Homeभारतफतेहपुर में धर्मांतरण के आरोप में 60 वर्षीय पादरी समेत 3 गिरफ्तार,...

फतेहपुर में धर्मांतरण के आरोप में 60 वर्षीय पादरी समेत 3 गिरफ्तार, बजरंग दल का प्रदर्शन

राधानगर थाना प्रभारी विनोद कुमार मौर्य के अनुसार, स्थानीय निवासी देव प्रकाश पासवान की शिकायत पर पादरी, उनके बेटे और सात अज्ञात लोगों के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

फतेहपुर जिले के राधानगर में रविवार को धर्मांतरण के आरोप में एक चर्च के 60 वर्षीय पादरी और उसके बेटे समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरफ्तारी चर्च के बाहर बजरंग दल के घंटनों प्रदर्शन के बाद की गई। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, दोनों पर हिंदू महिलाओं को पैसे, नौकरी और बच्चों की मुफ्त शिक्षा का लालच देकर जबरन धर्मांतरण कराने का आरोप लगाया गया है।

प्रदर्शन के दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने उस पुलिस वाहन को भी कुछ देर घेरे रहे, जिसमें पादरी डेविड ग्लैडियन और उनके 30 वर्षीय बेटे अभिषेक ग्लैडियन को ले जाया जा रहा था। बताया गया कि चर्च में प्रार्थना सभा चल रही थी, तभी बजरंग दल के कार्यकर्ता बाहर एकत्र हुए और करीब तीन घंटे तक विरोध प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि हिंदू महिलाओं को आर्थिक सहायता, नौकरी और बच्चों की मुफ्त शिक्षा का वादा कर चर्च बुलाया जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि उस समय चर्च के अंदर करीब 150 लोग मौजूद थे, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं। प्रदर्शन की सूचना मिलने पर क्षेत्राधिकारी वीर सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद स्थिति को नियंत्रित करते हुए पुलिस ने पादरी और उनके बेटे को हिरासत में ले लिया।

धर्मांतरण कानून के तहत मामला दर्ज

राधानगर थाना प्रभारी विनोद कुमार मौर्य के अनुसार, स्थानीय निवासी देव प्रकाश पासवान की शिकायत पर पादरी, उनके बेटे और सात अज्ञात लोगों के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

देवप्रकाश ने शिकायत में कहा कि 28 दिसंबर को सुबह प्रार्थनासभा के दौरान करीब 10 बजे उन्हें और उनके साथियों नीरज पासवान तथा सुशील रैदास को देवीगंज स्थित चर्च में बुलाया गया था। प्रार्थना सभा के दौरान हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की गईं। 

शिकायत में देवप्रकाश पासवान ने आरोप लगाया है कि जब उन्होंने और उनके साथियों ने इन गतिविधियों का विरोध किया, तो उन्हें 1,100 रुपये देकर चुप कराने की कोशिश की गई। आरोप है कि पादरी और उसके साथियों ने विरोध न करने के बदले और अधिक पैसे देने की पेशकश भी की।

शिकायत के अनुसार, आरोपी लगातार गांव में आ-जा रहे थे और ग्रामीणों पर अपने घरों में ईसा मसीह की तस्वीर लगाने तथा हर रविवार चर्च आने का दबाव बना रहे थे। यह भी कहा गया कि जो व्यक्ति किसी नए व्यक्ति को चर्च लेकर आएगा, उसे आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाएगा, जबकि इनकार करने वालों को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी जाती थी।

पासवान का कहना है कि इन गतिविधियों से ग्रामीण इलाकों में डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है। लोगों पर मानसिक दबाव डाला जा रहा है, कुछ परिवारों को गांव छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है और कई लोग गहरे मानसिक तनाव में हैं।

इस बीच, पीटीआई के हवाले से एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि गांव के लोगों को प्रार्थना सभाओं में बुलाने के लिए प्रचार वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा था। प्रदर्शन के दौरान ऐसा ही एक वाहन जब्त किया गया, जिससे धार्मिक साहित्य भी बरामद हुआ।

क्षेत्राधिकारी वीर सिंह ने बताया कि चर्च में महिलाओं की मौजूदगी के उद्देश्य की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की छानबीन चल रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यूसीएफ ने जताई धार्मिक उत्पीड़न पर चिंता

यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है, जब कुछ दिन पहले यूनाइटेड क्रिश्चियंस फोरम (यूसीएफ) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर देश में ईसाइयों के खिलाफ धार्मिक उत्पीड़न के चिंताजनक पैटर्न पर चिंता जताई थी।

यूसीएफ ने 26 दिसंबर को लिखे पत्र में कहा था कि क्रिसमस के दौरान कई राज्यों में हमलों की घटनाएं सामने आईं। संगठन के मुताबिक, वर्ष 2024 में ईसाइयों के खिलाफ हिंसा की कुल 814 घटनाएं दर्ज की गईं, यानी औसतन हर महीने 69.5 घटनाएं।

यूसीएफ ने यह भी बताया कि नवंबर 2025 तक ईसाइयों को निशाना बनाने वाली 706 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। संगठन के अनुसार, इन घटनाओं की प्रमुख वजह फर्जी या जबरन धर्मांतरण के आरोप हैं। आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश 184 मामलों के साथ सबसे आगे रहा, जबकि छत्तीसगढ़ में 157 मामले दर्ज किए गए।

यूसीएफ ने ‘क्रिमिनलाइजिंग प्रैक्टिस ऑफ फेथ’ शीर्षक रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि कई मामलों में पुलिस ने कथित तौर पर हिंदुत्ववादी संगठनों के साथ मिलीभगत की और ईसाइयों के खिलाफ हुए अपराधों को नजरअंदाज किया।

author avatar
अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
Anil Sharma, Anil Anuj, Anil anuj articles, bole bharat, बोले भारत, अनिल शर्मा, अनिल अनुज,
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular