नई दिल्ली: भारत ने शनिवार को इस बात की पुष्टि कर दी कि उसने वियतनाम को ब्रह्मोस मिसाइलों की आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। वहीं, इंडोनेशिया के साथ इसी तरह का एक समझौता अंतिम चरण में है।
सिंगापुर में आयोजित शांग्री-ला डायलॉग के दौरान पत्रकारों से बातचीत में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा, ‘मेरी समझ के अनुसार इंडोनेशिया और वियतनाम दोनों के साथ समझौते अंतिम चरण में हैं। वास्तव में, वियतनाम के मामले में मेरी जानकारी है कि समझौते पर पहले ही हस्ताक्षर हो चुके हैं। संभवतः इसकी सार्वजनिक घोषणा अभी नहीं की गई है, लेकिन समझौता संपन्न हो चुका है।’
उन्होंने संकेत दिया कि इंडोनेशिया के साथ भी ब्रह्मोस मिसाइल सौदे को जल्द अंतिम रूप दिया जा सकता है। सिंह ने इस बात का विशेष तौर पर जिक्र किया कि वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देश भारत के मित्र देशों की श्रेणी में आते हैं, जिनके साथ भारत उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकी साझा करने में खुशी महसूस करता है।
उन्होंने कहा, ‘भारत की आसियान (ASEAN) देशों के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता है और हम सभी सदस्य देशों को मित्र राष्ट्र मानते हैं। ऐसे देशों के साथ हम उन्नत रक्षा तकनीकों को साझा करने के लिए तैयार हैं।’
सिंह ने यह भी संकेत दिया कि भारत अपनी रक्षा साझेदारियों को मजबूत करने और क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए आसियान देशों के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और विस्तार देने का इच्छुक है।
ब्रह्मोस और भारत की कूटनीति
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने इस्तेमाल और निर्यात के लिए घरेलू रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा दे रहा है। इसी क्रम में भारत ने फिलीपींस के साथ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की बिक्री के लिए एक समझौता किया है। खबरों के अनुसार, वियतनामी राष्ट्रपति तो लाम ने इस महीने की शुरुआत में अपनी तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान ब्रह्मोस मिसाइलों की खरीद पर चर्चा की थी। इन कदमों को भारत की एक्ट ईस्ट नीति और दक्षिण पूर्व एशिया में चीन के प्रभाव से निपटने से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। दक्षिण चीन सागर में क्षेत्रीय दावों के टकराव के कारण तीनों देशों के चीन के साथ तनावपूर्ण संबंध हैं।
लाम की यात्रा के दौरान, भारत और वियतनाम ने मिसाइलों की खरीद के लिए संभावित 70 करोड़ डॉलर के सौदे पर बातचीत को आगे बढ़ाया। विदेश मंत्रालय ने उस समय कहा था, ‘हम (भारत और वियतनाम) कई प्लेटफार्मों पर चर्चा करते हैं, और ब्रह्मोस प्लेटफार्म भी उनमें से एक है।’
मार्च में, इंडोनेशिया ने भारत के साथ 200 मिलियन डॉलर से 350 मिलियन डॉलर के सौदे पर ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली की खरीद के लिए बातचीत शुरू की थी। इस संभावित सौदे से कई भारतीय रक्षा कंपनियों को लाभ हो सकता है जो मिसाइल कार्यक्रम के लिए पुर्जे और अन्य प्रणालियों की आपूर्ति करती हैं।
यदि यह समझौता अंतिम रूप ले लेता है, तो इंडोनेशिया ऐसे में फिलीपींस के बाद ब्रह्मोस मिसाइल का दूसरा अंतरराष्ट्रीय ग्राहक बन जाएगा। हालांकि, समझौते की राशि और खरीदी जाने वाली मिसाइल प्रणालियों की संख्या का अभी खुलासा नहीं हुआ है।
ब्रह्मोस के बारे में जानिए
ब्रह्मोस भारत का एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे दुनिया की सबसे तेज और सबसे उन्नत मिसाइलों में से एक माना जाता है। यह भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और रूस की NPO मशीनोस्ट्रोयेनिया का संयुक्त उद्यम है, जिसका गठन ब्रह्मोस एयरोस्पेस के रूप में हुआ है। इसका नाम दो नदियों – ब्रह्मपुत्र (भारत) और मोस्कवा (रूस) – के नाम से लिया गया है।
यह मैक 2.8 से 3.0 (ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना) की गति से चलती है, जिससे मौजूदा वायु रक्षा प्रणालियों के लिए इसे रोकना लगभग असंभव हो जाता है। इसकी मूल मारक क्षमता 290 किमी है, जबकि विस्तारित मारक क्षमता (ईआर) 450 किमी से 800 किमी तक है। यह रडार से बचने के लिए समुद्र की सतह से 3-10 मीटर की कम ऊंचाई पर या 15 किमी तक की ऊंचाई पर भी उड़ान भर सकती है।
यह भी पढ़ें- 9 संदिग्ध गिरफ्तार, पाकिस्तान के ISI से कनेक्शन…दिल्ली-मुंबई में आतंकी हमले की थी साजिश



