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लखनऊ अग्निकांड पर सीएम योगी का बड़ा एक्शन, 4 अधिकारी सस्पेंड, 4 हिरासत में लिए गए; मुआवजे की घोषणा

प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, तुषार कृष्ण जायसवाल और एक अन्य आरोपी शामिल हैं।

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Group of men stand around a hospital bed as a patient lies with an oxygen mask, being attended by a person leaning over the bed.
अलीगंज अग्निकांड के घायलों से मिलते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।

लखनऊ: अलीगंज स्थित पुरनिया इलाके में बहुमंजिला व्यावसायिक भवन में लगी भीषण आग ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश देते हुए ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी है। अब तक चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) अब इस मामले में बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी और संभावित लापरवाही की भी जांच करेगा।

मुख्यमंत्री ने घटनास्थल और अस्पताल का किया दौरा

हादसे के समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ में एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मंच से ही उन्हें आग लगने की सूचना मिली, जिसके बाद उन्होंने अपने सभी निर्धारित कार्यक्रम रद्द कर दिए। लखनऊ रवाना होने से पहले उन्होंने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए।

लखनऊ पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री सबसे पहले घटनास्थल पर पहुंचे और बचाव अभियान की समीक्षा की। इसके बाद वह किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) पहुंचे, जहां उन्होंने घायलों और उनके परिजनों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से घायलों की स्थिति की जानकारी ली और बेहतर से बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

Left: man in peach kurta among officials and onlookers; right: heavily damaged building with firefighters on ladders outside.
घटनास्थल का मुआयना करते सीएम योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री ने बाद में सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि सरकार पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है तथा सभी घायलों का उपचार प्राथमिकता के आधार पर कराया जा रहा है।

मृतकों के परिजनों को पांच लाख की सहायता

हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। वहीं गंभीर रूप से घायलों को 50-50 हजार रुपये की तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

केजीएमयू प्रशासन के अनुसार अस्पताल में 22 से 23 लोगों को लाया गया था, जिनमें 15 लोगों को मृत घोषित किया गया। आठ घायलों का उपचार चल रहा है, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई गई है।

पांच कालीदास मार्ग पर हाईलेवल बैठक, चार अधिकारी निलंबित

घटनास्थल और अस्पताल का दौरा करने के बाद मुख्यमंत्री ने अपने सरकारी आवास पांच कालीदास मार्ग पर उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। बैठक में प्रदेश के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी शामिल हुए। समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने मामले की गहन जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) के गठन के निर्देश दिए।

SIT में पर्यटन, धर्मार्थ कार्य एवं संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात तथा लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। जांच दल को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपनी होगी।

प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला, तुषार कृष्ण जायसवाल और एक अन्य आरोपी शामिल हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर चार अधिकारियों के खिलाफ भी तत्काल कार्रवाई की गई है। निलंबित अधिकारियों में बिजली विभाग के जानकीपुरम क्षेत्र के अधिशासी अभियंता (कलेक्शन) गौरव कुमार, फायर विभाग के एफएसएसओ एवं इंदिरानगर प्रभारी कमलेन्द्र कुमार सिंह, लखनऊ विकास प्राधिकरण के सहायक अभियंता अनिल कुमार तथा अवर अभियंता प्रमोद पांडे शामिल हैं।

बड़े अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

सरकारी सूत्रों के अनुसार SIT की जांच केवल निचले स्तर की जिम्मेदारी तय करने तक सीमित नहीं रहेगी। भवन की स्वीकृति, अग्नि सुरक्षा मानकों के अनुपालन, विद्युत सुरक्षा और निरीक्षण प्रक्रियाओं से जुड़े विभिन्न विभागों की भूमिका की भी पड़ताल की जाएगी। ऐसे में कई वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही भी जांच के दायरे में आ सकती है।

सरकार का मानना है कि यदि समय रहते सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया गया होता तो इतनी बड़ी जनहानि रोकी जा सकती थी। इसी कारण जांच दल को व्यापक अधिकार दिए गए हैं ताकि हादसे के लिए जिम्मेदार सभी व्यक्तियों और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सके।

राहत-बचाव अभियान में जुटी रहीं कई एजेंसियां

अलीगंज के पुरनिया क्षेत्र स्थित इस बहुमंजिला भवन में सोमवार दोपहर बाद आग लगने के बाद देखते ही देखते पूरा परिसर धुएं से भर गया। भवन में एक पेट शॉप और एनीमेशन सेंटर सहित कई व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, पुलिस, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं।

करीब दस दमकल वाहनों की मदद से आग पर काबू पाया गया। बचाव दल ने इमारत की पिछली दीवार तोड़कर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया और कई लोगों को बाहर निकाला। अधिकारियों के अनुसार भवन की पूरी तलाशी पूरी कर ली गई है और अब किसी के फंसे होने की आशंका नहीं है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी रात में घटनास्थल का दौरा किया

अग्निकांड की सूचना मिलते ही रक्षामंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह ने अपने सभी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम तत्काल स्थगित कर दिए और रात में सीधे लखनऊ पहुंचे। घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने इस हादसे को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की तथा दोषियों की जवाबदेही तय किए जाने का भरोसा दिलाया।

घटना की जानकारी मिलते ही रक्षामंत्री राजनाथ सिंह रात्रि 9:35 बजे लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे। वहां से सीधे अलीगंज क्षेत्र के पुरनिया स्थित घटनास्थल पर पहुंचे और अधिकारियों से राहत एवं बचाव कार्यों की विस्तृत जानकारी ली।उन्होंने मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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