नई दिल्ली: बंगाल की सियासत में ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है। तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी ने बुधवार को दावा किया कि विधानसभा स्पीकर रतिंद्र बोस ने उन्हें राज्य विधानसभा में विपक्ष का नेता होने की मान्यता दी है। ऋतब्रत ने कहा, ‘संसदीय मानदंडों के अनुसार हम पश्चिम बंगाल विधानसभा में असली और मुख्य विपक्ष हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘जावेद खान, संदीपन साहा, सबीना यास्मीन और शिउली साहा टीएमसी विधायक दल के उपनेता होंगे।’
टीएमसी से दो दिन पहले निष्कासित हुए ऋतब्रता ने कहा कि बागी समूह में पार्टी के चिन्ह पर चुने गए 58 विधायक शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि दो और विधायकों के उनके साथ जुड़ने की संभावना है। बनर्जी ने बताया कि राज्य विधानसभा में विपक्ष को आवंटित कमरे की चाबियां भी उन्हें सौंप दी गई हैं। इन घटनाक्रम के बीच कोलकाता के मेयर और ममता बनर्जी के सहयोगी फिरहाद हकीम के भी मेयर पद से इस्तीफा देने की खबरे हैं। बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी ने उनके इस्तीफे के अनुरोध को मंजूरी भी दे दी है, हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
‘ममता बनर्जी हमारी मुख्य सलाहकार’
दूसरी ओर, ऋतब्रत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वे ममता बनर्जी से टीएमसी विधायक दल के मुख्य सलाहकार की भूमिका निभाने का अनुरोध भी कर रहे हैं। ऋतब्रत ने कहा, ‘हमारी नेता ममता बनर्जी हैं और हम तृणमूल कांग्रेस से हैं। हम पार्टी को बचाने आगे आए हैं।’ उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी हमारी चीफ एडवायजर हैं और हम उनसे अपील करते हैं कि वे हमे निर्देश देती रहें।
विपक्ष के नए नेता यानी ऋतब्रत बनर्जी ने अभिषेक बनर्जी को लेकर भी बात रखी। उन्होंने अभिषेक बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे विधानसभा के हिस्सा नहीं हैं और इसलिए पश्चिम बंगाल की 18वीं विधानसभा के गठन से उनका कोई संबंध नहीं है।
इससे पहले बुधवार सुबह ऋतब्रत बनर्जी राज्य विधानसभा पहुंचे और दावा किया कि पार्टी के 80 विधायकों में से 59 का समर्थन उनके पास है। पत्र में दावा किया गया कि यही ‘असली’ तृणमूल कांग्रेस है। दिलचस्प ये रहा कि इसमें ममता बनर्जी को गुट का नेता बताया गया था।
टीएमसी में कैसे बढ़ता चला गया असंतोष
पिछले महीने विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही टीएमसी में खटपट की खबरें आने लगी थी। लेकिन लड़ाई खुलकर तब बाहर आने लगी जब तृणमूल कांग्रेस द्वारा अपने वरिष्ठ विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विधानसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया। आरोप हैं कि सहमति दिखाने के लिए पार्टी के कई विधायकों के जाली हस्ताक्षर इस्तेमाल हुए।
तृणमूल विधायक ऋतब्रता बनर्जी और विधायक संदीपान साहा ने इसे लेकर आवाज उठाई। उनकी शिकायतों के बाद पश्चिम बंगाल आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) ने जांच शुरू की। इसके बाद पार्टी ने दोनों नेताओं को निष्कासित कर दिया। इसके बाद कई विधायक के इन दोनों के संपर्क में आने और बागी गुट तैयार होने की खबरें आने लगी।
इस बीच तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष का बयान भी आया था जिसमें उन्होंने कहा था कि मतभेदों को पार्टी के भीतर ही सुलझाया जा सकता था। उन्होंने बागी गुट पर चुनौतीपूर्ण समय में पार्टी को ‘धोखा देने’ का आरोप लगाया।



