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ट्रंप के संबोधन के बाद महंगा हुआ कच्चा तेल, एशियाई बाजार में दिखी गिरावट

ट्रंप ने कहा कि आज की स्थिति में ईरान की नेवी खत्म हो चुकी है, एयरफोर्स बर्बाद हो गई है और उसके शीर्ष नेता मारे जा चुके हैं। उसकी मिसाइल और ड्रोन क्षमता को काफी हद तक निष्क्रिय कर दिया गया है, जबकि हथियार बनाने वाली सुविधाएं तबाह कर दी गई हैं।

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IANS

ईरान के साथ एक महीने से जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्हाइट हाउस में संबोधन के बाद वैश्विक बाजार में हलचल मची हुई है। उन्होंने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो आने वाले हफ्तों में अमेरिकी सेना उसे पाषाण युग में वापस धकेल सकती है। ट्रंप के ईरान को लेकर कड़े रुख और आने वाले हफ्तों तक संघर्ष जारी रहने के संकेत से वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल मच गया है।

अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस बयान के बाद शेयर बाजारों में गिरावट आई, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया। ट्रंप की कड़ी चेतावनी के तुरंत बाद ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 4.8% बढ़कर 106.04 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 4.2% उछलकर 104.29 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।

ट्रंप के संबोधन के बाद अमेरिकी बाजारों में दबाव

द वॉल स्ट्रीट जर्नल और द न्यूयॉर्ट टाइम्स और सीएनबीसी के अनुसार, बाजार की प्रतिक्रिया इतनी तीव्र थी कि ट्रंप के भाषण शुरू होने के महज 25 मिनट के भीतर ही एस एंड पी 500 फ्यूचर्स से निवेशकों की 550 अरब डॉलर (लगभग 46 लाख करोड़) की बाजार पूंजी स्वाहा हो गई।

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नसदक फ्यूचर्स में लगभग 1% की गिरावट आई, जबकि डॉव फ्यूचर्स करीब 350 अंक टूट गए। निवेशकों को आशंका है कि लंबे समय तक चलने वाले इस संघर्ष से तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है।

ऊर्जा क्षेत्र में आई इस तेजी के विपरीत कीमती धातुओं में गिरावट दर्ज की गई; सोना 4,700 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गया और चांदी 73 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे फिसल गई।

ट्रंप के संबोधन का असर मुद्रा बाजार पर भी दिखा। डॉलर प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हुआ। डॉलर इंडेक्स, जो प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी मुद्रा की ताकत को मापता है, भाषण के बाद 99.925 के उच्च स्तर तक पहुंच गया और बाद में 0.3% बढ़कर 99.861 पर कारोबार करता दिखा। यूरो 0.3% गिरकर 1.1554 डॉलर पर आ गया, जबकि ब्रिटिश पाउंड भी लगभग 0.3% कमजोर होकर 1.3254 डॉलर पर रहा। वहीं जापानी येन भी दबाव में रहा और 159.25 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।

एशियाई बाजार में भी गिरावट

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, एशियाई बाजारों पर भी इसका असर दिखा। जापान का Nikkei 225 करीब 1.5% गिरा, दक्षिण कोरिया का Kospi 2.6% तक लुढ़का और हांगकांग का Hang Seng करीब 1% नीचे रहा। इससे पहले शुरुआती कारोबार में बाजारों में हल्की बढ़त थी, जो ट्रंप के बयान के बाद उलट गई।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस युद्ध के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति और मांग के बीच करीब 10% का अंतर आ चुका है। इससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं में सप्लाई चेन पर दबाव और व्यापक राशनिंग का खतरा बढ़ गया है।

वहीं, ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई का दबाव भी बढ़ रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका में पेट्रोल की कीमत 4 डॉलर प्रति गैलन के पार पहुंच गई है, जिससे आम लोगों और कारोबार पर असर पड़ रहा है। हालांकि ट्रंप ने इन बढ़ती कीमतों को अस्थायी बताया और कहा कि संघर्ष खत्म होने के बाद बाजार स्थिर हो जाएंगे। हालांकि अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है तो आर्थिक वृद्धि पर असर पड़ सकता है और मंदी का जोखिम भी बढ़ सकता है।

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बता दें कि फरवरी के अंत में शुरू हुए ईरान संघर्ष के बाद से एशियाई बाजारों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, क्योंकि यह क्षेत्र ऊर्जा आपूर्ति के लिए पश्चिम एशिया पर काफी निर्भर है। होर्मुज स्ट्रेट के भी बंद रहने से विश्लेषकों का कहना है कि अगर यहां नाकेबंदी जारी रहती है तो वैश्विक सप्लाई और सख्त हो सकती है, जिससे कीमतें ऊंची बनी रहेंगी।

ट्रंप ने क्या कहा?

स्थानीय समयानुसार बुधवार को टीवी संबोधन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत लगभग खत्म कर दी गई है। उन्होंने कहा कि करीब एक महीने पहले शुरू किए गए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अमेरिका ने दुनिया में आतंक के सबसे बड़े प्रायोजक ईरान को निशाना बनाया था और अब युद्ध के मैदान में तेजी से बढ़त हासिल की जा रही है।

ट्रंप ने कहा, ‘आज की स्थिति में ईरान की नेवी खत्म हो चुकी है, एयरफोर्स बर्बाद हो गई है और उसके शीर्ष नेता मारे जा चुके हैं। उसकी मिसाइल और ड्रोन क्षमता को काफी हद तक निष्क्रिय कर दिया गया है, जबकि हथियार बनाने वाली सुविधाएं तबाह कर दी गई हैं।’

उन्होंने इस सैन्य अभियान को ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए जरूरी बताया। ट्रंप ने कहा, ‘मैंने कसम खाई है कि ईरान को कभी न्यूक्लियर हथियार नहीं रखने दूंगा,” और ईरान की मौजूदा सरकार को “दुनिया की सबसे हिंसक सरकार’ करार दिया।

‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ समेत पहले के हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है, हालांकि ईरान ने अन्य जगहों पर कार्यक्रम फिर से खड़ा करने की कोशिश की।

बीबीसी के अनुसार, ट्रंप के संबोधन पर अमेरिकी राजनीति में भी तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सीनेट के डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने इसे “अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी नीतिगत गलतियों में से एक” करार दिया और आरोप लगाया कि ट्रंप स्पष्ट रणनीति पेश करने में विफल रहे हैं।

वहीं रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ट्रंप का समर्थन करते हुए कहा कि ईरान के पास समझौता करने या और हमलों का सामना करने का विकल्प है। उन्होंने इसे इस अभियान का निर्णायक क्षण बताया।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...

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