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नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल का किसान आंदोलन स्थगित, प्रशासन के साथ लिखित समझौते के बाद बनी सहमति

गौरतलब है कि सांसद हनुमान बेनीवाल ने अपनी छह प्रमुख मांगों को लेकर मंगलवार को लगभग 2,000 वाहनों के काफिले के साथ जयपुर की ओर कूच शुरू किया था। इस दौरान प्रशासन ने नागौर-अजमेर नेशनल हाईवे-59 पर पादूकलां के पास भारी पुलिस बल तैनात कर बैरिकेडिंग कर दी थी।

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राजस्थान में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल
राजस्थान में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल। फोटोः फेसबुक

जयपुरः राजस्थान में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के नेतृत्व में चल रहा किसान आंदोलन बुधवार सुबह जिला प्रशासन के साथ हुए एक लिखित समझौते के बाद स्थगित कर दिया गया। मंगलवार रात भर चली मैराथन वार्ताओं के बाद सुबह करीब 5 बजे प्रशासन और बेनीवाल के बीच सहमति बनी, जिसके बाद सांसद ने आंदोलन रोकने की घोषणा की।

गौरतलब है कि सांसद हनुमान बेनीवाल ने अपनी छह प्रमुख मांगों को लेकर मंगलवार को लगभग 2,000 वाहनों के काफिले के साथ जयपुर की ओर कूच किया था। इस दौरान प्रशासन ने नागौर-अजमेर नेशनल हाईवे-59 पर पादूकलां के पास भारी पुलिस बल तैनात कर बैरिकेडिंग कर दी थी।

जब बेनीवाल का काफिला बैरिकेड्स देखकर जयपुर की ओर मुड़ा, तो प्रशासन पर दबाव बढ़ गया। इसके बाद अजमेर रेंज आईजी राजेंद्र सिंह, नागौर कलेक्टर अरुण कुमार पुरोहित और एसपी मृदुल कछावा ने मौके पर पहुंचकर वार्ता शुरू की। पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रहने के बाद बुधवार तड़के दुबारा चर्चा हुई और लिखित समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।

समझौते में क्या है?

लिखित समझौते के तहत प्रशासन ने बजरी माफिया के खिलाफ सख्त कदम उठाने का भरोसा दिया है। इसके लिए एक दिन के भीतर विशेष टीमें तैनात कर ड्रोन और मैनुअल सर्वे शुरू किया जाएगा ताकि अवैध खनन पर भारी जुर्माना लगाया जा सके। साथ ही, डेगाना के एसडीएम, डीएसपी और माइनिंग इंजीनियर राकेश शेषमा सहित कई जिम्मेदार अधिकारियों को हटाने और उन पर कार्रवाई करने की मांग भी मान ली गई है।

बैठक के बाद हनुमान बेनीवाल ने घोषणा की कि प्रमुख मांगों पर सहमति बन गई है और आंदोलन फिलहाल स्थगित किया जा रहा है। मीडिया से बातचीत में बेनीवाल ने कहा कि अवैध रेत खनन के खिलाफ एक दिन के भीतर टीमें गठित कर सर्वे शुरू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि समझौते में शामिल सभी बिंदुओं पर अगले दो से तीन दिनों में कार्रवाई पूरी करने का आश्वासन प्रशासन ने दिया है।

किसानों के हित में हुए इस समझौते में फसल बीमा के लंबित दावों का निपटारा करने, रेलवे द्वारा अधिग्रहित भूमि का उचित मुआवजा दिलाने और पिछले साल आपदा राहत से छूटे मेड़ता व रियां क्षेत्र के गांवों को शामिल करने की बात कही गई है। इसके अलावा, लगभग 14,000 बीघा चारागाह भूमि के गलत आवंटन मामले की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। प्रशासन ने इन सभी कार्यों को अगले दो से तीन दिनों के भीतर पूरा करने की समयसीमा तय की है, जिसके बाद बेनीवाल ने अपना धरना समाप्त कर दिया और क्षेत्र में स्थिति अब सामान्य है।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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