स्पेन ने रविवार को खेले गए फीफा वर्ल्ड कप-2026 के फाइनल में अर्जेंटीना को हराते हुए अपना दूसरा वर्ल्ड कप खिताब जीता। इस जीत के साथ उसे न सिर्फ विश्व चैंपियन बनने का गौरव मिला, बल्कि फीफा वर्ल्ड कप इतिहास की सबसे बड़ी इनामी राशि, ट्रॉफी के साथ-साथ पहली बार चैम्पियनशिप रिंग हासिल करने का भी मौका मिला।
दरअसल, फीफा वर्ल्ड कप-2026 कई मायनों में पहले के टूर्नामेंट से अलग रहा। इस विश्व कप में पहली बार सबसे ज्यादा 48 टीमें और ज्यादा मैच खेले गए। इसके अलावा पहली बार फाइनल में हाफ-टाइम शो का आयोजन भी किया गया, जिसमें जस्टिन बीबर, मैडोना, शकीरा, ब्रूना बॉय और बीटीएस जैसे अंतरराष्ट्रीय कलाकारों ने प्रस्तुति दी।
फाइनल मुकाबले में सभी की निगाहें लियोनेल मेसी की अर्जेंटीना और लामिन लामाल वाली स्पेनिश टीम पर थीं। अतिरिक्त समय में आखिरकार फेरान टोरेस के नाटकीय गोल की बदौलत स्पेन ने 1-0 से जीत दर्ज कर ली। स्पेन का यह दूसरा विश्व कप खिताब है। इससे पहले इस टीम ने 2010 में वर्ल्ड कप जीता था।
वर्ल्ड चैम्पियन स्पेन को मिली रिकॉर्ड इनामी राशि
स्पेन को विश्व कप जीतने पर 5 करोड़ डॉलर (करीब 482 करोड़ रुपये) की पुरस्कार राशि मिली। यह कतर में खेले गए पिछले विश्व कप की तुलना में 80 लाख डॉलर (करीब 77 करोड़ रुपये) अधिक है।
उपविजेता अर्जेंटीना को 3.3 करोड़ डॉलर (करीब 318 करोड़ रुपये) मिले। तीसरे स्थान पर रही इंग्लैंड को 2.9 करोड़ डॉलर (करीब 280 करोड़ रुपये), जबकि चौथे स्थान पर रहने वाली टीम को 2.7 करोड़ डॉलर (करीब 260 करोड़ रुपये) की राशि दी गई। इसके अलावा क्वार्टर फाइनल में हारने वाली मोरक्को, बेल्जियम, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड की टीमों को भी 1.9 करोड़ डॉलर (करीब 183 करोड़ रुपये) का पुरस्कार मिला।
इसके अलावा 9वें से 16वें स्थान तक रहने वाली टीमों को 1.5 करोड़ डॉलर (145 करोड़ रुपये) मिले। जबकि 17वें से 32वें स्थान तक रहने वाली टीमों को 1.1 करोड़ डॉलर (106 करोड़ रुपये) दिए गए। 33वें से 48वें स्थान तक की प्रत्येक टीम को भी 90 लाख डॉलर (86 करोड़ रुपये) मिले।
खिलाड़ियों को सीधे नहीं मिलती पूरी इनामी राशि
फीफा की ओर से दी जाने वाली पुरस्कार राशि सीधे खिलाड़ियों को नहीं मिलती। यह संबंधित देश के फुटबॉल संघ या शासी निकाय को सौंपी जाती है। इसके बाद यह फैसला उसी संघ के हाथ में होता है कि यह राशि खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ और सपोर्ट स्टाफ के बीच कैसे बांटी जाए। अधिकांश देशों में इनामी राशि का एक हिस्सा खिलाड़ियों और स्टाफ को दिया जाता है, जबकि बची हुई रकम फुटबॉल के विकास से जुड़ी योजनाओं और कार्यक्रमों में निवेश की जाती है।
वैसे, इस बार पुरस्कार राशि बढ़ाने के पीछे विभिन्न फुटबॉल महासंघों की मांग भी एक अहम कारण रही। खासकर यूरोपीय महासंघों ने फीफा से कहा था कि पिछले साल तय किया गया पुरस्कार ढांचा और तैयारी खर्च उनकी आर्थिक जरूरतों के अनुरूप नहीं है। उनका कहना था कि यदि उनकी टीम नॉकआउट चरण में आगे तक नहीं पहुंचती, तो उन्हें टूर्नामेंट से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
फ्रांस फुटबॉल महासंघ के अध्यक्ष फिलिप डायलो ने कहा था कि उन्होंने फीफा को बताया था कि राष्ट्रीय टीमों को उतना आर्थिक लाभ नहीं मिल रहा, जितना एक साल पहले क्लब विश्व कप जीतने वाली चेल्सी को मिला था।
विश्व कप ट्रॉफी की खासियत
करोड़ों डॉलर की पुरस्कार राशि के अलावा स्पेन को विश्व कप की गोल्डन ट्रॉफी भी मिली। इस विश्व कप ट्रॉफी का डिजाइन पुराने संस्करण से अलग है। यह ट्रॉफी 36 सेंटीमीटर ऊंची है और 18 कैरेट सोने से बनी है। लंदन स्टॉक एक्सचेंज ग्रुप के अनुसार, इसमें इस्तेमाल सोने की मौजूदा कीमत लगभग 7.13 लाख डॉलर (6.87 करोड़) है, जबकि कतर विश्व कप के समय इसकी कीमत करीब 2.77 लाख डॉलर थी।
हालांकि ट्रॉफी का वास्तविक महत्व केवल सोने की कीमत से नहीं आंका जाता। इसके प्रतीकात्मक महत्व को देखते हुए इसकी कुल अनुमानित कीमत करीब 2 करोड़ डॉलर मानी जा रही है। वैसे, विश्व कप जीतने के बावजूद स्पेन इस मूल ट्रॉफी को अपने पास नहीं रख सकता। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पेन को ट्रॉफी सौंपी, जिसके साथ टीम ने जीत का जश्न मनाया। इसके बाद टीम को स्थायी रूप से रखने के लिए गोल्ड-प्लेटेड प्रतिकृति दी जाती है।
इसके अलावा स्पेन के खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ को स्वर्ण पदक, उपविजेता अर्जेंटीना को रजत पदक और तीसरे स्थान पर रही इंग्लैंड को कांस्य पदक दिए गए। पहले 1978 तक केवल फाइनल खेलने वाले शुरुआती 11 खिलाड़ियों को ही पदक दिए जाते थे। बाद में 2007 में फीफा ने इसमें बदलाव किया।
पहली बार मिली चैम्पियनशिप रिंग
इस विश्व कप में पहली बार विजेता टीम को चैम्पियनशिप रिंग भी दी गई। यह परंपरा अमेरिका से ली गई है, जो इस विश्व कप की मेजबान देशों में शामिल था। फीफा के अनुसार, विश्व कप की आकृति वाली इन रिंग्स को विजेता टीम की पहचान के अनुरूप विशेष रूप से तैयार किया गया है।
इन रिंग्स की सटीक कीमत का खुलासा फीफा ने नहीं किया है। जारी तस्वीरों से संकेत मिलता है कि इन्हें पीले सोने से बनाया गया है, जिसमें 14 से 18 कैरेट तक का सोना इस्तेमाल हो सकता है। तस्वीरों में कई कीमती रत्न भी जड़े दिखाई देते हैं, जिससे इनकी कीमत और बढ़ जाती है। कुछ मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एक रिंग की अनुमानित कीमत करीब 1.5 लाख डॉलर (1.45 करोड़) तक हो सकती है।



