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‘चीन और पाकिस्तान बना रहे ऐसी परमाणु मिसाइलें जिसकी पहुंच अमेरिका तक होगी’, यूएस इंटेलिजेंस चीफ का दावा

अमेरिकी सांसदों के सामने Annual Threat Assessment को प्रस्तुत करते हुए तुलसी गैबार्ड ने बताया कि संयुक्त राज्य अमेरिका पर हमला करने में सक्षम मिसाइलों की अनुमानित संख्या 2035 तक 16,000 हो गई है, जो 2025 तक 3,000 थी।

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New Delhi: U.S. Director of National Intelligence Tulsi Gabbard speaks at the Raisina Dialogue 2025, New Delhi on Tuesday, March 18, 2025. (IANS)
तुलसी गैबार्ड (फोटो- IANS)

वॉशिंगटन: अमेरिकी खुफिया प्रमुख तुलसी गैबार्ड ने दावा किया है कि रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए सबसे महत्वपूर्ण परमाणु खतरे हैं। अमेरिकी सीनेट में 2026 के वार्षिक खतरे के आकलन (Annual Threat Assessment) को प्रस्तुत करते हुए तुलसी गैबार्ड ने यह बातें कही। 34 पन्नों की रिपोर्ट में यह आकलन किया गया है।

गैबार्ड ने बुधवार को सीनेट इंटेलिजेंस कमिटी के समक्ष कहा, ‘इंटेलिजेंस कम्यूनिटी का आकलन है कि रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान परमाणु और पारंपरिक पेलोड से लैस कई प्रकार की नवीन, उन्नत या पारंपरिक मिसाइल वितरण प्रणालियों पर शोध और इसका विकास कर रहे हैं, जो हमारे देश को उनकी रेंज में ला सकता है।’

गैबर्ड ने कहा कि चीन और रूस उन्नत मिसाइल प्रणालियाँ विकसित कर रहे हैं जो अमेरिकी मिसाइल रक्षा प्रणालियों को भेदने या उन्हें पार करने में सक्षम हैं। उन्होंने आगे कहा, ‘उत्तर कोरिया की आईसीबीएम मिसाइलें पहले ही अमेरिकी धरती तक पहुँच सकती हैं, और वह अपने परमाणु हथियारों का विस्तार करने के लिए प्रतिबद्ध है।’

खुफिया प्रमुख ने इस बात पर भी जोर दिया कि उत्तर कोरिया अब रूस और चीन के साथ अपने संबंध मजबूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह बदलता गठबंधन वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर नतीजे लेकर आ सकता है।

पाकिस्तान पर क्या बोलीं गैबार्ड

पाकिस्तान के बारे में बोलते हुए गैबार्ड ने अमेरिकी सांसदों को बताया कि इस इस्लामी गणराज्य द्वारा विकसित लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों में संभावित रूप से ऐसी ICBM शामिल हो सकती हैं जिनकी मारक क्षमता अमेरिका पर हमला करने में सक्षम होगी।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘पाकिस्तान लगातार अधिक अत्‍याधुन‍िक मिसाइल तकनीक विकसित कर रहा है, जो उसकी सेना को दक्षिण एशिया से परे लक्ष्यों तक मार करने की क्षमता वाले मिसाइल सिस्टम विकसित करने का साधन प्रदान करती है, और यदि ये प्रवृत्तियां जारी रहती हैं, तो यह अमेरिका के लिए खतरा बन सकती हैं।’

गैबर्ड ने साथ ही अल-कायदा और ISIS को विदेशों में अमेरिकी हितों के लिए महत्वपूर्ण और स्थायी खतरे के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि दोनों समूह अफ्रीका, मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों में खतरनाक उपस्थिति बनाए हुए हैं।

उन्होंने दावा किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका पर हमला करने में सक्षम मिसाइलों की अनुमानित संख्या 2025 के 3,000 से बढ़कर साल 2035 तक 16,000 हो गई है।

ईरान मसले पर ट्रंप से अलग बयान

ईरान की स्थिति पर गैबर्ड ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान से उलट बातें कही। उन्होंने कहा कि जून 2025 में अमेरिका-इजराइल के हमले में यूरेनियम संवर्धन क्षमता नष्ट होने के बाद ईरान ने इसे फिर से शुरू करने का कोई प्रयास नहीं किया।

गैबर्ड ने सीनेट में दिए गए अपने बयान में कहा, ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के परिणामस्वरूप, ईरान का परमाणु संवर्धन कार्यक्रम पूरी तरह से नष्ट हो गया। तब से उन्होंने अपनी संवर्धन क्षमता को फिर से स्थापित करने का कोई प्रयास नहीं किया है।’

वहीं, सुनवाई से पहले व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने फॉक्स न्यूज को बताया कि ट्रंप को गैबर्ड पर पूरा भरोसा है। बताते चलें कि गैबर्ड का यह बयान ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के पूर्व शीर्ष सहयोगी जोसेफ केंट के नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के निदेशक पद से इस्तीफा देने के बाद आया है।

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विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...

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