नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने FSSAI के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें डाबर इंडिया को शहद, गाय का घी और खाने वाले तेल जैसे अपने फ़ूड प्रोडक्ट्स पर ‘100 प्रतिशत’ होने का दावा करने से रोका गया था।
जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि डाबर ने राहत पाने के लिए शुरुआती तौर पर एक मजबूत मामला बनाया है क्योंकि FSSAI का आदेश कंपनी को सुनवाई का मौका दिए बिना ही जारी किया गया था।
दिल्ली हाई कोर्ट ने डाबर को दी राहत
दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर भी जोर दिया कि डाबर कई दशकों से ये उत्पाद बेच रही है।
जस्टिस ने कहा कि ” प्रथम दृष्टया अदालत का मानना है कि सुनवाई का मौका दिए बिना रोक लगाने का आदेश जारी नहीं किया जाना चाहिए था। सुनवाई की अगली तारीख तक, विवादित आदेश पर रोक लगाई जाती है। ” इसके साथ ही उन्होंने मामले की सुनवाई के लिए दो हफ्ते बाद 24 अगस्त की तारीख तय कर दी।
डाबर की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि FSSAI का आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए जारी किया गया था क्योंकि इसके लिए कोई ‘कारण बताओ नोटिस’ नहीं दिया गया और न ही कोई सुनवाई हुई।
केंद्र सरकार के वकील ने आदेश का बचाव करते हुए कहा कि डाबर को पहले ‘ सुधार के लिए नोटिस ‘ और सलाह दी गई थी और खाद्य उत्पादों पर उसका ‘100 प्रतिशत’ वाला दावा भ्रामक था।
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FSSAI ने क्या कहा था?
बताते चलें कि डाबर ने FSSAI के प्रतिबंध आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। नियामक ने कंपनी को कुछ चिन्हित खाद्य उत्पादों की बिक्री तत्काल रोकने का निर्देश दिया था, जिन पर “ 100 प्रतिशत प्राकृतिक ”, “ 100 प्रतिशत शुद्ध ”, “100 प्रतिशत शुद्धता की गारंटी”, “100 प्रतिशत ऑर्गेनिक” और “100 प्रतिशत टेंडर नारियल पानी” जैसे दावे किए गए थे।
मामले को शुरुआत में तत्काल सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के समक्ष रखा गया था। पीठ ने मामले को तत्काल आधार पर सुनवाई के लिए अनुमति दी थी।
यह भी दलील दी गई कि आदेश प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना और कंपनी को कोई कारण बताओ नोटिस जारी किए बिना पारित किया गया।
एफएसएसएआई की ओर से पेश केंद्र सरकार के स्थायी अधिवक्ता आशीष दीक्षित ने नियामक की कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध आदेश जारी करने से पहले डाबर को सुधार संबंधी नोटिस दिया गया था।

दलीलों पर विचार करने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया मामला डाबर के पक्ष में बनता है और अगली सुनवाई की तारीख तक प्रतिबंध आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी।
एफएसएसएआई ने इससे पहले कहा था कि डाबर के कुछ उत्पादों पर इस्तेमाल किए गए “100 प्रतिशत” दावे अस्पष्ट, सत्यापित न किए जा सकने वाले और उपभोक्ताओं को गुमराह करने की संभावना वाले थे। नियामक के अनुसार, यह खाद्य सुरक्षा एवं मानक विज्ञापन तथा दावे विनियम, 2018 का उल्लंघन है।
नियामक ने डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर और डाबर ऑर्गेनिक हनी पर जैविक भारत लोगो के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई थी। खाद्य नियामक ने आरोप लगाया था कि इन उत्पादों के पास वैध एफएसएसएआई ऑर्गेनिक अनुमोदन नहीं था, जो खाद्य सुरक्षा एवं मानक जैविक खाद्य विनियम, 2017 का उल्लंघन है।
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(समाचार एजेंसी आईएएनएस से इनपुट्स के साथ)



