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मुस्लिम स्कूल में को-एड के लिए स्थानीय प्रशासन की मंजूरी जरूरी नहीं, केरल HC का पिछले आदेश पर रोक लगाने से इनकार

केरल हाई कोर्ट ने मुस्लिम स्कूलों में को-एड शुरू करने के फैसले पर रोक से इंकार किया है।

kerala high court refused to stay on judgement allowing co-ed in muslim girls schools, केरल हाई कोर्ट
फोटोः समाचार एजेंसी आईएएनएस

तिरुवनंतपुरमः केरल हाई कोर्ट ने मंगलवार (12 मई) को एकल पीठ के फैसले पर रोक लगाने से इंकार किया है। एकल पीठ द्वारा दिए गए फैसले में कोट्टायम में केवल लड़कियों के लिए बने सरकारी सहायता प्राप्त मुस्लिम स्कूलों में सह-शिक्षा (को-एड) शुरू करने की मंजूरी दी गई थी। भले ही स्थानीय प्रशासन इसके लिए समय पर मंजूरी न दे।

यह मामला एराट्टुपेट्टा स्थित मुस्लिम गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल से संबंधित है। स्कूल ने इससे पहले 2026-27 शैक्षणिक वर्ष से सहशिक्षा शुरू करने की अनुमति के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।

स्कूल शुरू करना चाहता है सह-शिक्षा

स्कूल ने राज्य सरकार के उस सर्कुलर को चुनौती दी थी जिसमें सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में सहशिक्षा शुरू करने के लिए स्थानीय स्व-शासित संस्थानों से स्वीकृति लेना अनिवार्य किया गया था। केरल की पिछली सरकार द्वारा यह सर्कुलर ऐसे स्कूलों के लिए जारी किया गया था जो सिर्फ लड़के या लड़कियों के लिए बने थे। इसका उद्देश्य ऐसे स्कूलों में लड़कों और लड़कियों की सहशिक्षा बढ़ाना था। हालांकि, इसमें एक शर्त यह भी थी कि इसके लिए पहले स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेनी होगी।

इस मामले में के.ए. मुहम्मद अशरफ हाई कोर्ट की खंडपीठ के समक्ष अपील दायर कर एकल न्यायाधीश के फैसले को चुनौती दी थी। मुहम्मद अशरफ स्कूलों में सह-शिक्षा की मुखालिफत करते हैं। हालांकि, वह एकल पीठ वाले मामले में पक्षकार नहीं थे लेकिन सरकार के सर्कुलर के खिलाफ उन्होंने रिट याचिका दायर की है।

केरल HC ने क्या कहा?

जस्टिस ए. बदरुद्दीन और जस्टिस मुरली कृष्णा एस की अवकाशकालीन पीठ ने आज (12 मई) को पहले दिए गए फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने हालांकि स्पष्ट किया कि इसके तहत की जाने वाली कोई भी कार्रवाई अपील के अंतिम निर्णय के अधीन होगी।

अदालत ने कहा कि यह न्यायालय पिछले आदेश पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं है, लेकिन WP(C) 15783/2026 में उक्त आदेश के अनुसरण में पारित कोई भी आदेश इस याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन होगा। सुनवाई की तारीख 21 मई तय की जाएगी।

गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा जारी यह सर्कुलर लड़कियों और केवल लड़कों के विद्यालयों में सहशिक्षा शुरू करने को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जारी किया गया था। हालांकि इसमें एक शर्त यह भी है कि ऐसे विद्यालयों में सहशिक्षा शुरू करने से पहले स्थानीय अधिकारियों की स्वीकृति लेना जरूरी था।

एकल पीठ ने क्या कहा?

28 अप्रैल के फैसले में जस्टिस ने एराट्टुपेट्टा नगरपालिका को अदालत के फैसले की प्रति प्राप्त होने के तीन दिनों के भीतर इस मामले में निर्णय लेने का आदेश दिया। जस्टिस जयकुमार ने सह-शिक्षा शुरू करने के लिए नगरपालिका की मंजूरी पर जोर देने के पीछे का कारण भी पूछा। उन्होंने बताया कि राज्य के सर्कुलर में ही ऐसे मामलों में स्थानीय प्राधिकरणों की भूमिका स्पष्ट नहीं की गई है और न ही ऐसी मंजूरी देने की कोई प्रक्रिया निर्धारित की गई है।

एकल न्यायाधीश के फैसले में यह स्पष्ट किया गया कि यदि स्थानीय प्राधिकरण द्वारा तीन दिनों के भीतर कोई निर्णय नहीं लिया जाता है तो स्कूल नगरपालिका की मंजूरी की प्रतीक्षा किए बिना सहशिक्षा शुरू कर सकता है।

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इस मामले में अशरफ की तरफ से के ए मंजूर अली ने पक्ष रखा। वहीं, स्कूल की तरफ से वकील सीएस अजीत प्रकाश, अंशी थंकचन और सहला फातिमा ने रखा।

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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