गया है। उन सोशल मीडिया हैंडल की पहचान कर ली गई है जिसके जरिए गलत जानकारी और अफवाहें फैलाई गई। अधिकारी अशांति में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए फैक्ट्रियों के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच कर रहे हैं।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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