Home भारत ‘आग की घटना के समय मौजूद नहीं था, कोई कैश बरामद नहीं...

‘आग की घटना के समय मौजूद नहीं था, कोई कैश बरामद नहीं हुआ’, संसद की कमेटी से बोले यशवंत वर्मा

सूत्रों के अनुसार जस्टिस यशवंत वर्मा ने कहा कि जब घटना हुई, तो वह मौके पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति नहीं थे। इसलिए पुलिस और फायर डिपार्टमेंट की कथित लापरवाहियों के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

0
supreme court concern on procedural lapses in justice yashwant varma impreachment issues, जस्टिस यशवंत वर्मा
जस्टिस यशवंत वर्मा, फोटोः IANS

नई दिल्ली: ‘कैश कांड’ मामले में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा ने संसदीय कमेटी को बताया है कि आग लगने के समय वह अपने घर पर मौजूद नहीं थे। उन्होंने दावा किया कि कोई कैश बरामद नहीं हुआ। पैनल के सामने अपने जवाब में जस्टिस वर्मा ने कहा कि वह मौके पर पहुंचने वाले पहले कुछ लोगों में से नहीं थे। न्यूज-18 की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने यह भी कहा कि पहले मौके पर पहुंचने वाले लोग क्राइम सीन को सुरक्षित करने में नाकाम रहे।

इंडिया टुडे ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया है कि कमेटी को दिए अपने जवाब में जस्टिस वर्मा ने कहा कि जब घटना हुई, तो वह मौके पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति नहीं थे और इसलिए घटनास्थल पर पुलिस और फायर डिपार्टमेंट की कथित लापरवाहियों के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

गौरतलब है कि जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी बंगले में 14-15 मार्च 2025 की रात आग लग गई थी। आग बुझाने के दौरान फायर सर्विस को स्टोर रूम से जले हुए नोटों की गड्डियां मिलीं, जिनके वीडियो भी वायरल हुए। उस वक्त जस्टिस वर्मा बंगले में मौजूद नहीं थे और उनकी पत्नी ने पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। कैश मिलने के बाद विवाद बढ़ा और फिर एक हफ्ते बाद जस्टिस वर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट से इलाहाबाद हाई कोर्ट वापस भेज दिया गया था, जहां फिलहाल उन्हें कोई न्यायिक कार्य नहीं सौंपा गया है।

बाद में भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने एक इन-हाउस जांच शुरू की और तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाई थी। इसने जस्टिस वर्मा को गलत व्यवहार का दोषी पाया था। जब जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा देने से मना कर दिया, तो चीफ जस्टिस ने रिपोर्ट और जज का जवाब राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेज दिया, जिससे महाभियोग की कार्यवाही का रास्ता साफ हो सका।

इसी के बाद लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला ने 12 अगस्त को जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए कई पार्टियों के प्रस्ताव को मंजूरी दी और तीन सदस्यों वाली एक जांच समिति बनाई थी।

इसके बाद जस्टिस वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था और जांच कमेटी के गठन को चुनौती दी। जस्टिस वर्मा ने स्पीकर के एक्शन, मोशन को स्वीकार करने और जांच कमेटी द्वारा जारी किए गए सभी नोटिस को रद्द करने की मांग की है। उनका कहना है कि पूरी प्रक्रिया गैर-संवैधानिक है और ये जजेज (इन्क्वायरी) एक्ट के खिलाफ है।

सुप्रीम कोर्ट में हो चुकी है सुनवाई पूरी

जस्टिस यशवंत वर्मा को पद से हटाने के लिए संसद में चल रही कार्यवाही से जुड़ी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सुनवाई पूरी कर ली है और फैसला सुरक्षित कर लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दोनों पक्षों को लिखित जवाब दाखिल करने को कहा।

जस्टिस यशवंत वर्मा ने लोकसभा स्पीकर द्वारा बनाई गई तीन सदस्यीय कमेटी के सामने पेश होने की समय सीमा बढ़ाने की भी मांग की थी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने उनकी यह मांग ठुकरा दी थी। ऐसे में जस्टिस वर्मा को तय तारीख 12 जनवरी को ही कमेटी के सामने पेश होना पड़ा और कमेटी के सामने अपनी बात रखनी पड़ी।

जस्टिस यशवंत वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसमें उन्होंने लोकसभा स्पीकर की ओर से बनाई गई तीन सदस्यीय समिति को चुनौती दी। उनका कहना है कि जजेज इन्क्वायरी एक्ट के तहत किसी जज को हटाने की प्रक्रिया तभी आगे बढ़ सकती है जब दोनों सदन, यानी लोकसभा और राज्यसभा, प्रस्ताव को स्वीकार करें और उसके बाद एक संयुक्त समिति बनाई जाए। लेकिन इस मामले में सिर्फ लोकसभा ने प्रस्ताव पारित किया है, जबकि राज्यसभा में यह अभी लंबित है। इसलिए सिर्फ लोकसभा स्पीकर द्वारा समिति बनाना कानून के खिलाफ है।

author avatar
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...

NO COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Exit mobile version