नई दिल्ली: भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने दक्षिण-पश्चिम मानसून के भारत पहुंचने की पुष्टि कर दी है। मौसम विभाग ने गुरुवार (4 जून) को केरल में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन की घोषणा की। इसी के साथ भारत में वर्षा ऋतु की आधिकारिक शुरुआत हो गई है। मानसून के आमतौर आने की तारीख 1 जून मानी जाती है। ऐसे में इस बार इसके पहुंचने में चार दिन की देरी हुई है। जबकि कुछ दिनों पहले तक ये अनुमान था कि इस बार मानसून मई के आखिरी हफ्ते में पहुंच जाएगा।
बहरहहाल, मानसून का असर केरल में पिछले कई दिनों से देखा जा रहा है। अब इसके पहुंचने से बारिश में और वृद्धि होगी। मौसम विभाग ने इससे पहले बताया था कि मानसून के केरल और आसपास के क्षेत्रों में आगे बढ़ने और राज्य भर में व्यापक वर्षा लाने के लिए परिस्थितियाँ अनुकूल हो गई हैं।
केरल में भारी बारिश
तटीय राज्य केरल मानसून का पहला पड़ाव होता है। ऐसे में इस सीजन में यहां अमूमन हर साल भारी बारिश होती है। इस बार भी स्थिति ऐसी है। पिछले कुछ दिनों से मौसम विज्ञान विभाग केरल में बारिश पर नजर रख रहा था, और मानसून की आधिकारिक घोषणा के लिए आवश्यक परिस्थितियों का इंतजार किया जा रहा था। वैसे भी केरल में मानसून के आने से कुछ दिन पहले से इसका असर दिखने लगता है।
मौसम अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में व्यापक बारिश, तेज हवाएँ और बादलों का घना होना शुरू हो गया है। इससे मानसून की औपचारिक घोषणा के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ बन गई हैं। गुरुवार की सुबह राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश जारी रही, जिसके चलते आईएमडी ने अलाप्पुझा, कोट्टायम और एर्नाकुलम जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने गरज के साथ बारिश, भारी वर्षा और 40 किमी प्रति घंटे तक की गति से हवाओं की चेतावनी दी है।
उत्तर भारत कब पहुंचेगा मानसून?
दक्षिण-पश्चिम मानसून के केरल पहुंचने के साथ ही अब बारिश के मौसम का इंतजार उत्तरी राज्यों को है, जो पिछले कई हफ्तों से भीषण गर्मी झेल रहे हैं। हालांकि, बीच में कुछ मौकों पर हुई बारिश ने जरूर राहत पहुंचाई है। मानसून आमतौर पर जून के महीने में स्थिर गति से आगे बढ़ता है। यह पश्चिमी तट और पूर्वोत्तर के अधिकांश हिस्सों में तेजी से फैलता है और इस दौरान मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सहित मध्य भारत में महीने के मध्य तक पहुंचता है। इसके बाद यह पूर्वी और उत्तरी क्षेत्रों की ओर आगे बढ़ता है।
दिल्ली में आमतौर पर 27 जून के आसपास मानसून की बारिश शुरू हो जाती है, जबकि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश सहित उत्तर-पश्चिमी भारत के अधिकांश हिस्सों में आमतौर पर जून के अंत या जुलाई के पहले सप्ताह तक बारिश होने लगती है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यदि मौसम अनुकूल रहा तो जुलाई की शुरुआत तक उत्तर भारत के बड़े हिस्से में भी मौसमी बारिश पहुंचने की संभावना है। मानसून के आगमन की घोषणा हो चुकी है। हालांकि, ये आगे किस गति से बढ़ता है, ये भी देखने वाली बात होगी। गौरतलब है कि अल नीनो प्रभाव के कारण इस बार मानसून की बारिश प्रभावित होने की भी आशंका है। फिलहार हर मौसमी बदलाव पर वैज्ञानिक नजर बनाए हुए हैं।

