अमेरिका और ईरान (US-Iran) के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा है कि जो “मूर्ख” यह सोचते हैं कि उन्होंने ईरान के प्रति पर्याप्त सख्ती नहीं बरती, वे “या तो ईर्ष्यालु हैं, बुरे लोग हैं या फिर बेवकूफ हैं।” यह उनके सहयोगी देश इजराइल के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है जहां के लोगों का एक बड़ा वर्ग मानता है कि यह MoU तेहरान के प्रति बहुत उदार है।
ऐसा माना जा रहा है कि इजराइल के लिए यह MoU एक प्रतीकात्मक और रणनीतिक हार है। उसके मुख्य सहयोगी अमेरिका ने उससे सलाह किए बिना ही उसके मुख्य दुश्मन ईरान के साथ एक समझौता कर लिया है। इस समझौते के तहत इजराइल को फटकार लगाई गई है और लेबनान में अपने ऑपरेशन रोकने का आदेश दिया गया है जबकि ईरान को प्रतिबंधों से राहत और रियायतें मिल रही हैं। ट्रंप का कहना है कि जब क्षेत्र के अन्य देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं तो तेहरान के पास इनका न होना “अनुचित” होगा।
ईरान-अमेरिका समझौते के बाद इजराइल के पास क्या हैं विकल्प?
डोनाल्ड ट्रंप के बुधवार (18 जून) को तेहरान के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करने के बावजूद इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका-ईरान के अंतिम समझौते को प्रभावित करने की कोशिशें नहीं छोड़ रहे हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियां और ट्रंप ने अब 60 दिनों की बातचीत की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक एक इजराइली अधिकारी ने बताया कि नेतन्याहू को ईरान के इरादों पर भरोसा नहीं है लेकिन उन्हें लगता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर लगी पाबंदियों को शायद ही मानेगा।
इजराइल के प्रधानमंत्री पिछले तीन दशकों से यह कहते आ रहे हैं कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के “बहुत करीब” है जबकि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) ने इन दावों को गलत साबित किया है। उन्होंने 1995 में अपनी किताब ‘फाइटिंग टेररिज्म’ में भी यही बात दोहराई थी।
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CNN की रिपोर्ट के अनुसार इजराइल के प्रधानमंत्री अब कंजर्वेटिव मीडिया हस्तियों और इजराइल-समर्थक सांसदों के जरिए वॉशिंगटन में चल रही बहस को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। इजराइल-समर्थक पॉडकास्टर मार्क लेविन ने बुधवार को कहा कि इस डील का “कोई मतलब नहीं है” और उन्होंने ईरान के पुनर्निर्माण पैकेज को “स्लश फंड” (बेहिसाब या गलत कामों के लिए इस्तेमाल होने वाला फंड) करार दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेतन्याहू वॉशिंगटन में अपने दोस्त सीनेटरों का भी सहारा ले सकते हैं। हालांकि ऐसा करना मुश्किल हो सकता है। कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने, जिन्होंने पहले ईरान पर बमबारी का समर्थन किया था। उन्होंने हाल ही में शांति समझौते का समर्थन किया है। रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम जो लंबे समय से तेहरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के लिए जाने जाते हैं, ने इस हफ्ते कहा कि ईरान के साथ हुआ समझौता “अमेरिका के लिए फायदेमंद होगा।”
लेबनान का सवाल क्यों है महत्वपूर्ण?
ईरान-अमेरिका के 14-सूत्रीय मेमोरैंडम के सबसे विवादित हिस्सों में से एक लेबनान से जुड़ा है। इस समझौते में “लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और हमेशा के लिए खत्म करने” की बात कही गई है। इसमें यह भी कहा गया है कि दोनों पक्ष लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इस दस्तावेज में कई अहम सवालों के जवाब नहीं दिए गए हैं। इजराइल इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाला पक्ष नहीं है। यह समझौता अमेरिका और ईरान के बीच है जबकि लेबनान में चल रही लड़ाई में इजराइल भी शामिल है।
इस समझौते में यह नहीं बताया गया है कि युद्धविराम कैसे लागू किया जाएगा या क्या ईरान को हेजबोल्लाह को अपना समर्थन बंद करना होगा। इस दस्तावेज में ईरान के क्षेत्रीय सहयोगियों और प्रॉक्सी समूहों के नेटवर्क का भी कोई जिक्र नहीं है।
इजराइल ने कहा – समझौते से नहीं बंधा है
CNN के रिपोर्ट के मुताबिक, एक इजराइली अधिकारी ने बताया कि नेतन्याहू ने ट्रंप से कहा कि इजराइल खुद को अमेरिका-ईरान समझौते से बंधा हुआ नहीं मानता है। खबरों के मुताबिक वॉशिंगटन के दबाव में इजराइल ने लेबनान में कुछ सैन्य गतिविधियां कम की हैं लेकिन नेतन्याहू का कहना है कि सुरक्षा चिंताएं सबसे पहले हैं।
गौरतलब है कि सोमवार (15 जून) को ट्रंप द्वारा शांति समझौते की घोषणा के बाद नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के क्षेत्रीय सहयोगियों से भी इजराइल को खतरा बना हुआ है। उन्होंने कहा कि “हमने इजराइल राज्य के चारों ओर मजबूत सुरक्षा क्षेत्र बनाए हैं। हमने ऐसा गाजा, लेबनान और सीरिया में किया है।”
इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा कि “प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और मैं एक साफ नीति पर काम कर रहे हैं जिसके तहत जिहादी तत्वों से सीमा और इजराइली समुदायों की सुरक्षा के लिए [सेना] लेबनान, सीरिया और गाजा के सुरक्षा क्षेत्रों में अनिश्चित काल तक बनी रहेगी।”



