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सोशल मीडिया सामग्री हटाने का आदेश सिर्फ संयुक्त सचिव और डीजीपी स्तर के अधिकारी ही दे सकते हैं

सोशल मीडिया सामग्री हटाने का आदेश अब सिर्फ संयुक्त सचिव और डीजीपी स्तर के अधिकारी ही दे सकेंगे। ये नियम आईटी एक्ट के बदलाव का हिस्सा हैं।

नई दिल्लीः सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गैरकानूनी कंटेंट हटाने का आदेश सिर्फ संयुक्त सचिव या पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) स्तर के वरिष्ठ अधिकारी ही दे सकेंगे। इसके अलावा ऐसे प्रत्येक निष्कासन आदेश की सचिव स्तर के अधिकारी द्वारा मासिक समीक्षा की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि कार्रवाई वैध, आवश्यक और आनुपातिक बनी रहे।

ये प्रावधान बुधवार, 22 अक्टूबर को अधिसूचित आईटी नियम, 2021 में संशोधन का हिस्सा हैं। इन संशोधित नियमों के तहत सभी निष्कासन अनुरोधों में स्पष्ट कानूनी आधार, विशिष्ट वैधानिक प्रावधान और सामग्री के यूआरएल या पहचानकर्ता जैसे विवरण शामिल होने चाहिए।

आईटी मंत्रालय ने क्या कहा?

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन नियम 2025 के माध्यम से पेश किए गए नए प्रावधानों का उद्देश्य निष्कासन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाना है।

इस बारे में पहली अधिसूचना साल 2021 में जारी की गई थी। 2022 व 2023 में संशोधन किया गया था। ये आईटी नियम मध्यस्थों के लिए ऑनलाइन सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने के दायित्व निर्धारित करते हैं। इसके नियम 3 (1)(d) के तहत उन्हें अदालती आदेश या सरकारी अधिसूचना प्राप्त होने पर गैरकानूनी जानकारी हटानी होगी।

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मंत्रालय ने इसके अलावा डीपफेक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा उत्पन्न सामग्री को विनियमित करने के लिए नए नियमों का भी प्रावधान है। मसौदा नियमों में एक नया खंड भी प्रस्तावित है जो कृत्रिम रूप से उत्पन्न जानकारी को ऐसे किसी भी सामग्री के रूप में परिभाषित करता है जिसे कृत्रिम रूप से बनाया गया हो या फिर संशोधित किया गया हो और जो प्रामाणिक लगे। ऐसी सामग्री को गैरकानूनी माना जा सकता है और हटाया जा सकता है।

क्या है इस नियम का उद्देश्य?

इस नियम को लाने का उद्देश्य डीपफेक पर अंकुश लगाने और सोशल मीडिया यूजर्स को एआई-जेनरेटेड सामग्री की पहचान में मदद करने के लिए एम्बेडेड मार्कर और लेबलिंग का प्रस्ताव दिया है।

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सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इस बदलाव से सरकार की जवाबदेही बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि जब भी ऐसा आदेश पारित होगा तो उसका कारण स्पष्ट रूप से बताया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह आदेश अब संयुक्त सचिव या डीजीपी स्तर के अधिकारी ही कर सकेंगे।

सरकार ने इसके लिए एक नोट भी साझा किया है जिसमें नियमों की जानकारी दी गई है। इस नियम को लाने का उद्देश्य नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण करना है। इसके साथ ही सरकार की वैध निगरानी और नियम लागू करने की क्षमता भी सुनिश्चित हो।

मंत्रालय ने नोट में कहा कि इससे विस्तृत और कारण सहित नोटिस देने से ऑनलाइन मंचों को कानूनी अनुपालन में मार्गदर्शन मिलेगा। नियम के मुताबिक, कानून के तहत लागू प्रतिबंधों में संतुलन और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को बनाए रखा जाएगा।

अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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