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नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक गिरफ्तार, क्या है पूरा मामला?

एसएसपी प्रबीन धीतल के अनुसार, पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली को भक्तपुर के गुंडू स्थित उनके घर से और रमेश लेखक को सूर्यविनायक से तड़के सुबह गिरफ्तार किया गया।

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Nepal’s new govt arrests ex-PM Oli, former HM Lekhak over Gen Z protests

काठमांडूः नेपाल के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह (बालन) ने पदभार संभालते ही देश की राजनीति में अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर कर दिया है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को 2025 के ‘जेन-जी’ आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और कथित आपराधिक लापरवाही (कुल्पेबल होमिसाइड) से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह के नेतृत्व में बनी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक के फैसले के बाद की गई।

शुक्रवार को शपथ लेने के बाद हुई पहली कैबिनेट बैठक में सरकार ने जेन-जी आंदोलन की जांच के लिए गठित हाई-लेवल इंक्वायरी कमीशन की रिपोर्ट लागू करने का फैसला किया। पूर्व स्पेशल कोर्ट प्रमुख गौरी बहादुर कार्की की अगुवाई वाले इस आयोग ने ओली, लेखक और तत्कालीन पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खापुंग के खिलाफ आपराधिक जांच और अभियोजन की सिफारिश की थी।

केपी शर्मा ओली को भक्तपुर के गुंडू स्थित निवास से गिरफ्तार किया गया

काठमांडू वैली पुलिस के प्रवक्ता एसएसपी प्रवीण धिताल के मुताबिक, अदालत से वारंट जारी होने के बाद शनिवार सुबह दोनों नेताओं को उनके घरों से गिरफ्तार किया गया। ओली को भक्तपुर के गुंडू स्थित निवास से, जबकि लेखक को सूर्यविनायक स्थित घर से हिरासत में लिया गया। शनिवार सार्वजनिक अवकाश होने के कारण दोनों को रविवार तक पुलिस हिरासत में रखा जाएगा।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरी कार्रवाई सितंबर 2025 में हुए भ्रष्टाचार विरोधी जेन-जी (Gen-Z) आंदोलन के हिंसक दमन से जुड़ी है। इस आंदोलन के दौरान पुलिसिया कार्रवाई में कुल 77 लोगों की जान गई थी और अरबों की संपत्ति का नुकसान हुआ था। पूर्व विशेष अदालत के अध्यक्ष गौरी बहादुर कार्की के नेतृत्व वाले आयोग ने अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन सरकार पर ‘आपराधिक लापरवाही’ का आरोप लगाया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि खुफिया जानकारी होने के बावजूद हिंसा रोकने के पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए, जिसके कारण कई प्रदर्शनकारियों की जान गई।

आयोग ने ओली, रमेश लेखक और पूर्व पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खापुंग पर नेशनल पेनल कोड की धारा 181 और 182 के तहत ‘गैर-इरादतन हत्या’ का मामला चलाने की सिफारिश की है, जिसमें दोषी पाए जाने पर 10 साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा, रिपोर्ट में तत्कालीन गृह सचिव गोकर्ण मणि दवाड़ी और सशस्त्र पुलिस बल के प्रमुख राजू अर्याल सहित कई अन्य उच्चाधिकारियों पर भी धारा 182 के तहत कार्रवाई का सुझाव दिया गया है।

सरकार ने कार्रवाई को सही ठहराया, विपक्ष ने क्या कहा?

नए गृह मंत्री सुदान गुरुंग ने गिरफ्तारी को सही ठहराते हुए कहा, ‘यह किसी के खिलाफ बदले की कार्रवाई नहीं है, बल्कि जिम्मेदार लोगों को न्याय के दायरे में लाने की शुरुआत है। देश अब नई दिशा में आगे बढ़ेगा।’

कैबिनेट ने जेन-जी आंदोलन के शहीदों को श्रद्धांजलि देने और सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका की अलग से जांच के लिए कमेटी बनाने का भी फैसला किया है।

वहीं, ओली की पार्टी सीपीएन-यूएमएल ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेता रघुजी पंत ने कहा कि जांच रिपोर्ट में गिरफ्तारी के पर्याप्त आधार नहीं हैं और इसे पूर्वाग्रह से तैयार किया गया है। पूर्व विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञावली ने इसे “राजनीतिक बदले की कार्रवाई” बताया। पार्टी ने इस मुद्दे पर आपात बैठक भी बुलाई है।

गिरफ्तारी से पहले ओली ने अपने वकीलों से सलाह ली और इसे “प्रतिशोधात्मक कार्रवाई” बताते हुए कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही। वहीं रमेश लेखक ने भी इसे “राजनीतिक रूप से प्रेरित” करार देते हुए कहा कि वह इसके खिलाफ राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर संघर्ष करेंगे।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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