लोगों को नशे और खासकर युवा पीढ़ी को नशे की लत से बचाने के लिए एक साथ आगे बढ़ते हुए हाथ मिलाना चाहिए। महिलाओं और युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है और उनके योगदान पर जितना जोर दिया जाए, कम है। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को एक नशा-विरोधी रैली में यह बात कही। यह रैली केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के दक्षिण कश्मीर जिले अनंतनाग में आयोजित की गई थी।
यह वॉकाथॉन जम्मू से 11 अप्रैल से शुरू किए गए 100-दिवसीय ‘ड्रग-फ्री जम्मू एंड कश्मीर – नशामुक्त अभियान’ के तहत आयोजित किया गया था। इसमें छात्रों, व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों, नागरिक समाज समूहों, स्वयंसेवी संगठनों, धार्मिक समूहों, जनजातीय प्रतिनिधियों, शिक्षकों और सरकारी अधिकारियों ने भारी संख्या में भाग लिया।
एलजी इस अभियान में बहुत सक्रिय रहे हैं और आगे बढ़कर नेतृत्व कर रहे हैं। एक जिले से दूसरे जिले तक जा रहे हैं। वे जम्मू संभाग के कई जिलों जैसे जम्मू, कठुआ, सांबा, उधमपुर और डोडा का दौरा पहले ही कर चुके हैं। कश्मीर संभाग में इससे पहले इसी तरह की एक रैली बडगाम में आयोजित की गई थी।
इसमें हिस्सा लेने वाले शहीद मुजम्मिल मेमोरियल गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज (Boys), खानाबल में एकत्र हुए, जहां से पदयात्रा शुरू हुई और फिर खानाबल-पहलगाम (केपी) चौक की ओर बढ़ी। इस दौरान नशा-विरोधी नारे लगाए गए और ‘नो टू ड्रग्स, सेव लाइफ’ जैसे संदेश वाले पोस्टर हाथों में थे। पिछले कुछ वर्षों में श्रीनगर के लिए वैकल्पिक सड़क बनने के बाद खानाबल में लोगों की आवाजाही कम हुई है।
‘सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी से मिलेगी मदद’
सभा को संबोधित करते हुए एलजी सिन्हा ने कहा कि नशे की लत से केवल सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी और जनभागीदारी के माध्यम से ही निपटा जा सकता है।
उन्होंने कहा, ‘नशे की लत की चुनौती को केवल पूरे समाज के दृष्टिकोण से ही समाप्त किया जा सकता है। स्कूलों, कॉलेजों, परिवारों, खेल मैदानों, गांवों और वार्डों को दृढ़ संकल्प के साथ नशे के खिलाफ एकजुट आवाज उठानी होगी।’ उन्होंने कहा कि जागरूकता फैलाने और नशे से प्रभावित लोगों के पुनर्वास में शिक्षकों, अभिभावकों, धार्मिक नेताओं और युवा समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने नशीले पदार्थों के व्यापार को आतंकवाद से भी जोड़ा और आरोप लगाया कि हमारा पड़ोसी देश (स्पष्ट रूप से पाकिस्तान की ओर इशारा) जम्मू-कश्मीर में ड्रग्स भेजकर क्षेत्र को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है। एलजी सिन्हा ने कहा, ‘ड्रग्स का पैसा आतंकवाद और कट्टरपंथ को वित्तपोषित कर रहा है। एक तरफ ड्रग्स हमारे युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं और दूसरी तरफ आतंकी संगठन इसी पैसे से हथियार खरीद रहे हैं, जिनसे निर्दोष लोगों का खून बहाया जा रहा है।’
श्री सिन्हा ने कहा, “नशे की लत की चुनौती को केवल ‘पूरे समाज के दृष्टिकोण’ से ही खत्म किया जा सकता है। अब से जम्मू-कश्मीर का हर कोना, चाहे वह स्कूल हो, कॉलेज, परिवार, खेल मैदान, वार्ड, गांव या रंगमंच- सबको दृढ़ संकल्प के साथ इस उद्देश्य के लिए आवाज उठानी चाहिए।’

ड्रग्स के खिलाफ इस लड़ाई में प्रशासन और समाज दोनों को ड्रग्स और आतंकवाद के बीच संबंध को समझना होगा और सभी को मिलकर इसे हराना होगा। एलजी ने कहा, ‘हमारा पड़ोसी देश योजनाबद्ध तरीके से जम्मू-कश्मीर में ड्रग्स की तस्करी कर रहा है। ड्रग्स के पैसों से तस्करों ने आलीशान नार्को-महल बनाए हैं और इसी पैसे का बड़ा हिस्सा आतंकवाद और कट्टरपंथ फैलाने में इस्तेमाल हो रहा है। इस नार्को-टेरर नेटवर्क ने दशकों से जम्मू-कश्मीर की पीढ़ियों को पीड़ा दी है। इसलिए मैं हमेशा कहता हूं कि नशे की लत और आतंकवाद अलग-अलग चुनौतियां नहीं हैं, बल्कि एक ही समस्या के दो चेहरे हैं। और मैं आप सभी से वादा करता हूं कि जब तक हम इसे हरा नहीं देंगे, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे।’
उन्होंने पुलिस और नागरिक प्रशासन से अपील की कि वे अनंतनाग की हर पंचायत तक पहुंचें और अभियान के अगले दिनों में जिले के संवेदनशील इलाकों तक विशेष रूप से जाएं। उन्होंने कहा, ‘अनंतनाग जिले में ड्रग तस्करों के नेटवर्क पर निर्णायक प्रहार किया जा रहा है। 11 अप्रैल से अब तक यहां सबसे अधिक 108 एनडीपीएस मामले दर्ज किए गए हैं। ड्रग्स के काले धन से बने 3.5 करोड़ रुपये के नार्को-महल ध्वस्त कर दिए गए हैं। 22 वाहन जब्त किए गए हैं, आठ ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन पंजीकरण रद्द किए गए हैं। कानून का उल्लंघन करने पर 13 मेडिकल स्टोर सील किए गए हैं। मैं अनंतनाग के लोगों को आश्वस्त करता हूं कि एक भी तस्कर नहीं बचेगा और ड्रग तस्करी से जुड़ा पूरा तंत्र जड़ से उखाड़ दिया जाएगा।’
कई जगहों पर इमारतों को गिराए जाने की कार्रवाई के कारण पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती और एनसी मंत्री साकीना इटू जैसे राजनीतिक नेताओं ने प्रशासन की आलोचना की है। अप्रत्यक्ष रूप से उनके निशाने पर एलजी सिन्हा हैं क्योंकि यह अभियान उनके निर्देशों पर चलाया जा रहा है। महबूबा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया, जबकि वह अच्छी तरह जानती हैं कि जिला प्रशासन और पुलिस मुख्यमंत्री के अधीन नहीं आते।
उन्होंने कहा, ‘मैं खिलाड़ियों, शिक्षकों और सभी धार्मिक नेताओं से अपील करता हूं कि वे इस उद्देश्य के लिए खुद को समर्पित करें और जम्मू-कश्मीर को नशामुक्त बनाने की शपथ लें। धार्मिक नेताओं को युवाओं को आध्यात्मिक और नैतिक मार्गदर्शन देना चाहिए और उन्हें ड्रग्स के खतरों के बारे में चेतावनी देनी चाहिए। मुझे पूरा विश्वास है कि जब लोग किसी उद्देश्य के लिए खड़े होते हैं तो उनकी ताकत हजार गुना बढ़ जाती है।’
आतंक के पीड़ितों को भी मिलेगा न्याय: एलजी सिन्हा
एलजी सिन्हा ने आतंकवाद पीड़ित हर परिवार को न्याय दिलाने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने कहा कि ये खेल सुविधाएं युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा देंगी और अनुशासन तथा खेल भावना को मजबूत करेंगी। एलजी ने युवा आइकनों को सम्मानित भी किया और युवाओं को खेल किट वितरित किए।
नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी), कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के कई नेता और विधायक- जिनमें अल्ताफ अहमद कालू, अब्दुल मजीद लारमी, रियाज अहमद खान, गुलाम अहमद मीर, शाहीना नदाफ, मोहम्मद अमीन भट, सोफी यूसुफ और रफीक वानी शामिल थे, ये सभी इस मार्च में शामिल हुए।
एक छात्र ने कहा, ‘यह समस्या समाज के हर परिवार को प्रभावित कर रही है। युवा पीढ़ी को बचाने के लिए सभी को योगदान देना होगा।’
रैली में शामिल जनजातीय प्रतिनिधि फारूक अहमद ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों के लोग भी युवाओं में बढ़ते नशे को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा, ‘इस अभियान ने लोगों में जागरूकता पैदा की है और जनजातीय समुदाय ड्रग्स के खिलाफ हर पहल का समर्थन करने के लिए तैयार हैं।’
कलाकारों ने पारंपरिक नुक्कड़ नाटक, बांड पाथर और माइम शो के माध्यम से नशामुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान के तहत नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता फैलाई और युवाओं को स्वस्थ रहने तथा नशामुक्त समाज बनाने के लिए प्रेरित किया। अनंतनाग के डीसी बिलाल मोहिउद्दीन भट ने बड़ी संख्या में भाग लेने के लिए लोगों का धन्यवाद किया और कहा कि यह प्रतिक्रिया नशे के खिलाफ सामूहिक संकल्प को दर्शाती है।
उन्होंने कहा, ‘यह अभियान जिले के गांवों और पंचायतों तक पहुंच चुका है। आज की भागीदारी दिखाती है कि लोग इस समस्या से मिलकर लड़ना चाहते हैं।’

