नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार (22 जुलाई) को केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को दो जनहित याचिकाओं पर नोटिस जारी किया। इन याचिकाओं में 20 और 21 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस की ज्यादतियों का मुद्दा उठाया गया था।
दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा बताई गई घटनाएं कोई अलग-थलग मामले नहीं थे, जिनके लिए कोर्ट प्रभावित पक्षों से निजी शिकायत दर्ज करने को कह सके।
दिल्ली हाई कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर क्या कहा?
अदालत ने कहा कि ” अगर यह कोई अलग-थलग घटना होती तो स्थिति कुछ और होती। हो सकता है कि उन्हें प्राइवेट शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस के पास जाने को कहना आपका (पुलिस का) सही कदम रहा हो। लेकिन यह ऐसी (अलग-थलग) घटना नहीं है। “
इसलिए, कोर्ट ने पुलिस को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही, कोर्ट ने पुलिस से CCTV फुटेज और वीडियो से जुड़े अन्य सबूतों को सुरक्षित रखने के लिए भी कहा।
इसके साथ ही अदालत ने पुलिस से CCTV फुटेज और वीडियो से जुड़े अन्य सबूतों को सुरक्षित रखने के लिए भी कहा।
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा “नोटिस जारी किया जाए। दिल्ली पुलिस और UOI (भारत सरकार) की ओर से पेश होने वाले वकील ने नोटिस स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने इन याचिकाओं में याचिकाकर्ताओं के वकीलों की दलीलें सुनीं। कोर्ट ने आदेश दिया कि प्रतिवादियों की ओर से चार हफ्ते के भीतर जवाबी हलफनामा (counter affidavit) दाखिल किया जाए। याचिकाकर्ताओं को जवाब (rejoinder) दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया गया है। साथ ही, कोर्ट ने निर्देश दिया कि रिट याचिकाओं में बताई गई घटना से जुड़े सभी जरूरी रिकॉर्ड – जिसमें CCTV फुटेज और अगर कोई वीडियोग्राफी हो तो वह भी शामिल है – उन्हें पुलिस की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के अनुसार सुरक्षित रखा जाए।
11 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई 11 सितंबर को की जाएगी।
गौरतलब है कि देश भर के छात्र और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के कार्यकर्ता जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी बार-बार परीक्षा के पेपर लीक होने के मामले में जवाबदेही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों ने 20 जुलाई को संसद भवन तक मार्च करने की योजना बनाई थी लेकिन दिल्ली पुलिस ने बीच-बचाव कर उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। छात्रों और प्रदर्शनकारियों की संख्या बहुत अधिक थी। पुलिस ने इस बीच लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इसमें कई प्रदर्शनकारी घायल भी हो गए।
पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़े जाने के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन्हीं वीडियोज को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि, इस मामले में दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई से इंकार किया है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने कहा कि हमारे पास वीडियो देखने का समय नहीं है।
गौरतलब है कि 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को के बाद मंगलवार (21 जुलाई) को राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं ने पीएम आवास के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव और अन्य सांसदों को पुलिस ने हिरासत में लिया और रात करीब साढ़े 10 बजे रिलीज किया गया।
राहुल गांधी ने इस मामले में बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। इस दौरान राहुल गांधी ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की बात दोहराई है।
राहुल गांधी ने दावा किया कि कभी दुनिया की बेहतर शिक्षा प्रणालियों में गिनी जाने वाली भारतीय शिक्षा व्यवस्था अब भरोसे के संकट से जूझ रही है। उनका आरोप था कि पिछले एक दशक में 152 बार विभिन्न परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, यानी औसतन हर महीने एक बड़ी घटना सामने आई।
उन्होंने कहा कि हर पेपर लीक के बाद लाखों छात्रों को दोबारा परीक्षा की तैयारी करनी पड़ती है, लेकिन अब तक किसी भी मामले में दोषियों को सजा नहीं मिली। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि यदि इतने मामलों के बावजूद कोई दोषी नहीं ठहराया गया, तो इसका मतलब है कि व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं।
(समाचार एजेंसी आईएएनएस से इनपुट्स के साथ)

