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दिल्ली कार ब्लास्ट केसः जांच टीम को घटनास्थल से मिले 9MM के तीन कारतूस, फंडिंग का भी खुलासा

ब्लास्ट में मारे गए आतंकी डॉ. उमर मोहम्मद नबी की गतिविधियों को लेकर नूंह और फरीदाबाद में नए सुराग मिले हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, उमर ने अल फलाह यूनिवर्सिटी में कार्यरत एक इलेक्ट्रीशियन शोएब की मदद से 10 दिनों के लिए कमरा लिया था और ब्लास्ट से कुछ घंटे पहले तक इलाके में घूमता रहा।

दिल्ली में लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट की जांच में हर दिन नई और चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही है। जांच के दौरान दिल्ली पुलिस को विस्फोट की जगह से 9 मिलीमीटर कैलिबर के तीन कारतूस मिले हैं। इनमें दो कारतूस जिंदा थे और एक खाली खोखा था। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के अनुसार, ये कारतूस आम नागरिकों के लिए प्रतिबंधित होते हैं और इनका इस्तेमाल आमतौर पर केवल सुरक्षा बल या विशेष अनुमति वाले लोग ही करते हैं।

हालांकि जांच टीम को मौके से कोई पिस्तौल या बंदूक का हिस्सा नहीं मिला है। यानी गोली के कारतूस तो मिले हैं, लेकिन उन्हें चलाने वाला हथियार अभी भी लापता है। पुलिस ने मौके पर मौजूद सभी पुलिसकर्मियों के कारतूसों की जाँच भी कराई, लेकिन किसी का भी कारतूस कम नहीं था। अब पुलिस के सामने यह बड़ी चुनौती है कि ये कारतूस वहाँ कैसे पहुँचे। एक संभावना यह भी है कि ये विस्फोट के दौरान कार से बाहर गिर गए हों।

उधर, ब्लास्ट में मारे गए आतंकी डॉ. उमर मोहम्मद नबी की गतिविधियों को लेकर नूंह और फरीदाबाद में नए सुराग मिले हैं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, उमर ने अल फलाह यूनिवर्सिटी में कार्यरत एक इलेक्ट्रीशियन शोएब की मदद से 10 दिनों के लिए कमरा लिया था और ब्लास्ट से कुछ घंटे पहले तक इलाके में घूमता रहा। इसी यूनिवर्सिटी के सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि ब्लास्ट में इस्तेमाल हुई i20 कार 29 से 30 अक्टूबर तक कैंपस में ही खड़ी रही थी। कार बाद में उसी दिन बाहर निकली। यूनिवर्सिटी से जुड़े तीन डॉक्टर पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जिसके बाद यह संस्था सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आ गई है।

20 लाख की फंडिंग और व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल..और क्या पता चला?

जांच में फंडिंग से जुड़ा एक बड़ा खुलासा भी हुआ है। खुफिया एजेंसियों ने तीन डॉक्टरों- उमर, मुजम्मिल और शाहीन से जुड़ी 20 लाख रुपये की संदिग्ध रकम का ट्रेल पकड़ा है, जिसे जैश-ए-मोहम्मद के एक हैंडलर ने हवाला के जरिए भेजा था। इसमें से लगभग 3 लाख रुपये से 26 क्विंटल एनपीके उर्वरक खरीदा गया, जो विस्फोटक तैयार करने में इस्तेमाल हुआ। मुजम्मिल से जल्द मिले इनपुट के आधार पर एजेंसियां अब इस मॉड्यूल की पूरी फंडिंग और सप्लाई चेन को जोड़ने में लगी हैं।

सुरक्षा एजेंसियों ने 10 नवंबर को जम्मू-कश्मीर, हरियाणा और यूपी में फैले एक बड़े व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था। इसमें 2,900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री बरामद हुई और आठ लोग, जिनमें तीन डॉक्टर शामिल थे, गिरफ्तार हुए। कुछ ही घंटों बाद लाल किले के पास कार विस्फोट हुआ, जिसमें 13 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद से जांच एजेंसियां शैक्षणिक संस्थानों, खासकर अल फलाह यूनिवर्सिटी, की भूमिका पर गंभीरता से नजर रख रही हैं ताकि ऐसे नेटवर्क दोबारा खड़े न हो सकें।

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अनिल शर्मा
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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