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ईरान में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन में मरने वालों का आंकड़ा 500 के पार, ट्रंप ने दी सैन्य हस्तक्षेप की चेतावनी

ये प्रदर्शन 28 दिसंबर से शुरू हुए थे, जब देश में बढ़ती कीमतों और महंगाई को लेकर गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। हालात बिगड़ने के साथ ही ईरानी प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। सरकार ने प्रदर्शनों के लिए अमेरिका और इजराइल को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया है कि वे देश में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

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ईरान में बढ़ती महंगाई को लेकर सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की सरकार के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन जारी है। प्रदर्शन धीरे-धीरे उग्र होता जा रहा है। अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन एचआरएनए के मुताबिक, बीते दो हफ्तों में इन प्रदर्शनों के दौरान मरने वालों की संख्या 500 के पार पहुंच गई है। इसमें कम से कम 490 प्रदर्शनकारी और 48 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। रॉयटर्स से बात करने वाले ईरान के भीतर और बाहर के कार्यकर्ताओं का दावा है कि मृतकों की संख्या 538 तक हो सकती है। इस दौरान 10,600 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

ये प्रदर्शन 28 दिसंबर से शुरू हुए थे, जब देश में बढ़ती कीमतों और महंगाई को लेकर गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। हालात बिगड़ने के साथ ही ईरानी प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। सरकार ने प्रदर्शनों के लिए अमेरिका और इजराइल को जिम्मेदार ठहराते हुए आरोप लगाया है कि वे देश में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। सरकारी मीडिया के अनुसार, अधिकारियों ने इन प्रदर्शनों को आतंकी कार्रवाइयों से जोड़ा है और पिछले साल इजराइल के साथ हुए 12 दिनों के संघर्ष का भी जिक्र किया है। इसके जवाब में सरकार ने अमेरिका और इजराइल के कथित प्रभाव के खिलाफ समर्थन जुटाने के लिए काउंटर-प्रोटेस्ट का आह्वान भी किया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दी चेतावनी

इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने तनाव और बढ़ा दिया है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान की स्थिति पर अमेरिका गंभीरता से विचार कर रहा है और सैन्य विकल्पों पर भी चर्चा चल रही है। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि कुछ लोग, जिन्हें नहीं मारा जाना चाहिए था, मारे गए हैं और अमेरिकी सेना इस पूरे घटनाक्रम को बेहद गंभीरता से देख रही है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान ने अमेरिका से संपर्क कर बातचीत की इच्छा जताई है और एक बैठक की तैयारी की जा रही है, हालांकि उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि जरूरत पड़ी तो बातचीत से पहले कार्रवाई की जा सकती है।

न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप को ईरान के खिलाफ नए सैन्य विकल्पों पर ब्रीफिंग दी गई है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रपति ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन अगर ईरानी प्रशासन ने दमन और तेज किया तो सीमित सैन्य कार्रवाई, खासकर सुरक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़े ठिकानों पर लक्षित हमलों, पर विचार किया जा रहा है।

ईरान के भीतर हालात के साथ-साथ विरोध की गूंज दुनिया भर में भी सुनाई दे रही है। जर्मनी से लेकर अमेरिका तक कई देशों में लोगों ने सड़कों पर उतरकर ईरानी जनता के समर्थन में प्रदर्शन किए और सरकार पर असहमति की आवाज दबाने का आरोप लगाया। लॉस एंजिलिस में ऐसा ही एक प्रदर्शन उस वक्त तनावपूर्ण हो गया, जब एक यू-हॉल ट्रक भीड़ के बीच तेज रफ्तार से घुसने की कोशिश करता दिखा। पुलिस ने ट्रक को कुछ ही दूरी पर घेर लिया, जिसके बाद गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने ड्राइवर पर हमला करने की कोशिश की।

इसी बीच ईरान के निर्वासित शहजादे और अपदस्थ शाह रजा पहलवी के बेटे रजा पहलवी ने सुरक्षा बलों से जनता के साथ खड़े होने की अपील की है। सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा कि सरकारी संस्थानों और सशस्त्र बलों के कर्मचारियों के सामने दो ही रास्ते हैं, या तो वे जनता के साथ खड़े होकर देश के सहयोगी बनें या फिर लोगों के हत्यारों के साथ खड़े होने का विकल्प चुनें। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सरकार प्रदर्शनों को दबाने के लिए बड़े पैमाने पर हिंसा का सहारा ले रही है, जिससे हालात और विस्फोटक होते जा रहे हैं।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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