नई दिल्ली: भारत में उत्तर से लेकर दक्षिणी राज्यों में इन दिनों भीषण गर्मी का प्रकोप देखा जा रहा है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) ने भयंकर गर्मी की लहर के बीच स्वतः संज्ञान लिया है और कई मंत्रालयों, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) समेत अन्य संबंधित एजेंसियों को नोटिस भेजकर लू को कम करने के लिए कार्य योजनाएं मांगी हैं।
एनजीटी ने पाया कि बढ़ते तापमान के चलते सार्वजनिक स्वास्थ्य, कृषि, पानी की उपलब्धता, उत्पादकता, वन्यजीव और समग्र अर्थव्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।
NGT ने IMD के आंकड़ों का दिया हवाला
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों का हवाला देते हुए एनजीटी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के बांदा में तापमान 48 डिग्री तक पहुंच गया है जबकि दिल्ली और अन्य क्षेत्रों में भीषण लू की स्थिति बनी हुई है। जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव (अध्यक्ष), विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि लू भारत की सबसे कम पहचानी जाने वाली पर्यावरणीय आपदाओं में से एक बन गई है। यह शहरी और ग्रामीण आबादी को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करती है।
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एनजीटी ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में घनी कंक्रीट संरचनाओं, गाड़ियों से निकलने वाले उत्सर्जन, औद्योगिक गतिविधियों और उच्च ऊर्जा खपत के कारण गर्मी अधिक पड़ती है। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय तक खुले में रहने, सीमित शीतलन अवसंरचना और संस्थागत कमियों के चलते अधिक गर्मी होती है।
एनजीटी ने यूपी, बिहार समेत इन राज्यों को भेजा नोटिस
एनजीटी की पीठ ने इस बात पर भी जोर दिया कि गर्मी को कम करने के लिए क्षेत्र-विशिष्ट जलवायु अनुकूलन रणनीतियों, उच्च-रिजोल्यूशन थर्मल मैपिंग और रिमोट सेंसिंग, बेहतर अल्पकालिक और मौसमी पूर्वानुमान, खुले तौर पर उपलब्ध जलवायु और भूस्थानिक डेटा की तत्काल आवश्यकता पर भी बल दिया। इसके अलावा स्कूल और समुदाय आधारित मौसम निगरानी पहलों और गर्मी के जोखिमों और पर्यावरणीय प्रभावों पर भी शोध की आवश्यकता पर बल दिया।
न्यायाधिकरण ने जोर दिया कि जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियों से जुड़े बढ़ते तापमान पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत गंभीर पर्यावरणीय चिंताएं पैदा करते हैं। इसके परिणामस्वरूप एनजीटी ने कई केंद्रीय मंत्रालयों, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और कई राज्य सरकारों को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ शामिल हैं।
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एनजीटी द्वारा जारी नोटिस में प्रतिवादियों से अपने जवाब और कार्ययोजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त, 2026 को होगी।

