कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG 2026) का आगाज 23 जुलाई से स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में होने जा रहा है। 2 अगस्त तक चलने वाले इस आयोजन में भारत 126 खिलाड़ियों का दल अलग-अलग खेलों के लिए भेज रहा है। हालांकि, यह पहले भेजे गए भारतीय दल से काफी छोटा है। ऐसा इसलिए कि इस बार का राष्ट्रमंडल खेल पहले के मुकाबले काफी छोटा है।
रिकॉर्ड बताते हैं कि यह 1994 के बाद सबसे छोटा कॉमनवेल्थ गेम्स होगा। जाहिर है ऐसे में राष्ट्रमंडल खेलों को लेकर उत्साह भी कम हुआ है क्योंकि कई खेल इस बार के इवेंट से बाहर कर दिए गए हैं। इस बार ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स में केवल 10 खेल शामिल किए गए हैं। इनमें 74 देशों के करीब 3,000 खिलाड़ी हिस्सा लेंगे।
इसी के साथ स्कॉटलैंड 12 वर्षों के भीतर दूसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करने वाला दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया ने 2006 (मेलबर्न) और 2018 (गोल्ड कोस्ट) में खेलों की मेजबानी की थी। साथ ही ग्लास्गो दुनिया का पहला शहर बन जाएगा जिसने सिर्फ 12 साल के भीतर दूसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की है। ग्लास्गो में इससे पहले यहां 2014 में भी राष्ट्रमंडल खेलों का सफल आयोजन हुआ था।
CWG 2026: भारत के लिए क्यों मुश्किल स्थिति?
कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत के लिए सबसे सफल रहे हॉकी, बैडमिंटन, कुश्ती, शूटिंग और टेबल टेनिस जैसे खेलों को इस बार बाहर कर दिया गया है। ऐसे में भारत के लिए मेडल टैली में टॉप-5 में जगह बनाने में इस बार संघर्ष करना पड़ सकता है। भारत राष्ट्रमंडल खेलों में पिछले करीब दो दशक से लगातार टॉप-5 में जरूर रहा है।
पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लगभग आधे पदक इन्हीं खेलों से आए थे, जो इस बार नहीं है। ऐसे में अब भारत की उम्मीदें मुख्य रूप से एथलेटिक्स, मुक्केबाजी और वेटलिफ्टिंग पर टिकी होंगी। इस बार लागत कम रखने के लिए प्रतियोगिताओं की संख्या घटाई गई है। कुल 10 खेल होंगे, जिनमें 6 पैरा स्पोर्ट्स भी शामिल हैं। जिन खेलों को शामिल किया गया है, वे हैं-
आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक
एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स
बॉल्स और पैरा बॉल्स
मुक्केबाजी
ट्रैक साइक्लिंग और पैरा ट्रैक साइक्लिंग
नेटबॉल
जूडो
तैराकी और पैरा तैराकी
वेटलिफ्टिंग और पैरा पावरलिफ्टिंग
3×3 बास्केटबॉल और 3×3 व्हीलचेयर बास्केटबॉल
साल 2022 के बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में 20 खेले खेले गए, जबकि ग्लासगो में यह संख्या आधी यानी 10 हो गई है। इसे लेकर चर्चा भी है। ग्लास्गो 2026 में फील्ड हॉकी, बैडमिंटन, कुश्ती, निशानेबाजी, क्रिकेट, स्क्वैश और टेबल टेनिस को शामिल नहीं किया गया है। इसके अलावा मैराथन, रेस वॉकिंग, माउंटेन बाइकिंग और रोड साइक्लिंग जैसे आउटडोर इवेंट भी हटाए गए हैं। पारंपरिक लॉन बाउल्स को भी इस बार खुले मैदान के बजाय इनडोर फॉर्मेट में कराया जाएगा।
कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 को क्यों छोटा किया गया?
मूल रूप से 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य को मिली थी। अगस्त 2022 में उसे मेजबान चुना गया था और उस समय 21 खेलों के आयोजन की योजना थी, जो 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स के बराबर थी।
हालांकि, तैयारियों को लेकर बढ़ते खर्चों को देखते हुए जुलाई 2023 में विक्टोरिया सरकार ने आयोजन से हाथ खींच लिया। राज्य की ओर से तब बताया गया कि आयोजन की अनुमानित लागत बढ़कर 6 से 7 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक पहुंच गई है, जो राज्य के लिए आर्थिक रूप से उचित नहीं है। इसके बाद विक्टोरिया ने कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन के साथ समझौता खत्म कर दिया।
ऐसे में नए मेजबान की तलाश शुरू हुआ। कई महीनों बाद भी जब कोई दूसरा मेजबान सामने नहीं आया तो अप्रैल 2024 में ग्लास्गो ने आगे आकर खेलों की मेजबानी का प्रस्ताव दिया। ग्लास्गो इससे पहले 2014 में इन खेलों की मेजबानी कर चुका है। ऐसे में खर्च कम रखने के लिए शहर ने 2014 कॉमनवेल्थ गेम्स के स्टेडियम और इंफ्रास्ट्रक्चर का दोबारा इस्तेमाल करने का फैसला किया।
इस बार अलग से एथलीट्स विलेज नहीं बनाया गया है। खिलाड़ियों को शहर के होटलों के साथ ग्लास्गो कैलेडोनियन यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटी ऑफ ग्लास्गो के छात्रावासों में ठहराया जाएगा। करीब 160 मिलियन पाउंड (करीब दो हजार करोड़ रुपये) के बजट में हो रहा यह आयोजन 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स की तुलना में लगभग 60 प्रतिशत सस्ता है।
मेडल के लिए किन खिलाड़ियों पर भारत की नजर
मेडल की संख्या इस बार घटने की आशंका के बीच फैंस की उम्मीदें कुछ दमदार एथलीटों पर टिकी होंगी, जो भारत को मेडल दिला सकते हैं। एक नजर इस लिस्ट पर भी डालते हैं-
नीरज चोपड़ा (जेवलिन थ्रो)- भारत की सबसे बड़ी पदक उम्मीद एक बार फिर ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा होंगे। नीरज 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स चोट के कारण नहीं खेल पाए थे। इसके बाद उन्होंने पेरिस ओलंपिक में रजत पदक जीता और 2025 दोहा डायमंड लीग में पहली बार 90.23 मीटर का थ्रो कर अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। हालांकि बाद में चोट के कारण करीब नौ महीने मैदान से दूर रहे। 2026 में वापसी के बाद वह भारत की ओर से मेडल के लिए सबसे मजबूत दावेदार हैं।
मीराबाई चानू (वेटलिफ्टिंग)- टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता और बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता मीराबाई चानू से भी भारत को बड़ी उम्मीदें हैं। हाल ही में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में उन्होंने 89 किलोग्राम स्नैच, 116 किलोग्राम क्लीन एंड जर्क सहित कुल 205 किलोग्राम कुल वजन उठाकर शानदार फॉर्म का परिचय दिया था।
लवलीना बोरगोहेन (मुक्केबाजी)- टोक्यो ओलंपिक कांस्य पदक विजेता और 2023 विश्व चैम्पियन लवलीना बोरगोहेन भी भारत की मजबूत दावेदारों में शामिल हैं। 75 किलोग्राम वर्ग में उतरने के बाद उनके प्रदर्शन में कुछ उतार-चढ़ाव जरूर आया है, लेकिन वह अभी भी भारत की सबसे अनुभवी मुक्केबाजों में गिनी जाती हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स का पदक उनकी झोली में अभी नहीं है और इस बार वह इस कमी को जरूर पूरा करना चाहेंगी।
मुरली श्रीशंकर (लॉन्ग जंप)- लॉन्ग जंप स्टार मुरली श्रीशंकर ने 2022 बर्मिंघम गेम्स में रजत पदक जीता था। घुटने की गंभीर चोट के बाद उन्होंने शानदार वापसी की है। हाल ही में राष्ट्रीय अंतरराज्यीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने 8.38 मीटर की छलांग लगाई, जो उनके करियर की दूसरी सर्वश्रेष्ठ छलांग है। ऐसे में उनसे भी भारत को पदक की उम्मीद होगी।
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