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No Kings: अमेरिका के 50 राज्यों में सड़कों पर उतरे लाखों लोग, ट्रंप की नीतियों के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा

प्रदर्शनकारियों ने ‘यह है लोकतंत्र कैसा दिखता है’ और ‘हे हे हो हो, डोनाल्ड ट्रंप को जाना होगा’ जैसे नारे लगाए। कई जगह अमेरिकी झंडे उल्टे फहराए गए, जो लोकतांत्रिक संकट का प्रतीक माने जाते हैं।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त नीतियों और प्रवृत्तियों के खिलाफ शनिवार को अमेरिका के सभी 50 राज्यों में ‘नो किंग्स’ (No Kings) नाम से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। आयोजकों ने दावा किया कि न्यूयॉर्क से लेकर लॉस एंजिल्स और फ्लोरिडा में ट्रंप के घर के पास तक हुए इन प्रदर्शनों में लगभग 70 लाख लोगों ने हिस्सा लिया।

यह ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद तीसरा बड़ा राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन था। सरकार के शटडाउन और कांग्रेस से टकराव के बीच, प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि ट्रंप प्रशासन “लोकतंत्र को राजशाही में बदलने” की दिशा में बढ़ रहा है। डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा प्रायोजित यह विरोध प्रदर्शन जून में हुए पहले “नो किंग्स प्रोटेस्ट” के बाद दूसरा था जिसमें काफी लोगों ने हिस्सा लिया।

ट्रंप से चुनाव हारने वाली कमला हैरिस ने एक्स पर पोस्ट किया, “मैं आपको अपने पड़ोसियों के साथ नो किंग्स कार्यक्रम में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में शामिल होने और अपनी आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित करती हूं। हमारे देश में, सत्ता जनता के पास है।”

प्रदर्शनकारियों ने ‘यह है लोकतंत्र कैसा दिखता है’ और ‘हे हे हो हो, डोनाल्ड ट्रंप को जाना होगा’ जैसे नारे लगाए। कई जगह अमेरिकी झंडे उल्टे फहराए गए, जो लोकतांत्रिक संकट का प्रतीक माने जाते हैं। न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर, शिकागो, बोस्टन, अटलांटा और वॉशिंगटन डीसी के नेशनल मॉल पर भारी भीड़ जुटी। वहीं, लॉस एंजिल्स में प्रदर्शनकारियों ने ट्रंप का विशाल गुब्बारा उड़ाया, जिसमें उन्हें डायपर पहने दिखाया गया था। कुछ जगहों पर पुलिस और आव्रजन अधिकारियों के साथ झड़पें हुईं।

‘No Kings…डोनाल्ड ट्रंप एक प्रवासी के बेटे लेकिन..’

वॉशिंगटन डीसी के नेशनल मॉल पर ब्रिटिश-अमेरिकी पत्रकार मेहदी हसन ने भीड़ के सामने राष्ट्रपति ट्रंप पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “डोनाल्ड ट्रंप एक प्रवासी के बेटे, प्रवासी के पोते और दो प्रवासी महिलाओं के पति हैं, लेकिन उनकी राजनीति प्रवासियों के खिलाफ नफरत पर टिकी है।”

हसन ने कहा, “हमने राजाओं के खिलाफ क्रांति लड़ी थी। अब हम किसी राजा के आगे झुकने वाले नहीं हैं।” उनके इस भाषण के अंश सोशल मीडिया पर वायरल हो गए और लाखों व्यूज़ मिले। कई उपयोगकर्ताओं ने इसे “अब तक का सबसे प्रभावशाली राजनीतिक भाषण” बताया।

नो किंग्स आंदोलन

‘नो किंग्स’ आंदोलन का आयोजन इनविजिबल और पब्लिक सिटीजन जैसे नागरिक समूहों ने किया था। यह विरोध उस समय हुआ जब सरकार आंशिक रूप से बंद है और डेमोक्रेट्स व रिपब्लिकन के बीच बजट पर गतिरोध बना हुआ है। डेमोक्रेट्स ने स्वास्थ्य योजनाओं और बीमा में कटौती के विरोध में बिल रोके हुए हैं, जबकि ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इन योजनाओं से सरकारी खर्च बढ़ेगा।

नो किंग्स प्रोटेस्ट में प्रगतिशील नेताओं बर्नी सैंडर्स और एलेक्जान्द्रिया ओकासियो-कोर्टेज ने भी हिस्सा लिया। दोनों ने ट्रंप पर लोकतंत्र को कमजोर करने और सत्ता का केंद्रीकरण करने का आरोप लगाया।

वॉशिंगटन में इराक युद्ध के पूर्व मरीन सैनिक शॉन हावर्ड ने कहा, ‘मैंने आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी, और अब अपने देश में ही उसी आज़ादी को खतरे में देख रहा हूं। जब नागरिकों को बिना मुकदमे के हिरासत में लिया जा रहा है और सेना को शहरों में उतारा जा रहा है, तो यह अमेरिकी लोकतंत्र का अपमान है।’

ट्रंप ने क्या कहा?

राष्ट्रपति ट्रंप ने विरोध प्रदर्शनों को ‘अमेरिका से नफरत करने वाली रैलियाँ’ बताया और सोशल मीडिया पर एआई से बने वीडियो साझा किए, जिनमें उन्हें ‘राजा’ की तरह दिखाया गया। एक वीडियो में उन्हें जेट विमान उड़ाते हुए दिखाया गया, जो प्रदर्शनकारियों पर मल फेंकता है। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से कहा, ‘वे मुझे राजा कह रहे हैं। मैं राजा नहीं हूं।’

‘नो किंग्स’ आंदोलन के आयोजकों ने इसे सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि ‘लोकतंत्र की पुकार’ बताया है। उन्होंने कहा, ‘अमेरिका ने राजाओं से आज़ादी हासिल की थी। अब हमें उस आजादी को बचाना है, क्योंकि लोकतंत्र किसी व्यक्ति का ताज नहीं, जनता की आवाज है।’

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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