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अमेरिकाः डोनाल्ड ट्रंप ने 29 लाख डॉलर कंप्यूटर चिप्स सौदे को किया रद्द, राष्ट्रीय हितों के लिए बताया खतरा

डोनाल्ड ट्रंप ने 29 लाख डॉलर के चिप सौदे में विनिवेश का आदेश दिया है और इसके पीछे की वजह अमेरिकी हितों की सुरक्षा बताई है।

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फोटोः आईएएनएस

वाशिंगटनः राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार (2 जनवरी) को 29 लाख डॉलर के कंप्यूटर चिप्स सौदे को रद्द करने का आदेश दिया। ट्रंप का मानना है कि यदि वर्तमान मालिक, हीफो कॉर्प, प्रौद्योगिकी पर नियंत्रण बनाए रखता है तो यह अमेरिकी सुरक्षा हितों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने हीफो कॉर्प कंपनी के वर्तमान मालिक को चीन का होना का दावा किया है। इसीलिए सौदे को रद्द करने का फैसला किया है।

अमेरिका और चीन के बीच तनाव ट्रंप के पहले कार्यकाल से जारी है। हालांकि, दूसरे कार्यकाल में दोनों देशों ने एक-दूसरे की वस्तुओं पर बंपर टैरिफ का ऐलान किया है।

इस कार्यकारी आदेश ने एक ऐसे व्यापारिक सौदे पर ध्यान केंद्रित किया, जिसे मई 2024 में राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन के दौरान घोषित किए जाने पर बहुत कम ध्यान मिला था। इस सौदे में एयरोस्पेस और रक्षा विशेषज्ञ एमकोर कॉर्प ने अपने कंप्यूटर चिप्स और वेफर फैब्रिकेशन कार्यों को हीफो को 2.92 मिलियन डॉलर में बेच दिया – इस कीमत में लगभग 1 मिलियन डॉलर की देनदारियों का भार भी शामिल था।

डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?

डोनाल्ड ट्रंप हालांकि अब मांग कर रहे हैं कि हीफो 180 दिनों के भीतर उस तकनीक को बेच दे और इसके लिए वे “विश्वसनीय सबूत” का हवाला दे रहे हैं कि वर्तमान मालिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना का नागरिक है।

HieFo की स्थापना डॉ. गेन्जाओ झांग और हैरी मूर ने की थी। सौदा पूरा होने के बाद जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, Emcore से अधिग्रहीत तकनीक की योजनाओं की देखरेख लगभग उसी टीम द्वारा की जानी थी जो अल्हाम्ब्रा, कैलिफोर्निया में कार्यरत थी।

हाइफो के सीईओ बनने से पहले एमकोर में इंजीनियरिंग के उपाध्यक्ष रहे झांग ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित विभिन्न उद्देश्यों के लिए डिजाइन की गई तकनीक के साथ “सबसे नवीन और क्रांतिकारी समाधानों की खोज जारी रखने” का वादा किया।

हीफो ने नहीं की कोई टिप्पणी

ट्रम्प के आदेश के बारे में टिप्पणी के अनुरोध पर हीफो ने फिलहाल तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

HieFo डील के समय Emcore एक सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध कंपनी थी, लेकिन पिछले साल निवेश फर्म Charlesbank Capital Partner द्वारा इसे निजी कंपनी बना दिया गया।

डोनाल्ड ट्रंप ने इस डील को अमेरिका सुरक्षा हितों से जोड़ते हुए खतरों की आशंका व्यक्त की है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के लिए खतरा बताया है और इसीलिए 29 लाख कंप्यूटर चिप्स के सौदे को रद्द करने की बात कही है।

यह भी पढ़ें – वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले की ट्रंप ने की पुष्टि, कहा- हमने राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को पकड़ लिया है

गौरतलब है कि अमेरिका और चीन के बीच डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में भी तनाव भरे संबंध थे। वहीं, दूसरे कार्यकाल में तनातनी और बढ़ती दिखाई दी जब दोनों देशों ने एक-दूसरे पर बंपर टैरिफ वृद्धि का ऐलान किया।

डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव से पहले अमेरिका फर्स्ट की भावना से जोड़ते हुए कैंपेन ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन (MAGA)’ से शुरू किया था। इसके साथ ही टैरिफ संबंधी ऐलान भी किया था जो कि ट्रंप ने भारत, चीन समेत अन्य देशों पर भी लागू किया।

इसके साथ ही ट्रंप ने अवैध प्रवासियों का भी मुद्दा जोरों से उठाया था और सत्ता में वापसी के बाद कई देशों के अवैध प्रवासियों को वापस भेजने का ऐलान किया था।


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अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...

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