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तमिलनाडु पर 10 लाख करोड़ का बोझ!, वादों को पूरा करने में विजय को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा?

2021 में डीएमके सरकार के सत्ता में आने के तीन महीने बाद तत्कालीन वित्त मंत्री पी. थियागा राजन ने भी एक श्वेत पत्र जारी कर तमिलनाडु की आर्थिक स्थिति को बेहद गंभीर बताया था। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि शासन की संरचनात्मक खामियों के कारण राज्य के पास कोई वित्तीय बफर नहीं बचा है।

सी जोसेफ विजय ने तमिलनाडु की राजनीति की पटकथा बदल दी है। राज्य में 60 साल में पहली बार द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) से इतर किसी दल की सरकार बनी। इस सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती चुनावी मंचों पर किए गए बड़े-बड़े वादों को जमीन पर उतारने की है।

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही विजय ने हर घर 200 यूनिट मुफ्त बिजली समेत तीन बड़े आदेश जारी किए। साथ ही राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर गंभीर तस्वीर पेश करते हुए दावा किया कि तमिलनाडु करीब 10 लाख करोड़ रुपये के कर्ज तले दबा हुआ है और पिछली डीएमके सरकार राज्य को ‘बेहद खराब वित्तीय हालत’ में छोड़कर गई है। उन्होंने जल्द ही राज्य की वित्तीय स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करने का ऐलान भी किया।

दिलचस्प बात है कि 2021 में डीएमके सरकार के सत्ता में आने के तीन महीने बाद तत्कालीन वित्त मंत्री पी. थियागा राजन ने भी एक श्वेत पत्र जारी कर तमिलनाडु की आर्थिक स्थिति को बेहद गंभीर बताया था। उस रिपोर्ट में कहा गया था कि शासन की संरचनात्मक खामियों के कारण राज्य के पास कोई वित्तीय बफर नहीं बचा है।

स्टालिन ने विजय के आरोपों को खारिज किया

पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने विजय के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य का खजाना खाली होने का दावा गलत है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो नेता चुनाव से पहले सिर्फ व्यावहारिक वादों की बात करते थे, उन्हें अब प्रशासन चलाने की वास्तविक चुनौतियों का एहसास होगा। डीएमके प्रवक्ता सेलम धरणीधरन ने भी यही कहा कि तमिलनाडु के कर्ज के आंकड़े कभी छिपे नहीं रहे। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य की आर्थिक स्थिति को केवल कुल कर्ज से नहीं, बल्कि उसकी अर्थव्यवस्था के आकार और कर्ज-जीएसडीपी अनुपात (Debt-to-GSDP Ratio) से समझा जाना चाहिए।

हर घर 200 यूनिट मुफ्त बिजली की बात करें तो ऊर्जा विभाग के मुताबिक, इस योजना पर सालाना करीब 1,730 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि पहले से भारी कर्ज के बोझ से जूझ रहे तमिलनाडु में विजय सरकार अपने महंगे चुनावी वादों को कैसे पूरा करेगी। विजय ने क्या वादे किए हैं, यहां देखें

श्रेणीयोजना / वादाविवरण
महिला सशक्तिकरणमधिप्पुमिगु मगलिर थिट्टमघर की महिला मुखिया को ₹2,500 प्रति माह का भत्ता।
अन्नपूर्णी सुपर सिक्सहर परिवार को साल में 6 मुफ्त एलपीजी सिलेंडर।
मातृत्व सहायतानवजात बच्चों की मां को सोने की अंगूठी और बेबी किट।
विवाह सहायतागरीब दुल्हनों को 8 ग्राम सोना (1 सॉवरेन) और रेशमी साड़ी।
शिक्षा और छात्रशिक्षा ऋण माफी/सहायता12वीं से पीएचडी तक के छात्रों को ₹20 लाख तक का बिना गारंटी ऋण।
छात्र प्रोत्साहनछात्राओं की माताओं को स्कूल न छोड़ने के लिए ₹15,000 सालाना।
डिजिटल शिक्षाराज्य में AI मंत्रालय, AI यूनिवर्सिटी और AI सिटी की स्थापना।
युवा और रोजगारबेरोजगारी भत्तास्नातक (Graduates) को ₹4,000 और डिप्लोमा धारकों को ₹2,500 मासिक।
सरकारी नौकरी5 लाख नई सरकारी नियुक्तियां और पारदर्शी भर्ती कैलेंडर।
पुलिस कल्याणपुलिसकर्मियों का न्यूनतम वेतन ₹25,000 करना और भत्ते बढ़ाना।
कृषि और किसानऋण माफी5 एकड़ से कम वाले किसानों का सहकारी फसल ऋण पूर्ण माफ।
एमएसपी (MSP)धान के लिए ₹3,500/क्विंटल और गन्ने के लिए ₹4,500/टन की गारंटी।
लोक कल्याणमुफ्त बिजलीघरेलू उपभोक्ताओं के लिए 200 यूनिट मुफ्त बिजली।
स्वास्थ्य बीमाप्रति परिवार ₹25 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा कवर।
पेंशनबुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए ₹3,000 मासिक पेंशन।
प्रशासन/सुरक्षास्पेशल टास्क फोर्सड्रग्स के खिलाफ और महिलाओं की सुरक्षा (सिंगापेन) के लिए विशेष बल।

तमिलनाडु कर्ज के बोझ तले दबा है?

भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2025 के अंत तक तमिलनाडु की कुल देनदारियां 9.56 लाख करोड़ रुपये थीं, जो देश में सबसे ज्यादा हैं। लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू यह है कि तमिलनाडु देश की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में भी शामिल है। राज्य ने पिछले दो वित्त वर्षों में 10 प्रतिशत से अधिक की वास्तविक आर्थिक वृद्धि दर्ज की है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले राज्य अधिक कर्ज उठा सकते हैं, क्योंकि उनकी भुगतान क्षमता मजबूत होती है।

यही वजह है कि कुल कर्ज के आंकड़े को अकेले देखकर निष्कर्ष निकालना सही नहीं माना जाता। तमिलनाडु का कर्ज-जीएसडीपी अनुपात वित्त वर्ष 2025 में करीब 30.6 प्रतिशत रहा, जो कोविड के बाद लगातार नीचे आया है। कई बड़े राज्यों की तुलना में यह स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर मानी जाती है।

अगर तुलना करें तो उत्तर प्रदेश पर करीब 8.16 लाख करोड़ रुपये, राजस्थान पर 6.30 लाख करोड़, मध्य प्रदेश पर 4.10 लाख करोड़ और बिहार पर 3.15 लाख करोड़ का कर्ज है। लेकिन इन राज्यों का कर्ज-जीएसडीपी अनुपात तमिलनाडु से ज्यादा है। बिहार में यह करीब 38 प्रतिशत, राजस्थान में 37 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 32.5 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में लगभग 29.5 प्रतिशत है।

प्रति व्यक्ति कर्ज के आंकड़े भी दिलचस्प तस्वीर पेश करते हैं। तमिलनाडु में प्रति व्यक्ति कर्ज करीब 1.35 लाख रुपये है, जबकि राजस्थान में यह करीब 76 हजार रुपये, मध्य प्रदेश में 48 हजार रुपये, उत्तर प्रदेश में 34 हजार रुपये और बिहार में लगभग 24 हजार रुपये है।

पहली नजर में तमिलनाडु का प्रति व्यक्ति कर्ज ज्यादा दिखता है, लेकिन इसकी वजह राज्य की ऊंची आय और मजबूत औद्योगिक अर्थव्यवस्था है। तमिलनाडु की प्रति व्यक्ति आय करीब 3.15 लाख रुपये है, जो इन राज्यों से काफी अधिक है। आसान शब्दों में कहें तो तमिलनाडु का 10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज उस व्यक्ति के बड़े होम लोन जैसा है जिसकी आय भी बहुत ज्यादा है, जबकि कम आय वाले राज्य पर अपेक्षाकृत छोटा कर्ज भी ज्यादा दबाव पैदा कर सकता है।

तमिलनाडु के राजस्व का बड़ा हिस्सा कहां खर्च होता है?

राज्य के राजस्व का बड़ा हिस्सा हर साल वेतन, पेंशन और पुराने कर्ज पर ब्याज चुकाने में चला जाता है। पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में तमिलनाडु अपने कुल राजस्व का 62 प्रतिशत सिर्फ इन मदों पर खर्च करने वाला है। इसका सीधा असर यह होता है कि विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों के लिए संसाधन सीमित हो जाते हैं।

ऐसे में विजय के चुनावी वादे राज्य की वित्तीय चुनौती को और कठिन बना सकते हैं। आर्थिक जानकारों का अनुमान है कि अगर इन सभी योजनाओं को लागू किया गया तो तमिलनाडु का वार्षिक कल्याणकारी खर्च करीब 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यह पिछली डीएमके सरकार के 65,000 करोड़ रुपये के कल्याणकारी खर्च से लगभग 52 प्रतिशत अधिक होगा। अगर यह अतिरिक्त खर्च नए राजस्व स्रोतों के बिना किया गया तो राज्य का राजकोषीय घाटा और बढ़ सकता है।

विजय सरकार के सामने एक और बड़ी चुनौती तमिलनाडु की तेजी से बूढ़ी होती आबादी है। रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक 2026 तक राज्य की 15 प्रतिशत से ज्यादा आबादी 60 वर्ष से ऊपर होगी। इसका मतलब है कि आने वाले वर्षों में पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर सरकारी खर्च और बढ़ेगा। ऐसे में वित्तीय अनुशासन बनाए रखना और भी जरूरी हो जाएगा।

फिलहाल टीवीके ने इन वादों को पूरा करने के लिए कोई स्पष्ट रोडमैप पेश नहीं किया है। पार्टी का कहना है कि वह बिना नया टैक्स लगाए राजस्व बढ़ाएगी, खर्चों को नियंत्रित करेगी और आय के नए स्रोत विकसित करेगी। लेकिन इन दावों को जमीन पर उतारना आसान नहीं होगा।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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