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ईरान में सड़कों पर क्यों उतरें हैं हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी? क्या है मुख्य वजह?

ईरान के विभिन्न शहरों में मुद्रा के गिरते स्तर और बढ़ती महंगाई को लेकर हजारों की संख्या में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं।

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फोटोः IANS

तेहरानः ईरान में इन दिनों सरकार के विरोध में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखे जा रहे हैं। राजधानी तेहरान से शुरू हुए प्रदर्शन देश के अलग-अलग शहरों तक पहुंच गए हैं। देश में ये विरोध प्रदर्शन बढ़ती महंगाई और मुद्रा रियाल के डॉलर के मुकाबले गिरते दाम के चलते हो रहे हैं।

बीबीसी हिंदी की खबर के मुताबिक, ईरान सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। बीते रविवार (28 दिसंबर) को दुकानदारों और बाजार व्यापारियों की हड़ताल के रूप में शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब राजनीतिक आक्रोश की अभिव्यक्ति बन गया है, जिसमें कुछ लोग “तानाशाह मुर्दाबाद!” के नारे भी लगा रहे हैं। ये स्वतःस्फूर्त विरोध प्रदर्शन तेहरान से फैलकर इस्फहान और मशहद जैसे अन्य शहरों तक पहुंच गए हैं।

मुद्रा ऐतिहासिक निचले स्तर पर

ईरानी मुद्रा रियाल की कीमत डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक रूप से निचले स्तर पर पहुंच गई। एक अमेरिकी डॉलर की कीमत वर्तमान में 14.5 करोड़ ईरानी रियाल है। एक साल पहले विनिमय दर 820,000 रियाल थी, जिसका अर्थ है कि पूर्णकालिक नौकरी करने वाले एक औसत ईरानी व्यक्ति की मासिक आय अब केवल 100 डॉलर (8985 रुपये) से थोड़ी अधिक है।

यह राशि इतनी कम है कि खाद्य सामान जैसी बुनियादी जरूरतें ही पूरी करने में पूरा वेतन लग सकता है। ऐसे में ईरान की अर्थव्यवस्था जो मुख्य रूप से आयात पर निर्भर है, ऐसी महंगाई के बाद अस्थिर सामाजिक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।

ईरान सरकार ने क्या कहा?

जर्मन वेबसाइट डॉयचे वेले ने अटलांटिक काउंसिल थिंक टैंक की मानवाधिकार वकील और ईरान विशेषज्ञ गिस्सू निया के हवाले से लिखा “दिसंबर 2017 से हो रहे विरोध प्रदर्शनों की तरह अक्सर आर्थिक संकट ही इसका उत्प्रेरक होता है। लेकिन अगर हम नारों और विरोध प्रदर्शनों की व्यापकता पर गौर करें तो यह ईरानी शासन के प्रति गहरी असंतुष्टि और उस शासन के पतन की इच्छा को दर्शाता है।”

उन्होंने आगे कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि कई ईरानी अब देश के आर्थिक पतन को एक ऐसे संकट के रूप में नहीं देखते जिसे सुधारा जा सके, बल्कि इसे वृद्ध क्रांतिकारी नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के शासन की एक प्रणालीगत विफलता के रूप में देखते हैं।

विरोध प्रदर्शनों के बीच ईरानी सरकार ने कहा कि वह विरोध प्रदर्शनों को मानती है। सरकार ने कहा कि वह विरोध की आवाजों को ‘धैर्य’ से सुनेगी। ईरान सरकार के प्रवक्ता ने 30 दिसंबर (मंगलवार) को कहा था कि सरकार विरोध प्रदर्शनों को मान्यता देती है। उन्होंने कहा था कि संविधान द्वारा मिले शांति से इकट्ठे होने के अधिकार पर भी जोर देते हैं।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने मंगलवार को एक्स पर एक पोस्ट की। इस पोस्ट का लब्बोलुआब है “लोग ऐसा ही करते हैं, मुझे हर दिन इसकी चिंता रहती है। मौद्रिक और बैंकिंग प्रणाली में सुधार और जनता की क्रय शक्ति को बनाए रखने के लिए बुनियादी उपाय आवश्यक हैं। मैंने देश के मंत्री को आदेश दिया है कि वे विरोध कर रहे प्रतिनिधियों से बातचीत करें, उनकी मांगों को सुनें और समस्याओं को हल करने और जिम्मेदारी से काम करने के लिए सरकार की सभी शक्तियों का उपयोग करें।”

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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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